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वेबलेन वस्तु

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रोल्स रॉयस फैण्टम जैसी महँगी कारें जो केवल अपनी ऊँची कीमत के कारण विशिष्ट मानी जाती हैं, वेबलेन वस्तुओं की श्रेणी में आती हैं।

वेबलेन वस्तु (साँचा:Lang-en) से आशय उन सामग्रियों से है जिनके लिए उपभोक्ताओं की पसंद या नापसंद उस वस्तु विशेष की कीमत में बढ़ोत्तरी या गिरावट से तय होता हो। अर्थशास्त्र की माँग आपूर्ति नियम की शृंखला में वेबलेन प्रभाव उस दशा को दर्शाता है जब उपभोक्ता द्वारा किसी वस्तु की कीमत गिरने को उसकी सामाजिक स्थिति (वैभव प्रतीक) में गिरावट मान लिया जाता है।

अर्थशास्त्री थोर्स्टीन वेबलेन (Thorstein Veblen) के नाम पर वेबलेन प्रभाव का नामकरण किया गया है, जिन्होंने सर्वप्रथम १८९९ के दौरान प्रत्यक्ष उपभोग और सामाजिक स्थिति जैसे सिद्धांतों की पहचान की थी।[]

औचित्य[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

कुछ वस्तुएँ जैसै कि लग्जरी कारें, डिजायनर कपड़े या उत्पाद, वेबलेन वस्तुओं की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में इन उत्पादों की कीमत में कमी कर देने से उपभोक्ताओं के मन में इन वस्तुओं के प्रति रूचि और उनके वैभव प्रतीक में भी गिरावट के रूप में देखा जाने लगता है। चूंकि वैभव विलास से जुड़ी वस्तुओं के मूल्य ही बहुधा उनके वैभव प्रतीक (स्टेटस सिंबल) को निर्धारित करते हैं इसलिए उनके मूल्य में गिरावट विशिष्ट उपभोक्ताओं को उस उत्पाद के प्रति अनिच्छुक बना देते हैं।[]

संबंधित अवधारणाएँ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

  • स्नॉब प्रभाव : जब उपभोक्ता किसी वस्तु को केवल इसलिए वरीयता देता है कि वह वस्तु अत्यधिक महँगी या दुर्लभ है तथा जिससे उस उपभोक्ता के वैभव प्रतीक (स्टेटस सिंबल) में इजाफा होता है तो इस स्थिति को स्नॉब प्रभाव माना जाता है। उपभोक्ता माँग से संबंधित इस अवस्था में उपभोक्ता द्वारा चुकाया गया मूल्य वस्तु के व्यावहारिक मूल्य से कहीं अधिक हो सकता है।[]
  • बैण्डवैगन प्रभाव : सूक्ष्मअर्थशास्त्र की शब्दावली में उपभोक्ता व्यवहार के अंतर्गत वैण्डवैगन प्रभाव उस मनोवैज्ञानिक अवस्था को दर्शाता है जिसमें उपभोक्ता किसी वस्तु को केवल इसलिए पाना या खरीदना चाहता है क्योंकि दूसरों के बीच वह अत्यधिक लोकप्रिय है। यह प्रभाव उपभोक्ता व्यवहार के साथ साथ राजनीतिक पसंद और नापसंद की मानसिकता को भी व्याख्यायित करता है। लोगों द्वारा अपनी आस्था या व्यवहार को किसी समूह से जोड़ने की प्रवृत्ति को झुण्ड मानसिकता (herd mentality) के तौर पर भी देखा जाता है।[]

सन्दर्भ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

साँचा:आधार

बाहरी कड़ियाँ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

The American Economic Review; Jun 1996; 86, 3; ABI/INFORM Global pg. 349- 373, अभिगमन तिथि : १५ मार्च २०१३

  1. Veblen, T. B. (1899). The Theory of the Leisure Class. An Economic Study of Institutions. London: Macmillan Publishers.
  2. Wood, John C. (1993). Thorstein Veblen: Critical Assessments, 352. London: Routledge. ISBN 0-415-07487-8.
  3. Snob effect Archived 12 फ़रवरी 2013 at Web Archive अभिगमन तिथि : १६ मार्च २०१३
  4. Definition of 'Bandwagon Effect' Archived 17 फ़रवरी 2013 at Web Archive अभिगमन तिथि : १६ मार्च २०१३