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  • ...र सातों स्वरों के प्रयोग के साथ किया जाता था। गुरू-शिष्य परंपरा के अनुसार, शिष्य को गुरू से वेदों का ज्ञान मौखिक ही प्राप्त होता था व उन में किसी प्रकार के ...से '''तीव्र''' कहा जाता है। समकालीन भारतीय शास्त्रीय संगीत में ज्यादातर यह बारह स्वर इस्तमाल किये जाते है। पुरातन काल से ही भारतीय स्वर सप्तक संवाद-सिद्ध ह ...
    १४ KB (३६४ शब्द) - ०८:४६, ११ सितम्बर २०२०
  • ...‘रबाब’ को भारतीय संगीत के अनुकूल परिवर्द्धित कर ‘सरोद’ नामकरण किया। मात्र बारह वर्ष की आयु में एकल सरोद-वादन का पहला सार्वजनिक प्रदर्शन किया था। एक छोटे स ...ी संगीतकार मियां तानसेन के समय से जोड़ा जा सकता है। अमजद अपने पिता के ख़ास शिष्य थे, जिन्होंने सेनिया घराना सरोद वादन में परंपरागत तरीके से तकनीकी दक्षता हा ...
    १० KB (७७ शब्द) - १३:५२, ५ फ़रवरी २०२१
  • ...ी विधिवत तालीम हासिल करने के बाद पलुस्कर के अपने गुरु से संबंध खराब हो गए। बारह वर्ष कठोर तप:साधना से संगीत शिक्षाक्रम पूर्ण करके सन्‌ 1896 में समाज की कुत ...कूल नहीं चल पाया और इसके कारण पलुस्कर की संपत्ति भी जब्त हो गई। पलुस्कर के शिष्यों में [[पंडित ओंकारनाथ ठाकुर]], [[पंडित विनायक राव पटवर्धन]], [[पंडित नाराय ...
    १४ KB (५६ शब्द) - ०९:१३, १० सितम्बर २०२०
  • ...्दालक]] ऋषि के पुत्र का नाम [[श्वेतकेतु|श्‍वेतकेतु]] था। उद्दालक ऋषि के एक शिष्य का नाम [[कहोड़]] था। कहोड़ को सम्पूर्ण वेदों का ज्ञान देने के पश्‍चात् उद्द ...्‍न को सुनते ही अष्टावक्र बोले कि राजन्! चौबीस पक्षों वाला, छः ऋतुओं वाला, बारह महीनों वाला तथा तीन सौ साठ दिनों वाला संवत्सर आपकी रक्षा करे। अष्टावक्र का ...
    १५ KB (३४ शब्द) - ०६:४४, १६ जून २०२०
  • ...छोड़ा कि वह बारह वर्ष से कम आयु वाले बालकों को कष्ट ने दे। कई ग्रन्थों में बारह वर्ष के स्थान पर सोलह वर्ष का निर्देश भी प्राप्त है । इसीलिये आज भी शनि की ...स ने [[अथर्ववेद]] संहिता अपने शिष्य [[सुमन्तु]] को दी। पिप्पलाद सुमन्तु के शिष्यों में आते हैं। ...
    १५ KB (१९ शब्द) - १४:०३, १२ अगस्त २०२१
  • ...गुहय विद्या प्रवर्तक होने के कारण विश्वेश्वरी नाम से प्रसिद्ध हैं। देवी के बारह मुख और नाम प्रसिद्ध हैं। - यथा, मनु, चंद्र, कुबेर, लोपामुद्रा, मन्मथ, अगस्त ...ति'' एक उत्कृष्ट ग्रंथ है। ये पृश्रवीधर गांविन्दपाद के शिष्य शंकराचार्य के शिष्य रूप से परिचित हैं। भुवनेश्वरीतंत्र नाम से एक मूल तंत्रग्रंथ भी मिलता हैं। इ ...
    २१ KB (१०९ शब्द) - १०:१६, ६ मई २०२१
  • ...र्म, उपनयन आदि संस्कार उन्हीं ने पूरा किया था। पांडव घूतक्रीड़ा में हार कर बारह वर्ष के वनवास के लिए गये तो धौम्य भी उनके साथ संतुष्ट करने तथा अक्षय पात्र ...पाते थे। धौम्य बड़े परिश्रमी थे और शिष्यों से भी खूब काम लेते थे। पर उनके शिष्य गुरु के प्रति इतना आदर एवं श्रद्धा रखते थे कि वे कभी उनकी आज्ञा का उल्लंघन ...
    १३ KB (२१ शब्द) - २२:२६, ७ मार्च २०२०
  • चुल्लवग्ग के बारह खंधक अर्थात् अध्याय हैं- ...भिक्षाचारी और अरण्यवासी के कर्तव्य; आसनगृह, स्नानगृह और शौचालय के नियम; और शिष्य-उपाध्याय एवं शिष्यआचार्य के कर्तव्य बताए गए हैं। ...
    १५ KB (७९ शब्द) - ०२:०७, १५ जून २०२०
  • ...ंधे बालक का आत्मविश्वाश देखकर दंग रह गये। अंततः [[पादरी बैलेन्टाइन]] के इस शिष्य के द्वारा बताये गये संशोधनों को उन्होंने स्वीकार किया। ...नहीं मानी और पादरी बैलेन्टाइन के संवेदनात्मक आर्थिक एवं मानसिक सहयोग से इस शिष्य ने अपनी अविष्कृत लिपि को दृष्ठि हीन व्यक्तियों के मध्य लगातार प्रचारित किया ...
    २१ KB (३०५ शब्द) - ०८:१८, २७ जून २०२१
  • ...न अर्पण करते थे. अपने पिता के बाद जाफर अल सादिक ने यह कार्य संभाला और अपने शिष्यों को कुछ ऐसी बातें बताईं जो इससे पहले अन्य किसी ने नहीं बताई थीं. उन्‍होंने एक शिष्य को बताया, "जो पत्थर तुम सामने गतिहीन देख रहे हो, उसके अन्दर बहुत तेज़ गतिया ...
    २० KB (४८५ शब्द) - ०३:०८, १५ जून २०२०
  • ...ôṯ}}) बाइबल के [[नया नियम|न्यू टेस्टामेंट]] के अनुसार [[यीशु|ईसा मसीह]] के बारह मूल धर्मदूतों में से एक थे और प्रधान पादरी के कहने पर यीशु को धोखा देने के * गैर-धर्मवैधानिक ''गौस्पेल ऑफ जूडस'' का कहना है कि अन्य ग्यारह शिष्यों ने विश्वासघात के बारे में पता चलने पर उसे पत्थर मार-मार कर मार डाला.<ref> ...
    ८८ KB (२,१९१ शब्द) - ०२:३१, १९ सितम्बर २०२०
  • ...जा बैठा और अपने विचार की व्याख्या करने लगा जिसपर गुरु ने लोगों को बताया कि शिष्य ने 'हमें छोड़ दिया है' (एतज़ि ला अन्ना)। इस वाक्य पर इस विचारशाखा की स्थापन '''[[अल नज्ज़ाम]]''' (मृत्यु 845) अबुल हुज़ैल के शिष्य थे, एमपीदाक्लिज़ तथा अनक्सागोरस की विचारधारा से प्रभावित। इनके मतानुसार खुद ...
    ४२ KB (३२९ शब्द) - ०६:१३, १६ जून २०२०
  • ...देकर [[जैन धर्म]] का प्रचार किया। उनके उपदेशों को उनके जीवनकाल में ही उनके शिष्यों ने 12 अंगों में संकलित किया। उनके नाम हैं- ...ीर ने अपने उपदेश दिए। संभवत: यह आगम उस समय लिपिबद्ध नहीं किया गया एवं गुरु-शिष्य परंपरा से मौखिक रूप में प्रचलित रहा और यही उसके '''श्रुतांग''' कहलाने की सा ...
    ६१ KB (१५३ शब्द) - १०:०८, ६ मई २०२१
  • ...chami-2021-hindi/|title=Basant Panchami 2021 [Hindi]: बसंत पंचमी पर जानिये बारह मास बंसत के बारे में|date=2021-02-14|website=S A NEWS|language=en-US|access ...त्मिक प्रवृत्ति होने के कारण इनके प्रवचन सुनने लोग आने लगे। धीरे-धीरे इनके शिष्यों का एक अलग पंथ ही बन गया, जो [[कूका पंथ]] कहलाया। ...
    ३१ KB (४८७ शब्द) - ०२:२५, २८ फ़रवरी २०२१
  • ...न्हीं दम्पति के यहाँ तुलसीदास का जन्म हुआ। प्रचलित जनश्रुति के अनुसार शिशु बारह महीने तक माँ के गर्भ में रहने के कारण अत्यधिक हृष्ट पुष्ट था और उसके मुख मे ...ुरु-मुख से जो सुन लेता, उसे वह कंठस्थ हो जाता। वहाँ से कुछ काल के बाद गुरु-शिष्य दोनों शूकरक्षेत्र (सोरों) पहुँचे। वहाँ नरहरि बाबा ने बालक को राम-कथा सुनायी ...
    ५२ KB (९७० शब्द) - २१:२८, ७ अगस्त २०२१
  • मृत्यु से पहले उन्होंने अपने शिष्य भाई लहना को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया जो बाद में [[गुरु अंगद देव]] के ना ...ी]], Sidh Gohst, सोहिला, [[दखनी ओंकार]], [[आसा दी वार]], Patti, [[बारहमासा|बारह माह]] ...
    २६ KB (७४२ शब्द) - ११:१७, २७ अगस्त २०२१
  • ...्ष पूर्व [[सामवेद संहिता|सामवेद]] के आचार्य [[वेदव्यास|कृष्ण द्वैपायन]] के शिष्य ने उसे सूत्रबद्ध किया। सूत्रों में पूर्व पक्ष और सिद्धान्त के रूप में [[बाद ...। शास्त्रसंगति, अध्यायसंगति, पादसंगति और अधिकारसंगतियों से सुसंबद्ध है। इन बारह अध्यायों में जो छूट गया है, उसका निरूपण शेष चार अध्यायों में किया गया है जो ...
    १०५ KB (२४६ शब्द) - २०:३५, २० अगस्त २०२०
  • 38.''' धर्मस्कन्ध ''': ये चौरासी हजार माने गये हैं । संक्षेप करने पर क्रमशः बारह, नौ तथा तीन माने गये हैं । ये अन्तिम तीन है - शील, समाधि तथा प्रज्ञा । ...बुद्ध से धर्मोपदेश सुनकर दूसरों को उपदेश देने वाला श्रावक है । यह बुद्ध का शिष्य है । ...
    ३७ KB (१६९ शब्द) - १२:२०, २२ अप्रैल २०१८
  • ...वे सब वेद आदि भूल चुके थे। उनके आग्रह का मान रखते हुए सारस्वतेय ने उन्हें शिष्य रूप में स्वीकार किया और पुनः श्रुतियों का पाठ करवाया. [[अश्वघोष]] ने अपने ' ...
    ३७ KB (३०२ शब्द) - १९:३८, २९ अप्रैल २०२१
  • ...र रहे थे। विषय था अद्वैत और द्वैत में कौन सही. प्रश्न काफी पुराना था। लगभग बारह सौ वर्ष पहले भी इस पर निर्णायक बहस हो चुकी थी। शंकराचार्य और मंडन मिश्र के ...शंकराचार्य की छवि रही होगी. उनकी बात भी ठीक थी। जिस अद्वैतमत का प्रतिपादन बारह सौ वर्ष पहले शंकराचार्य मंडनमिश्र को पराजित करके कर चुके थे, उसकी प्रामाणिक ...
    ८६ KB (३६९ शब्द) - १९:०५, १० जनवरी २०२१
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