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- ...रीय संगीत|हिंदुस्तानी संगीत]] पद्धति के विद्बान और [[कर्नाटक संगीत|कर्णाटक संगीत]] पद्धति के विद्वान दोनों ही शामिल हैं। संगीतज्ञ कहलाते हैं। ये [[गायक]], [ [[श्रेणी:संगीत]] ...८६७ बाइट (० शब्द) - १५:१४, ३ मार्च २०२०
- ...'''तंजावूर बृंदा''' ([[१९१२|1912-]][[१९९६|1996]]) [[कर्नाटक संगीत|कर्णाटक संगीत]] के वीणा धन्नम्माल शैली की सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधि मानी जाती हैं। आप न केवल ...द, मोहनीय और [[गमक]]युक्त संगीत तथा नैना पिल्लै के स्फूर्तिमान और लयपूर्वक संगीत को सराहनीय ढंग से अपने गायन में सम्मिश्रित किया। ...४ KB (४४ शब्द) - ०५:०१, १५ जून २०२०
- [[कर्नाटक संगीत|कर्णाटक संगीत]] में [[त्यागराज]], [[मुत्तुस्वामी दीक्षित|मुत्थुस्वामी दीक्षितार]] और [[श् ...९४३ बाइट (१८ शब्द) - १८:२३, ३ मार्च २०२०
- ...|2004]]) [[कर्नाटक संगीत|कर्णाटक संगीत]] की मशहूर संगीतकार थीं। आप शास्तीय संगीत की दुनिया में '''एम. एस.''' अक्षरों से जानी जाती थी। ...की। आपने सत्रह साल की आयु में [[चेन्नई]] ही विख्यात 'म्यूज़िक अकाडमी' में संगीत कार्यक्रम पेश किया। इसके बाद आपने मलयालम से लेकर पंजाबी तक भारत की अनेक भाष ...१० KB (१०३ शब्द) - १५:५०, ६ अप्रैल २०२१
- | Genre = शास्त्रीय संगीत, पाश्वगायिकी '''के. जे. येसुदास एक प्रसिद्ध [[कर्नाटक संगीत]] गायक है ...४ KB (६७ शब्द) - ०७:२२, ४ जून २०२०
- '''किराना घराना''' [[शास्त्रीय संगीत|भारतीय शास्त्रीय संगीत]] और गायन की [[हिंदुस्तानी ख़याल गायकी]] की परंपरा को वहन करने वाले हिंदुस् ...का वास्तविक संस्थापक माना जाता है। उस्ताद करीम खाँ [[कर्नाटक संगीत|कर्णाटक संगीत]] शैली में भी पारंगत थे। इनका [[मैसूर दरबार]] से गहरा संबंध था। ...४ KB (९१ शब्द) - ११:०३, १६ जून २०२०
- ...ी, 1847) भक्तिमार्गी [[कवि]] एवं [[कर्नाटक संगीत|कर्णाटक संगीत]] के महान [[संगीत]]ज्ञ थे। उन्होने [[समाज]] एवं [[साहित्य]] के साथ-साथ कला को भी समृद्ध किया। ...का मार्ग था और उनके संगीत में भक्ति भाव विशेष रूप से उभर कर सामने आया है। संगीत के प्रति उनका लगाव बचपन से ही था। कम उम्र में ही वह वेंकटरमनैया के शिष्य बन ...११ KB (१६० शब्द) - १४:५७, १७ मार्च २०२१
- ...कार के गीत को [[हिंदुस्तानी संगीत]] में प्राय: तर्राना कहते हैं और कर्णाटक संगीत में तिल्लाना। ...न रागों में बंधे होते हैं तो उसे रागमलिका या रागमाला कहते हैं। हिंदुस्तानी संगीत में इसे प्राय: रागसागर कहते हैं। इसमें प्राय: भिन्न भिन्न रागों के नाम भी आ ...१५ KB (१६ शब्द) - ०९:५२, ६ मई २०२१
- ...ी शास्त्रीय संगीत]] के क्षेत्र में एक विशिष्ट प्रतिभा थे, जिन्होंने भारतीय संगीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वे भारतीय समाज मे ...ाहौर]] में [[गान्धर्व महाविद्यालय|गान्धर्व विद्यालय]] की स्थापना कर भारतीय संगीत को एक विशिष्ट स्थान दिया। इसके अलावा उन्होंने अपने समय की तमाम धुनों की स्व ...१४ KB (५६ शब्द) - ०९:१३, १० सितम्बर २०२०
- ...्ह है। जैनधर्म की मान्यता अनुसार हरिण की यह शिक्षा है कि 'तुम भी संसार में संगीत के समान प्रिय लगने वाले चापलूसों / चमचों की दिल -लुभाने वाली बातों में न फ़ *शांतिनाथ जिनालय, नित्तुर, [[कर्नाटक|कर्णाटक]] ...११ KB (५६९ शब्द) - २१:१५, ११ मार्च २०२१
- ...], [[पण्डित जसराज|पंडित जसराज]], [[प्रभा अत्रे]], [[सुल्तान खान]] आदि जैसे संगीत प्रेमियों ने आज के युग में भी कायम रखा हुआ है। [[भारतीय संगीत]] में यह माना गया है कि संगीत के आदि प्रेरक [[शिव]] और [[सरस्वती]] है।<ref>{{Cite web|url=https://320kbps ...७६ KB (६१० शब्द) - १२:३६, १५ अगस्त २०२१
- ...की अपेक्षा हो और जिसकी सृष्टि मुख्यतः [[मनोविनोद]] के लिए हो। जैसे गीत, [[संगीत]], [[नृत्य]], [[नाटक|नाट्य]], तथा विभिन्न प्रकार की [[चित्रकला]]एँ। यह [[कर्नाटक|कर्णाटक]] में प्रचलित एक पुरातन नृत्य प्रणाली है। ...३२ KB (२७ शब्द) - ०७:५०, १६ जून २०२१
- ...इनका अधिक ध्यान रहता था। पर्दों को दृश्यों के अनुसार उठाया-गिराया जाता था। संगीत-वाद्य का आयोजन स्टेज के अगले भाग में होता था। गंभीर दृश्यों के बीच-बीच में * '''[[यक्षगान]]''' - कर्णाटक ...५० KB (२५६ शब्द) - १२:०७, १३ अगस्त २०२१