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ललितविस्तर सूत्र

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सिद्धार्थ गौतम के रूप में जन्मने से पूर्व तुषितलोक में बोधिसत्व (बोरोबुदुर , इण्डोनेशिया)

ललितविस्तर सूत्र, महायान बौद्ध सम्प्रदाय का ग्रन्थ है। इसमें भगवान बुद्ध की लीलाओं का वर्णन है। इसकी रचना किसी एक व्यक्ति ने नहीं की बल्कि इसकी रचना में कई व्यक्तियों का योगदान है। इसका रचना काल ईसा के पश्चात तीसरी शताब्दी माना गया है। इसमें २७ अध्याय हैं।

ललितविस्तर और प्राचीन भारतीय गणित[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

ललितविस्तर के एक आख्यान में बताया गया है कि कैसे एक बार गौतम बुद्ध को 1 से लेकर 421 शून्य वाली संख्या तक को गिनाने के लिए कहा गया था। इसमें सबसे बड़ी संख्या '१० पर १४५ घात' का उल्लेख मिलता है। सबसे बड़ी बात है कि बड़ी संख्याओं के नाम भी दिये गये हैं। (ध्वजनिशामणि = १० ‍‍‍‍का घात १४५ = १०१४५)

ललितविस्तर और प्राचीन भारतीय लिपियाँ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

ललितविस्तर के दसवें अध्याय का नाम 'लिपिशाला समदर्शन परिवार्ता' है। इसमें उन ६४ लिपियों का उल्लेख है जिन्हें सिद्धार्थ ने अपने गुरुओं से गुरुकुल में सीखा था। ये ६४ लिपियाँ निम्नलिखित हैं-

  • ब्राह्मी
  • खरोष्टी
  • पुष्करसारि
  • अङ्ग-लिपि
  • वङ्ग-लिपि
  • मगध-लिपि
  • मङ्गल्य-लिपि
  • अङ्गुलीय-लिपि
  • शकारि-लिपि
  • ब्रह्मवलि-लिपि
  • पारुष्य-लिपि
  • द्राविड-लिपि
  • किरात-लिपि
  • दाक्षिण्य-लिपि
  • उग्र-लिपि
  • संख्या-लिपि
  • अनुलोम-लिपि
  • अवमूर्ध-लिपि
  • दरद-लिपि
  • खाष्य-लिपि
  • चीन-लिपि
  • लून-लिपि
  • हूण-लिपि
  • मध्याक्षरविस्तर-लिपि
  • पुष्प-लिपि
  • देव-लिपि
  • नाग-लिपि
  • यक्ष-लिपि
  • गन्धर्व-लिपि
  • किन्नर-लिपि
  • महोरग-लिपि
  • असुर-लिपि
  • गरुड-लिपि
  • मृगचक्र-लिपि
  • वायसरुत-लिपि
  • भौमदेव-लिपि
  • अन्तरीक्षदेव-लिपि
  • उत्तरकुरुद्वीप-लिपि
  • अपरगोडानी-लिपि
  • पूर्वविदेह-लिपि
  • उत्क्षेप-लिपि
  • निक्षेप-लिपि
  • विक्षेप-लिपि
  • प्रक्षेप-लिपि
  • सागर-लिपि
  • वज्र-लिपि
  • लेखप्रतिलेख-लिपि
  • अनुद्रुत-लिपि
  • शास्त्रावर्तां
  • गणनावर्त-लिपि
  • उत्क्षेपावर्त-लिपि
  • निक्षेपावर्त-लिपि
  • पादलिखित-लिपि
  • द्विरुत्तरपदसंधि-लिपि
  • यावद्दशोत्तरपदसंधि-लिपि
  • मध्याहारिणी-लिपि
  • सर्वरुतसंग्रहणी-लिपि
  • विद्यानुलोमाविमिश्रित-लिपि
  • ऋषितपस्तप्तांरोचमानां
  • धरणीप्रेक्षिणी-लिपि
  • गगनप्रेक्षिणी-लिपि
  • सर्वौषधिनिष्यन्दा
  • सर्वसारसंग्रहणीं
  • सर्वभूतरुतग्रहणी

इन्हें भी देखें[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

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