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- शिक्षा के पश्चात कई वर्ष वह [[वामपन्थी राजनीति|वाम पंथ]] विचारधारा के प्रभाव में थे। जब उन्हें [[रूस]] और [[चीन]] में [[साम्यवाद]] [[श्रेणी:भारतीय लेखक]] ...३ KB (३१ शब्द) - ००:५२, ५ अगस्त २०२१
- '''खरतरगच्छ''' [[जैन धर्म|जैन संप्रदाय]] का एक पंथ है। ...। उनके ये ग्रंथ केवल जैन धर्म की दृष्टि से ही महत्व के नहीं हैं, वरन समस्त भारतीय संस्कृति के गौरव माने जाते हैं। ...३ KB (३ शब्द) - १३:२८, १५ मार्च २०२०
- '''खरतरगच्छ''', [[जैन धर्म]] का एक [[पंथ]] है। ...। उनके ये ग्रंथ केवल जैन धर्म की दृष्टि से ही महत्व के नहीं हैं, वरन समस्त भारतीय संस्कृति के गौरव माने जाते हें। ...४ KB (२ शब्द) - १५:०६, २३ अगस्त २०२०
- ...का मानना है कि गुरू ग्रन्थ साहब केवल [[सिख|सिखों]] का ही नहीं वरन सम्पूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप का पवित्र धर्मग्रन्थ है। ...और धर्म के लिए मर मिटने की परम्परा इनकी रही है। बड़े तो बड़े, बच्चे भी देश-पंथ के लिए शहीद हुए हैं। गुरु गोविन्द सिंह जी के दो पुत्रों जोरावर सिंह (9) तथा ...१२ KB (४६ शब्द) - १३:१६, ३१ मई २०२१
- '''[[अघोर नाथ गुप्ता|अघोर]] पंथ''', '''अघोर मत''' या '''अघोरियों का संप्रदाय''', [[हिन्दू धर्म|हिंदू]] धर्म ...ठों की स्थापना की जिनमें से चौथा प्रधान केंद्र है। इस पंथ को साधारणतः 'औघढ़पंथ' भी कहते हैं। ...२९ KB (७१ शब्द) - १५:०८, ४ जून २०२१
- | title = भारतीय-पार्थियन राजा | religion = ज़रथुस्ट्र पंथ (पारसी धर्म) ...५ KB (१४३ शब्द) - १०:२३, १५ जुलाई २०२१
- ''यह लेख धर्म (पंथ) के विषय में है। भारतीय दर्शन धर्म के लिए [[धर्म]] देखें।'' ...केवल "सनातन-धर्म" ही है बाकी सब उसकी शाखाएँ मात्र हैं यानी "सम्प्रदाय" और "पंथ"। ओमा The अक् के अनुसार धर्म कवक मनुष्यों तक ही सीमित नहीं वह तो अखिल-विश्व ...२३ KB (१९० शब्द) - ००:५६, २३ जुलाई २०२१
- ...jflLPqjK.html|archive-date=6 अगस्त 2019|url-status=live}}</ref> यह किसी भी पंथ जाति के सभी निजी कानूनों से ऊपर होता है। ...िमों का कानून [[शरीयत|शरीअत]] पर आधारित है; अन्य धार्मिक समुदायों के कानून भारतीय संसद के संविधान पर आधारित हैं। ...२५ KB (६७४ शब्द) - १८:३९, २५ जनवरी २०२१
- ...सन् 1699 को [[गुरु गोविंदसिंह]] ने [[ख़ालसा|खालसा पंथ]] की स्थापना की। इस पंथ के अनुयायी अकाली ही थे। [[औरंगज़ेब|औरंगजेब]] के अत्याचारों का मुकाबला करने ...यरों और पापियों का छद्मवेश में सेना के निहंगों में प्रवेश पाना था। इससे इस पंथ को बहुत धक्का लगा। ...१५ KB (११ शब्द) - १४:०४, ७ दिसम्बर २०२०
- ...बड़े पुत्र) की सहायता की है। दारा शिकोह [[संस्कृत]] भाषा के विद्वान थे। और भारतीय जीवन दर्शन उन्हें प्रभावित करने लगा था। भ्रष्ट मसंद, धीरमल एवं मिनहास जैसों ने सिख पंथ के प्रसार में बाधाएं उत्पन्न की। शाहजहां की मृत्यु के बाद गैर मुस्लिमों के ...१४ KB (१९७ शब्द) - ०९:४४, १४ फ़रवरी २०२१
- ...ण यजुर्वेद की तैतरीय शाखा तथा वैखानस कल्पसूत्र के अनुयायी ब्राह्मण हैं। इस पंथ की आचार्यपरंपरा विखनस मुनि से आरंभ होती है। 'वैखानस' शब्द 'विखनस' से बना है ...७ KB (२५ शब्द) - ०६:३४, ४ मार्च २०२०
- ...</ref> इसके पंथियों को ''सूफ़ी''([[सूफ़ी संत]]) कहते हैं। इनका लक्ष्य अपने पंथ की प्रगति एवं सूफीवाद की सेवा रहा है। सूफ़ी राजाओं से दान-उपहार स्वीकार नही ...0061017225603/http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/jaysi011.htm सुफी मत और भारतीय वातावरण] ...१३ KB (३७३ शब्द) - १४:२८, ५ जुलाई २०२१
- ...स रूप को ही आगे चलकर [[सिद्ध]]पंथ, [[शैव]]पंथ, [[नाथपंथ]], वैष्णव और शाक्त पंथियों ने अपने-अपने तरीके से विस्तार दिया। ११ दिसम्बर सन २०१४ को भारतीय प्रधानमंत्री [[नरेन्द्र मोदी]] ने [[संयुक्त राष्ट्र संघ]] की महासभा में २१ ...१५ KB (४६ शब्द) - १३:२७, ४ मई २०२१
- ...ं। वे अपने विचार और खानपान, दोनों में ही संयम रखते हैं। नागा साधु एक सैन्य पंथ है और वे एक सैन्य रेजीमेंट की तरह बंटे हैं। त्रिशूल, तलवार, शंख और चिलम से ...कराचार्य]] ने रखी थी। शंकर का जन्म 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व के में हुआ था जब भारतीय जनमानस की दशा और दिशा बहुत बेहतर नहीं थी। भारत की धन संपदा से खिंचे तमाम आक ...२६ KB (७८ शब्द) - १०:३३, १५ अगस्त २०२१
- ...ार हिन्दुओं, बौद्ध और सिखों के लिए महत्वपूर्ण है। वैशाख के पहले दिन पूरे [[भारतीय उपमहाद्वीप]] के अनेक क्षेत्रों में बहुत से नव वर्ष के त्यौहार जैसे जुड़ शीत ...ikh-religion/2018-baisakhi-118041200048_1.html|title=बैसाखी क्यों है खालसा पंथ की स्थापना का त्योहार, जानिए...|last=|first=|date=|website=Hindi Webdunia|a ...३७ KB (८९० शब्द) - १६:२४, २८ जुलाई २०२१
- [[बौद्ध ग्रंथ|भारतीय बौद्ध धर्मग्रन्थों]] का [[चीनी भाषा]] में अनुवाद ने [[पूर्वी एशिया]] व [[दक ...र्शनशास्त्र|दर्शन]] के विकास के पूर्व काल में [[चीन]] का नाम हरिवर्ष था। [[भारतीय धर्मग्रंथ]]ों के अनुसार उसे हरिवर्ष कहा जाता था। जम्बूदीप के राजा अग्नीघ्र ...१५ KB (८५ शब्द) - १२:४३, १२ मार्च २०२०
- ...घर विरोधी क्रियाकलापों एवं मुगल सलतनत के पक्ष में खड़े होने की वजह से सिख पंथ से निष्कासित कर दिया गया था। ...ि असंवेदनशील थी। जात पात एवं ऊंच नीच को दरकिनार करते हुए गुरू साहिब ने सभी भारतीय जनों की सेवा का अभियान चलाया। खासकर दिल्ली में रहने वाले मुस्लिम उनकी इस मा ...१३ KB (१६४ शब्द) - ११:४०, २६ अगस्त २०२१
- ...वासी प्रतीत होते हैं। वे [[नाथ सम्प्रदाय|नाथपंथीय]] थे। उनके साहित्य से इस पंथ के संकेत प्राप्त होते हैं। ...हैं। ज्ञानदेव का श्रेष्ठत्व उनके अलौकिक ग्रंथनिर्माण के समान ही उनकी भक्तिपंथ की प्रेरणा में भी विद्यमान है। इस कार्य में उन्हें अपने समकालीन [[नामदेव|सं ...४४ KB (३०१ शब्द) - १०:१५, ६ मई २०२१
- ...ी रूप में, लिखित एवं भावनात्मक, प्रचारित किया। विभिन्न मतावलम्बियों, मतों, पंथों, सम्प्रदायों के योगी एवं संतों से उन्होंने आध्यात्म के विषय में गहन वार्त ...का शैशवकाल था, इसलिए सिख धर्म को बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सिख पंथ ने अपनी एक धार्मिक पहचान स्थापित की। ...१४ KB (२२४ शब्द) - ०१:३०, ६ जुलाई २०२१
- ...र में इस बात की स्पष्ट रूप से व्यवस्था की गई थी कि मेयरों के न्यायालयों को भारतीयों के आपसी अभियोगों की सुनवाई तब तक नहीं करनी है जब तक दोनों पक्ष अपनी सहमति ...] ले सकते हैं। इस संबंध में केवल एक यही चारा रह गया था कि अनुभवी तथा योग्य भारतीय विधिशास्त्रियों की सहायता से हिंदू तथा मुस्लिम विधि के पूर्ण निबंध तैयार कर ...२८ KB (५५ शब्द) - २२:१६, १५ जून २०२०