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सौर सम्प्रदाय

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सौर आर्थत सूर्य कि उपसना करने वाला सम्प्रदाय सौर कहलाते हैं। यह सम्प्रदाय वैदिक काल से ही अस्त्तित्व में है । सनातन धर्म की वर्ण व्यवस्था में सूर्य की उपासना का उलेख मिलता है । ब्राह्मणों में संध्या कर्म में सूर्य की उपासना का ही वर्णन है । "सौर"सूर्य को ही ब्रह्म (संसार के जनक)के रूप में मानते है । वेदों में सूर्य की स्तुतियां है जिनमे मुख्य "चक्षुषो उपनिषद" है ।