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इस विकि पर "भारतीय आध्यात्मिक लेखक" नाम का पृष्ठ बनाएँ! खोज परिणाम भी देखें।
- ...रकार, लेखक, पुरातत्त्वविद, थियोसोफिस्ट, दार्शनिक थे। वे हिप्नोसिस एवं अन्य आध्यात्मिक क्रियाओं से प्रभावित थे तथा उनकी कलाकृतियों में उसकी छाप भी दिखती है। ...तिभा के धनी रोरिक न केवल एक महान चित्रकार ही थे बल्कि पुरातत्ववेत्ता, कवि, लेखक, दार्शनिक और शिक्षाविद् थे। वे हिमालय में एक इंस्टीट्यूट स्थापित करना चाहते ...५ KB (१३१ शब्द) - १३:२५, २५ सितम्बर २०२०
- ...पर उनके लेख प्रकाशित हुए हैं। भारत में वेदों पर उनके भाष्य एवं अनुवादों की आध्यात्मिक और विद्वत् समुदाय में यथोचित मान्यता हुई है। आजकल वे सांटा फे, न्यू मेक्सिक ...्वों को महत्ता प्रदान करने की जो आकुलता इनमें दिखाई देती है, वह किसी बिरले भारतीय में ही विद्यमान हो सकती है।<ref>{{Cite web |url=http://www.swatantraawaz.co ...७ KB (३८३ शब्द) - २१:५१, १ सितम्बर २०२०
- ...्य विचारधारा का अवलोकन किया जायगा और यह भी बतलाने का प्रयत्न किया जायगा कि भारतीय विचारकों के शिक्षा-सम्बन्धी विचारों में मुख्य पाश्चात्य शिक्षा-दर्शन की छाप == प्रकृतिवाद और भारतीय शिक्षा-शास्त्री == ...४२ KB (११९ शब्द) - १४:४९, १५ जून २०२०
- ...अतिरिक्त नैष्ठिक शीलपूर्ण जीवन के महान उपस्तंभक थे। भारतीय शिक्षा दर्शन का आध्यात्मिक धरातल विनय, नियम, आश्रममर्यादा आदि पर सदियों तक अवलंबित रहा। ...पड़ा। यदि [[दांते एलीगियरी|दाँते]] और [[कुसा के निकोलास]] दैवी विचिंतन और आध्यात्मिक संध्वनि के संदेशवाहक थे तो इरेसमस, मोर और मोंटेन ने "मनुष्य" पर ध्यान आकृष् ...५० KB (३२० शब्द) - ०८:२५, ११ जून २०२१
- गुरु अर्जुन देव जी शहीदों के सरताज एवं शान्तिपुंज हैं। आध्यात्मिक जगत में गुरु जी को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। उन्हें ब्रह्मज्ञानी भी कहा जा [[श्रेणी:भारतीय धार्मिक नेता]] ...१४ KB (३६० शब्द) - १४:०८, २५ अगस्त २०२१
- '''सुभाष काक''' (जन्म [[२६ मार्च|26 मार्च]] [[१९४७|1947]]) प्रमुख [[भारत|भारतीय]]-[[संयुक्त राज्य अमेरिका|अमेरिकी]] [[कवि]], [[दार्शनिक]] और [[वैज्ञानिक]] .... 303-340.</ref> पिण्ड और ब्रह्माण्ड के समीकरण के कारण मानव अपने व्यक्तिगत आध्यात्मिक यात्रा में भी इस संख्या को पाता है, यह वेद की धारणा है।<ref>सु. काक, ''[[ऋग ...१९ KB (८४७ शब्द) - १४:२२, २६ अक्टूबर २०२०
- ...रंथों की रचना की। वे विद्वानों के संरक्षक थे। उनके दरबार में ५२ कवियों तथा लेखकों की उपस्थिति रहती थी, इसीलिए उन्हें 'संत सिपाही' भी कहा जाता था। वे भक्ति ४२ वर्षीय एक आध्यात्मिक तथा वीरत्व के धनी महापुरुष की ९० वर्षीय मतान्ध तथा बर्बर औरंगजेब से भेंट हो ...१७ KB (१४१ शब्द) - १३:५६, १९ जनवरी २०२१
- ...सम्प्रदाय प्रमुख है। उपनिषदों के तत्त्वज्ञान और कर्तव्यशास्त्र का प्रभाव [[भारतीय दर्शन]] के अतिरिक्त [[धर्म]] और [[संस्कृति]] पर भी परिलक्षित होता है। उपनिष उपनिषद् भारतीय सभ्यता की अमूल्य धरोहर है। उपनिषद ही समस्त भारतीय दर्शनों के मूल स्रोत हैं, चाहे वो [[वेदान्त]] हो या [[सांख्य]]। उपनिषदों को ...४५ KB (४०७ शब्द) - १४:५१, २६ अगस्त २०२१
- ...[[ब्रह्मविद्यावादी|थियोसोफिस्ट]], [[नारीवाद|महिला अधिकारों की समर्थक]], [[लेखक]], [[वक्ता]] एवं भारत-प्रेमी महिला ...कारों की समर्थक]], लेखक, वक्ता एवं भारत-प्रेमी महिला थीं। सन १९१७ में वे [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] की अध्यक्षा भी बनीं। एनी बेसेंट से प्रेरणा पाकर भारत क ...४४ KB (४२६ शब्द) - २३:५२, १९ मई २०२१
- ...यों से [[धर्मनिरपेक्ष]] (सेक्यूलर) रही है। इस भाषा में धार्मिक, साहित्यिक, आध्यात्मिक, दार्शनिक, वैज्ञानिक और मानविकी (ह्यूमैनिटी) आदि प्राय: समस्त प्रकार के वाङ ...ारतीय संस्कृति का रहस्य इसी भाषा में निहित है। संस्कृत का अध्ययन किये बिना भारतीय संस्कृति का पूर्ण ज्ञान कभी सम्भव नहीं है। ...४५ KB (८६० शब्द) - २२:२४, २७ अगस्त २०२१
- ...| अलीपुर जेल में ही उन्हें [[हिन्दू धर्म]] एवं हिन्दू-राष्ट्र विषयक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति हुई। इस षड़यन्त्र में अरविन्द को शामिल करने के लिये सरकार की ओर से * भारतीय संस्कृति के आधार ISBN 978-81-7058-691-3 ...२२ KB (६९४ शब्द) - १२:४९, १५ अगस्त २०२१
- ...स (पक्षी)|हंस]] के द्वारा सीता के पास संदेश भेजा है। इसी परंपरा में अज्ञात लेखक का "कपिदूत", रुद्रवाचस्पति का "भ्रमरदूत", वासुदेव का "भ्रमरसंदेश", कृष्णचंद ...स्तु [[शृंगार रस|शृंगार]] रसपरक न होकर शांत रसपरक है। इन काव्यों का लक्ष्य आध्यात्मिक अथवा नैतिक संदेश देना है। इस परंपरा की पहली कड़ी अवधूत रामयोगी (13वीं शती) ...१५ KB (११ शब्द) - १४:३६, ३ मार्च २०२०
- ...जिनको सम्यक दृष्टि नहीं है वे ही संसार के महामोह और जाल में फंस जाते हैं। भारतीय ऋषिओं ने जगत के रहस्य को अनेक कोणों से समझने की कोशिश की है। दर्शन ग्रन्थों भारतीय दार्शनिकों के बारे में [[टी एस एलियट]] ने कहा था-<ref>Jeffry M. Perl and An ...७६ KB (५०५ शब्द) - ०३:४८, १८ जुलाई २०२१
- '''रामचन्द्र वीर ''' (जन्म १९०९ - मृत्यु २००९) एक लेखक, कवि तथा वक्ता और धार्मिक नेता थे। उन्होंने 'विजय पताका', 'हमारी गोमाता', ' ...|last1=पोद्दार|first1=हनुमान प्रसाद|title=दिव्य सन्देश|date=2014|publisher=भारतीय साहित्य|url=https://books.google.co.in/books?id=7yDVBQAAQBAJ&lpg=PP17&ots=y ...१७ KB (४६८ शब्द) - १८:३७, ३ दिसम्बर २०२०
- ...०२|1902]] - [[८ अक्तूबर|8 अक्टूबर]], [[१९७९|1979]]) (संक्षेप में ''जेपी'') भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे। उन्हें [[१९७०|1970]] में [[इन्दिरा गांधी|इ ...क गांधी जी के साथ काम कर रहे [[जवाहरलाल नेहरू|जवाहर लाल नेहरु]] से हुआ। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा बने। [[१९३२|1932]] में गांधी, नेहरु और अन्य मह ...२३ KB (१८० शब्द) - १०:३०, २० अगस्त २०२१
- ...[[भाष्य]] भी लिखे हैं। ब्रह्मसूत्र में [[उपनिषद|उपनिषदों]] की दार्शनिक एवं आध्यात्मिक विचारों को साररूप में एकीकृत किया गया है। प्राचीन परम्परा के अनुसार वेदान्तसूत्र के लेखक बादरायण माने जाते हैं। पर इन सूत्रों में ही बादरायण का नामोल्लेख करके उनके ...२३ KB (१,३४२ शब्द) - ०७:५१, २६ अगस्त २०२१
- ...्तित्व एक साधु पुरुष, [[आध्यात्म]] विज्ञानी, योगी, दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक, लेखक, सुधारक, मनीषी व दृष्टा का समन्वित रूप था। == भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सहभागिता== ...४२ KB (६६२ शब्द) - १२:४६, १५ अगस्त २०२१
- ...ायरतापूर्ण मानसिकता में परिवर्तन न किया जायेगा, तबतक नयी तालीम सहित कोई भी भारतीय शिक्षण-प्रणाली इस देश में पनप नहीं सकती। 22–23 अक्टूबर , 1937 को [[वर्धा]] में जो 'अखिल भारतीय शैक्षिक सम्मेलन' आयोजित हुआ, उसकी अध्यक्षता गांधीजी ने की। उसके उद्घाटन भाष ...४१ KB (१६७ शब्द) - २३:१२, २७ अगस्त २०२१
- ...'[[मार्गरेट एलिजाबेथ नोबुल]]' था। वे एक अंग्रेज-आइरिश सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक, शिक्षक एवं [[स्वामी विवेकानन्द]] की शिष्या थीं। ...भावित हुईं कि उन्होंने न केवल [[रामकृष्ण परमहंस]] के इस महान शिष्य को अपना आध्यात्मिक गुरु बना लिया बल्कि भारत को अपनी कर्मभूमि भी बनाया। ...१७ KB (४९२ शब्द) - १९:३५, २ जून २०२१
- ...के प्राचीनतम स्वरूप पर प्रकाश डालने वाला तथा विश्व का प्राचीनतम् [[प्राचीन भारतीय इतिहास की जानकारी के साधन|स्रोत]] है। वैदिक साहित्य को 'श्रुति' कहा जाता है ...द है कि वेदों की रचना कब हुई और उनमें किस काल की सभ्यता का वर्णन मिलता है। भारतीय वेदों को अपौरुषेय (किसी पुरुष द्वारा न बनाया हुआ) मानते हैं अतः नित्य होने ...४३ KB (३३६ शब्द) - १०:२७, २३ जुलाई २०२१