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- ...ान]] के मिश्रित तत्व शामिल हैं। मनु-पशु विज्ञान में विशेष रूप से मानवों और पशुओं में पारस्परिक क्रियाओं के प्रभावों का मापन करा जाता है।<ref>Mills, Daniel [[श्रेणी:पशु कल्याण]] ...३ KB (१११ शब्द) - १५:३९, १५ जून २०२०
- ...आत्मविवेक की उपलब्धि करता है। वामकेश्वरतंत्र के अनुसार जन्म से 16 वर्ष तक पशुभाव, 50 वर्ष तक वीरभाव और आगे का समय दिव्य भाव का होता है। अधिकारार्थ दीक्षा ...४ KB (३ शब्द) - ०१:५९, १ मार्च २०२०
- ...के एक गैर सरकारी संघठन, ब्लू क्रॉस की भी सह-संस्थापक हैं जो कि जानवरों के कल्याण और भारत में पशु अधिकारों के संरक्षण के लिए काम करता है। ...८ KB (२३५ शब्द) - १२:३९, २० सितम्बर २०२०
- ...ि मन्त्र''' शुभ और शांति के लिए प्रयुक्त होता है। ''स्वस्ति = सु + अस्ति = कल्याण हो''। ऐसा माना जाता है कि इससे हृदय और मन मिल जाते हैं। मंत्रोच्चार करते हु ...न्न को क्षति न पहुँचाए, अन्न की विपुल उन्नति हो और फसल को कोई कीड़ा न लगे। पशुओं की समृद्धि के लिए भी स्वस्तिक मंत्र का प्रयोग होता है जिससे उनमें कोई रो ...५ KB (३६ शब्द) - ११:३२, १० अगस्त २०२१
- ...ूर्णिमावाले पूजन की विधि निर्दिष्ट है उसके पीछे कृषि, पशु, ग्राम एवं जन के कल्याण की भी भावना काम करती है। ...७ KB (२५ शब्द) - ०६:३४, ४ मार्च २०२०
- ...nimal worship) है। इन दृष्टि से किसी जाति या व्यक्ति के श्रद्धाभाव के कारण पशुविशेष उस जाति या व्यक्ति की संततियों का प्रतीक भी बन जाता। ...नितांत भिन्न है। अत: आधुनिक पशुपूजा की भावनाओं तथा कोटियों के आधार पर आदिम पशुपूजा के मूल कारण के प्रति संभावित दृष्टिकोण ही उपस्थित किए जा सकते हैं जो (1 ...२३ KB (१२ शब्द) - ०२:५३, १६ मार्च २०२०
- ==== आर्थिक कल्याण ==== ...ागत आदि ऐसी बातें हैं जिनकी व्यवहार में गणना करना बहुत कठिन है, अत: आर्थिक कल्याण को अव्यावहारिक मानकर छोड़ दिया गया है। ...३६ KB (१११ शब्द) - २१:१०, १० जुलाई २०२१
- ...कारणों और इलाज की जांच करते हैं। पोषण में, वे अध्ययन करते हैं कि स्वास्थ्य कल्याण कैसे बनाए रखें और पोषण संबंधी कमी के प्रभावों का अध्ययन कैसे करें। कृषि में ...१४ KB (२१ शब्द) - ०८:५०, ६ मई २०२१
- एक बार राजा [[परीक्षित]] आखेट हेतु वन में गये। वन्य पशुओं के पीछे दौड़ने के कारण वे प्यास से व्याकुल हो गये तथा जलाशय की खोज में इध ...अति उत्तम प्रश्न किया है। इससे तुम्हारे कल्याण के साथ ही साथ दूसरों का भी कल्याण अवश्य ही होगा। मनुष्य जन्म लेने के पश्चात् संसार के मायाजाल में फँस जाता है ...२४ KB (१८ शब्द) - १८:४८, १५ जून २०२०
- ...rchive.org/web/20080117213605/http://www.vanvasikalyanparishad.org/ वनवासी कल्याण परिषद] एक निजी संस्थान का जालघर ...s://web.archive.org/web/20071110004506/http://hindunet.org/vanvasi/ वनवासी कल्याण आश्रम] आदिवासियों के लिए हिन्दू संस्थानों द्वारा चलाया जा रहा एक कार्यक्रम ...२५ KB (३२८ शब्द) - १४:०४, २७ अगस्त २०२१
- ...म पर होने वाली पशु-बलि को बंद कराया था। कलकत्ता के काली मंदिर पर होने वाली पशुबलि का विरोध करने पर आप पर प्राणघातक हमला भी हुआ। तब स्वयं महामना पंडित मदन पशुबली और गोहत्या की बंदी के लिए इन्होंने "पशुबलि निरोध समिति" और इसे बाद में "अ.भा. आदर्श हिन्दू संघ" में संगठित किया। ...१७ KB (४६८ शब्द) - १८:३७, ३ दिसम्बर २०२०
- ...रने मे कोई परेशानी नही होती है।[[ज्योतिष]] की जानकारी के लिये सारावली मे [[कल्याण वर्मा]] ने जो कथन अपनी लेखनी से संवत १२४५ मे (आज से ८२० साल पहले) किया था, ...३६ KB (५८ शब्द) - ००:३१, १६ जून २०२०
- 'अभ्युदय' से लौकिक उन्नति का तथा 'निःश्रेयस' से पारलौकिक उन्नति एवं कल्याण का बोध होता है। अर्थात जीवन के ऐहिक और पारलौकिक दोनों पक्षों से धर्म को जोड ...ारा स्वयं की खोज है। धर्म, ज्ञान और आचरण की खिड़की खोलता है। धर्म, आदमी को पशुता से मानवता की ओर प्रेरित करता है। अनुशासन के अनुसार चलना धर्म है। हृदय की ...१९ KB (३०४ शब्द) - ०८:०६, २२ अगस्त २०२१
- ...का श्रद्धा भाव से श्राद्ध या तर्पण करता है उसे पितृ अपनी संतानों के प्रति कल्याण की कामना एवम आशीर्वाद प्रदान करते हैं। *पौराणिक तथ्यों की जिनके अनुसार आत्म ...्पण के हेतु श्राद्धसंस्कारों की महत्ता परिलक्षित होती है। मृत्युपरांत पितृ-कल्याण-हेतु पहले दिन दस दान और अगले दस ग्यारह दिन तक अन्य दान दिए जाने चाहिए। इन्ह ...२७ KB (१२८ शब्द) - ०९:५१, १५ जून २०२०
- ...्पण के हेतु श्राद्धसंस्कारों की महत्ता परिलक्षित होती है। मृत्युपरांत पितृ-कल्याण-हेतु पहले दिन दस दान और अगले दस ग्यारह दिन तक अन्य दान दिए जाने चाहिए। इन्ह ...े हैं और उनसे प्रार्थना करते हैं कि वे उनकी भेंट स्वीकार कर अपने वंशजों और पशुधन पर कृपादृष्टि रखें। कोलों में मृतात्मा को मुर्गे की बलि देते हैं। वे बलिस ...२० KB (९ शब्द) - ००:२४, १८ अगस्त २०२१
- हिंदी की अनेक छोटी बड़ी कथाओं में मानव कल्याण के लिए विभिन्न प्रकार के उपदेश भरे पड़े हैं। ऐसी कथाएँ प्राय: अप्रत्यक्ष रू ...२८ KB (१०२ शब्द) - १३:२५, २७ मई २०२१
- ...्पण के हेतु श्राद्धसंस्कारों की महत्ता परिलक्षित होती है। मृत्युपरांत पितृ-कल्याण-हेतु पहले दिन दस दान और अगले दस ग्यारह दिन तक अन्य दान दिए जाने चाहिए। इन्ह ...े हैं और उनसे प्रार्थना करते हैं कि वे उनकी भेंट स्वीकार कर अपने वंशजों और पशुधन पर कृपादृष्टि रखें। कोलों में मृतात्मा को मुर्गे की बलि देते हैं। वे बलिस ...२० KB (६ शब्द) - १४:१५, ५ फ़रवरी २०१९
- ...े लोग आमोद प्रमोद के लिए अपने आसपास पशुओं को रखा करते थे। पीछे रोमन लोग भी पशुओं को पकड़कर अपने पास रखते थे। प्राचीन रोमनों और यूनानियों के पास ऐसे संग्रह ...का जो प्रभाव उन पशुओं पर पड़ता है वैसा ही प्रभाव मानव शरीर पर भी पड़ता है। पशुओं पर किए गए प्रयोग मनुष्य के लिए बड़े उपयोगी सिद्ध हुए हैं। ...९४ KB (१,७२४ शब्द) - ०२:०३, १६ अगस्त २०२०
- ...ोगरोधन तथा चिकित्सा में बहुत सहायता मिली है। और इन सबके सहयोग से मनुष्य के कल्याण में बहुत प्रगति हुई है, जिसके फलस्वरूप जीवनकाल बढ़ गया है। ...२६ KB (२०९ शब्द) - १६:५३, ३ मार्च २०२१
- ...्पण के हेतु श्राद्धसंस्कारों की महत्ता परिलक्षित होती है। मृत्युपरांत पितृ-कल्याण-हेतु पहले दिन दस दान और अगले दस ग्यारह दिन तक अन्य दान दिए जाने चाहिए। इन्ह ...े हैं और उनसे प्रार्थना करते हैं कि वे उनकी भेंट स्वीकार कर अपने वंशजों और पशुधन पर कृपादृष्टि रखें। कोलों में मृतात्मा को मुर्गे की बलि देते हैं। वे बलिस ...२२ KB (३४ शब्द) - १६:५१, ५ जनवरी २०२१