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- '''मिद्रश''' [[यहूदी धर्म]] व [[दर्शनशास्त्र|दर्शन]] का संकलन है। इसका रचनाकाल 5वीं से 13वीं सदी के बीच का है। ...िचारधारा पर लिखे [[भाष्य]] व दूसरे पांच भागों में नवीन रब्बियों के दर्शन टीकाएं शामिल हैं। ...७६४ बाइट (३ शब्द) - ०२:०५, ६ मार्च २०२०
- ...वित्र ग्रन्थ [[गुरु ग्रन्थ साहिब]] में अत्यन्त विस्तार से दिया हुआ है। सिख धर्म के अनुयायियों को जीवन-यापन के लिये विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया है ताकि इसी {{सिख धर्म}} ...७१० बाइट (१ शब्द) - २०:२२, ५ मार्च २०२०
- {{जैन धर्म}} ...'समीचीन', 'बीतकलक', 'निर्दोष' आदि शब्द प्राय: एक से अर्थ या भाव रखते हैं। दर्शन या दृष्टि का संबंध होता है श्रद्धा से; ज्ञान का संबंध होता है विद्या, बोध य ...२ KB (३१ शब्द) - १७:४७, १२ मार्च २०२०
- ''धर्म' ''दर्शन'' यह एक प्रकार का दर्शन है । ...आ। धर्म यह जीवन जीने की पद्धति है । इस दर्शन की खोज प्राचीन ऋषियों ने की । कालांतर में इसका [[ महात्मा गौतम बुध्द]] ने इसे पुनर्जीवित किया। ...४ KB (२६ शब्द) - १०:०५, २४ मार्च २०२१
- ==भारतीय दर्शन== ===धर्म=== ...२ KB (२४ शब्द) - १५:०२, ७ मार्च २०२०
- ...्थ्य सेवायें (अस्पताल), अनाथालय, गुरुकुल तथा पर्यावरन रक्षा के क्षेत्र में काम करता है। ...है जिसका मार्च २०१० में [[हरिद्वार]] [[कुम्भ मेला|कुंभ मेले]] के अवसर पर लोकार्पण किया गया। ...२ KB (३१ शब्द) - १४:५०, १५ जून २०२०
- == 'आस्तिक' या वैदिक दर्शनों में नास्तिकता == * [[मीमांसा दर्शन|मीमांसा]] सृजन करने वाले ईशवर के अस्तित्व को नहीं मानता। ...२ KB (६७ शब्द) - १९:३६, २० मई २०२१
- ...ग्रन्थकारों को '''धर्मत्रात''' कहते हैं। 'धर्मत्रात' का शाब्दिक अर्थ है- 'धर्म का रक्षक'। चीनी में धर्मत्रात का लिप्यन्तरण यह है : 達磨多羅 और चीनी भाषा मे [[श्रेणी:बौद्ध धर्म]] ...६३१ बाइट (७ शब्द) - १५:४४, १६ मार्च २०२०
- ...ब्दिक अर्थ है, वास्तविक स्थिति, ययार्थता, वास्तविकता, असलियत। 'जगत् का मूल कारण' भी तत्त्व कहलाता है। [[सांख्य दर्शन|सांख्य]] के अनुसार २५ तत्त्व हैं और [[शैव दर्शन]] के अनुसार ३६। ...४ KB (१६ शब्द) - ०५:०७, ३ मार्च २०२०
- [[जैन दर्शन|जैनसंमत]] आत्ममात्र सापेक्ष [[प्रत्यक्ष|प्रत्यक्ष ज्ञान]] का एक प्रकार '''[ [[श्रेणी:जैन धर्म]] ...२ KB (३ शब्द) - १८:२७, ५ मार्च २०२०
- ...ि ये दोनों प्रयत्न, कार्य, बल तथा वीर्य की सत्ता में विश्वास रखते हैं। इसी कारण इन्हें [[कर्मवाद]] या [[क्रियावाद]] कहते हैं। बुद्ध के समय पूर्णकश्यप नाम [[श्रेणी:दर्शन]] ...१ KB (२ शब्द) - ००:५४, १ मार्च २०२०
- {{about|एक जैन दार्शनिक शब्द|बौद्ध दर्शन के संबंध|आसव}} ...श्रव, बंध, संवर और निर्जरा - कर्म की प्रक्रिया से जुड़े हुएँ हैं। [[भारतीय दर्शन]] की दूसरी परंपराओं में भी आत्मा को मलिन करनेवाले तत्व आश्रव ([[पालि भाषा|प ...५ KB (८२ शब्द) - १७:३०, २५ अगस्त २०२०
- {{जैन धर्म}} ...दर्शन, [[सम्यक् ज्ञान]], सम्यक् चरित्र से इसे प्राप्त किया जा सकता है। जैन धर्म को मोक्षमार्ग भी कहा जाता है। ...४ KB (२९ शब्द) - ०१:३४, ८ मार्च २०२०
- {{about|एक बौद्ध दार्शनिक शब्द|जैन दर्शन के संबंध|आश्रव}} ...लि भाषा|पालि]] शब्द हैं ([[संस्कृत भाषा|संस्कृत]]:आश्रव) जो बौद्ध शास्त्र, दर्शन, और मनोविज्ञान में प्रयोग किया जाता है, जिसका अर्थ हैं "अन्तर्वाह" या "नासू ...३ KB (१०३ शब्द) - ०७:३१, १६ जून २०२०
- '''श्रीवत्स''' [[हिन्दू धर्म]] और [[बौद्ध धर्म]], दोनों के लिए ही मंगलकारी चिह्न है। ...े वक्षस्थल पर '''श्रीवत्स''' के चिन्ह का वर्णन मिलता है। श्रीवत्स के चिन्ह कारण ही ब्रrापुराण में भगवान विष्णु को श्रिया युक्त भी कहा गया है। इनके अनेक न ...४ KB (५४ शब्द) - २३:१८, १५ जून २०२०
- [[चित्र:Saṃsāra.jpg|right|thumb|300px|''''संसार'''' का प्रतीकात्मक चित्रण]] [[जैन दर्शन]] में '''संसार''' का अर्थ [[जन्म]], [[मृत्यु]] और [[पुनर्जन्म]] के अनवरत क् ...५८७ बाइट (११ शब्द) - १७:११, ४ नवम्बर २०१७
- *...कि जैन दर्शन के अनुसार सात [[तत्त्व (जैन धर्म)|तत्त्व]] होते हैं *... कि [[जैन धर्म में भगवान]], [[अरिहन्त]] और सिद्ध हैं ...१ KB (० शब्द) - १२:१९, १७ जनवरी २०१६
- ...d }}</ref> यह शब्द भारतीय तथा तिब्बती बौद्ध दर्शन में महत्वपूर्ण है। 'सहज' दर्शन का आरम्भ ८वीं शताब्दी में [[बंगाल]] में हुआ। यह 'सहजिया [[सिद्ध]] नामक बौद् [[श्रेणी:बौद्ध धर्म]] ...१ KB (५६ शब्द) - ००:१४, २ सितम्बर २०२०
- [[चित्र:Ekonkar.normal.png|thumb|200px|right|''इक ओंकार'',<ref name=rose/> a Sikh symbol (encoded as a single character in [[Unico ...([[गुरुमुखी]]: {{lang|p|ੴ}}, {{lang|pa|ਇੱਕ ਓਅੰਕਾਰ}}) [[सिख धर्म]] के मूल [[दर्शन]] का प्रतीक है, जो कहता है कि 'परम शक्ति एक ही है'। <ref>{{cite web|title=B ...१ KB (८८ शब्द) - ०७:४०, १६ जून २०२०
- ...चन करती है। इसका प्रमुख विषय वो परम तत्व ही होता है जो इस संसार के होने का कारण है और इस संसार का आधार है। इसमें उस परम तत्व के अस्तित्व को खोजने की कोशि (Metaphysics), [[दर्शन]] की वह शाखा है जो किसी ज्ञान की शाखा के वास्तविकता (reality) का अध्ययन करत ...४ KB (२८ शब्द) - १८:३०, २८ मार्च २०२१