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  • [[समुच्चय अलंकार|अलंकार चन्द्रोदय]] के अनुसार हिन्दी कविता में प्रयुक्त एक अलंकार {{रस छन्द अलंकार}} ...
    ४०९ बाइट (० शब्द) - ०१:२२, ८ मार्च २०२०
  • वर्णों की संख्या, क्रम, मात्रा और गति-यति के नियमों से नियोजित पद्य रचना '''छन्द''' कहलाती है। छंद का सबसे पहले उल्लेख [[ऋग्वेद]] में हुआ है। छंद को पद्य रच [[अलंकार]] ...
    १ KB (३४ शब्द) - ०२:२९, १५ जून २०२०
  • '''[[काव्य]]''' : रसात्मक वाक्य ही 'काव्य' कहलाता है। (''वाक्यं रसात्मकं काव्यम्'') '''[[रस (काव्य शास्त्र)|रस]]''' : ...
    ५ KB (१५६ शब्द) - ११:४८, २० मार्च २०२१
  • ...र से युक्त होने पर सुंदर दिखती है उसी प्रकार काव्य होता है। महाकवि केशव ने अलंकारों को काव्य का अपेक्षित गुण माना है। उनके अनुसार "भूषण बिनु न विराजहि कविता, == अलंकार के प्रमुख भेद == ...
    ६ KB (२४ शब्द) - २३:०८, २४ अगस्त २०२१
  • ...Mani Madhava Chakyar-Sringara-new.jpg|thumb|मणि माधव चाक्यार द्वारा शृंगार रस का प्रदर्शन]] ...ार रस''' [[रस (काव्य शास्त्र)|रसों]] में से एक प्रमुख [[रस (काव्य शास्त्र)|रस]] है। यह [[रति भाव]] को दर्शाता है। ...
    ८ KB (२१ शब्द) - १४:३०, २५ जनवरी २०२१
  • ...ी पुरानी परंपरा के स्पष्ट संकेत [[संस्कृत]], [[प्राकृत]], [[अपभ्रंश]], [[फारसी]] और हिंदी के आदिकाव्य तथा कृष्णकाव्य की शृंगारी प्रवृत्तियों में मिलते है ...] है जिसमें भक्ति की तन्मयता के स्थान पर एक सजग कलाकार की प्रखर कलाचेतना प्रस्फुटित हुई। केशव के कई दशक बाद [[चिंतामणि]] से लेकर अठारहवीं सदी तक हिंदी मे ...
    १९ KB (९३ शब्द) - १६:५८, ८ अगस्त २०२१
  • | caption=राफेल द्वारा पारनासस (1511): प्रसिद्ध कवियों ने माउंट पारनासस के ऊपर नौ muses के साथ पढ़ा। ...झा जा सकता है। कविता का शाब्दिक अर्थ है काव्यात्मक रचना या कवि की कृति, जो छन्दों की शृंखलाओं में विधिवत बांधी जाती है। ...
    ३० KB (२८४ शब्द) - २३:४४, ४ जुलाई २०२१
  • ...विद्या" नामकरण काव्य की भारतीय कल्पना के ऊपर आश्रित है, परन्तु ये नामकरण प्रसिद्ध नहीं हो सके। ...ास्त्र|नाट्यशास्त्र]] केवल रूपक या दृश्यकाव्य की ही समीक्षा के सिद्धान्त प्रस्तुत करता है। भारत और पश्चिम में यह चिन्तन ई.पू. तीसरी चौथी शती से ही प्रौढ़ ...
    ६२ KB (२८६ शब्द) - १०:२४, ६ मई २०२१
  • ...ni Madhava Chakyar-Sringara-new.jpg|गुरु [[माणि माधव चाक्यार]] के प्रख्यात रसाभिनय |thumb|right|250px]] ...ि ने रंगमंच, [[अभिनेता]], [[अभिनय]], नृत्यगीतवाद्य, दर्शक, [[दशरूपक]] और [[रस]] निष्पत्ति से सम्बन्धित सभी तथ्यों का विवेचन किया है। भरत के नाट्य शास्त्र ...
    २५ KB (३२२ शब्द) - १७:१७, ६ जुलाई २०२१
  • ...से माना जाता है। [[हिन्दी नवजागरण|भारतीय नवजागरण]] के अग्रदूत के रूप में प्रसिद्ध भारतेन्दु जी ने देश की गरीबी, पराधीनता, शासकों के अमानवीय शोषण का चित्र ...रहे। बनारस में उन दिनों अंग्रेजी पढ़े-लिखे और प्रसिद्ध लेखक - [[राजा शिवप्रसाद 'सितारेहिन्द']] थे, भारतेन्दु शिष्य भाव से उनके यहाँ जाते। उन्हीं से अंग् ...
    ६२ KB (७०० शब्द) - १८:०६, २ मई २०२१