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गोपीनाथ बोरदोलोई

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गोपीनाथ बोरडोलोई
गोपीनाथ बोरदोलोई
जन्मतिथि: 1890
जन्मस्थान:राहा, नगाँव, असम
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लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए प्रवेशद्वार और सबसे बड़ा हवाई अड्डा है।

गोपीनाथ बोरदोलोई (असमिया : গোপীনাথ বৰদলৈ / गोपीनाथ बरदलै ; 1890-1950) भारत के स्वतंत्रता सेनानी और असम के प्रथम मुख्यमंत्री थे।

भारत की स्वतंत्रता के बाद उन्होने सरदार वल्लभ भाई पटेल के साथ नजदीक से कार्य किया। उनके योगदानों के कारण असम चीन और पूर्वी पाकिस्तान से बच के भारत का हिस्सा बन पाया। वे 19 सितंबर, 1938 से 17 नवंबर, 1939 तक असम के मुख्यमंत्री रहे। उन्हें सन् 1999 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

जीवन[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

शिक्षा[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

गोपीनाथ बोरदोलोई का जन्म ६ जून १८९० को रहा नामक स्थान में हुआ था। इनके पिता का नाम बुद्धेश्वर बोरदोलोई और माता का नाम प्रनेश्वरी बोरोदोलोई था। जब गोपीनाथ जी मात्र १२ वर्ष के थे इनकी माता का देहांत हो गया। १९०७ में मेट्रिक पास करने के बाद इनको कॉटन कॉलेज (इंग्लैंड के कॉटन में रोमन कैथोलिक बोर्डिंग स्कूल) में दाखिला मिल गया। उन्होने १९०९ में प्रथम श्रेणी में आई. ऐ. पास किया और जाने-माने स्कोत्तिश चर्च कॉलेज, कोलकाता में प्रवेश लिया और १९११ में स्नातक की डिग्री ली। १९१४ में कोलकाता विश्वविद्यालय से ए॰ ऐ. किया। इन्होने ३ साल कानून (ला) की पढ़ाई की और बिना परीक्षा में बेठे ही वापस गुवाहाटी आ गए और फिर तरुण राम फुकन के कहने पर सोनाराम हाई स्कूल में प्रिसिपल की अस्थाई नौकरी कर ली। उसी दौरान इन्होने क़ानून की परीक्षा दी और पास भी हुए, १९१७ में गुवाहाटी में प्रक्टिस शुरू कर दी।

विभिन्न सामाजिक कार्य
  • 1930 से 1933 तक, उन्होंने खुद को सभी राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखा और विभिन्न सामाजिक कार्यों में शामिल हो गए।
  • 1932 में गुवाहाटी के नगरपालिका बोर्ड के अध्यक्ष बने।
  • 1936 में क्षेत्रीय विधानसभा चुनाव में भाग लेकर उन्होंने 38 सीटें जीतीं और विधानसभा में बहुमत सिद्ध किया।
  • उन्होंने असम के लिए एक अलग विश्वविद्यालय और उच्च न्यायालय की मांग की। उनके प्रयत्नो से यह दोनों बातें सम्भव हुईं।
  • 1939 में प्रदेश विधानसभाओं के लिए चुनाव में भाग लिया और कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में जीतकर असम के मुख्यमन्त्री बने। उसके बाद वे पूर्ण रूप से जनता के लिए समर्पित हो गए।

इन्हें भी देखें[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]