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- [[चित्र:Satire (Orazio) - pag. 12.JPG|thumb|300px|right|<center>"Le व्यंग्य l'ई डी अतारांकित Orazio Flacco epistole" 1814 में छपी.</center>]] '''कटूपहास''' या '''तन्ज़''' ऐसे व्यंग्य को कहते हैं जिसमे किसी व्यक्ति, समाज, संस्था या राष्ट्र की बुराइयों की निंद ...१ KB (२१ शब्द) - १३:५७, २८ अगस्त २०१८
- ...प्रकाशित हैं। इन्हें व्यंग्य लेखन के लिए "अट्टहास सम्मान", "श्री लाल शुक्ल व्यंग्य सम्मान", "लीलारनी सम्मान" समेत अनेक सम्मान, पुरस्कार प्राप्त हुये हैं।<ref> ...२ KB (१९१ शब्द) - ०३:१३, २७ सितम्बर २०२०
- ...्य की विधा में उनका लेखन अतुलनीय माना जाता है। उनकी लघुकथाओं में भी कई बार व्यंग्य की धारा देखने को मिल जाती है। इन्हीं शंकर पुणतांबेकर की लिखी एक लघुकथा है ‘ ...२ KB (४७ शब्द) - १८:०३, १३ नवम्बर २०२०
- | occupation= हास्य व्यंग्य लेखक, जीवनी लेखक ...और 23 मई 2018), भारत से [[गुजरात]] के एक [[गुजराती भाषा|गुजराती]] के हास्य व्यंग्य लेखक और जीवनी लेखक थे। उनका जन्म 1938 में गांधीनगर के नादोल गांव में हुआ था ...२ KB (६८ शब्द) - १०:३८, २७ जून २०२०
- ...रंगी''' भारत के प्रारंभिक पत्रकारों में से थे। वे हिंदी के विद्वान, कवि और व्यंग्य लेखक भी थे। उनका कार्यस्थल खंडवा, भोपाल, कलकत्ता, जबलपुर, दिल्ली और जयपुर ज ...२ KB (२०३ शब्द) - २१:५८, १५ जून २०२०
- ...की शैली की छाप उनकी पीढ़ी के अन्य कवियों पर तो पड़ी ही, आज भी अनेक लेखक और व्यंग्य कवि काका की रचनाओं की शैली अपनाकर लाखों श्रोताओं और पाठकों का मनोरंजन कर रह == व्यंग्य-विधा एवं काका == ...७ KB (१६५ शब्द) - २२:१४, ९ नवम्बर २०२०
- ...m/2010/10/blog-post_04.html |title=साहित्य शिल्पी में चोरों का मानवाधिकार (व्यंग्य) - डॉ॰ सुभाष राय |access-date=23 अक्तूबर 2013 |archive-url=https://web.arch ...शोध के लिए इन्हें डाक्टरेट की उपाधि मिली। ये [[काव्य|कविता]], [[कहानी]], [[व्यंग्य]] और [[आलोचना]] में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने [[अमृत प्रभात]] और [[अमर उज ...४ KB (१४२ शब्द) - १५:५९, २६ जुलाई २०२१
- चुनावी राजनीति पर आधारित एक व्यंग्य टीवी शो में [[काका जोगिंदर सिंह]] को धरती पकड़ उपनाम से संबोधित किया गया था ...नी माटी (वेब पत्रिका), नवंबर 2013, डॉ राम बहादुर मिश्र की समीक्षा, शीर्षक: व्यंग्य की धारदार भाषा है 'धरतीपकड़ निर्दलीय' उपन्यास में |access-date=28 नवंबर 201 ...७ KB (२५४ शब्द) - ०५:४२, ९ अगस्त २०२१
- ...यंग्य चित्रकार होने के नाते इन्हे आम आदमी से जुड़ी समस्याओं और व्यवस्था पर व्यंग्य के माध्यम से चोट करने का पहले से अनुभव था। अपनी इसी प्रतिभा के चलते उल्टा-प ...८ KB (१३१ शब्द) - १४:२९, ९ जून २०२१
- ..., तुकान्त, अतुकान्त आदि) और गद्य की अनेक विधायें : लघुकथा, कहानी, उपन्यास, व्यंग्य, यात्र वृत्तान्त, निबन्ध, संस्मरण, रेखाचित्र, रिपोर्ताज, डायरी, गद्यकाव्य आ * [[व्यंग्य]] ...७ KB (११४ शब्द) - ०७:५४, १४ अगस्त २०२०
- ...िन्दी संस्करण में २००३ से २०१० तक 'कटाक्ष' नामक स्तंभ लिखा है जो अपने तीखे व्यंग्य के कारण खूब चर्चा में रहा। ...सवाल' तथा 'कृति और कृतिकार', एक यात्रा संस्मरण- 'कुछ अटके कुछ भटके' तथा दो व्यंग्य संग्रह- 'कर लेंगे सब हज़म' तथा 'खेद नहीं है' प्रकाशित हुए हैं। ...१२ KB (२७६ शब्द) - ०४:५५, ८ अगस्त २०२०
- [[श्रेणी:व्यंग्य]] ...४ KB (१८ शब्द) - २३:०५, १० सितम्बर २०२०
- ...े साथ आधुनिक कथा को भी स्थान दिया गया हैं, जिसमे संपादको और देश सुधारको पर व्यंग्य किया गया हैं। कई नाटको में मुख्य कथानक ही यथार्थ चित्रण प्रस्तुत करते हैं। ...४ KB (३५९ शब्द) - १२:०३, १५ जून २०२०
- ...े पहले हिन्दी सान्ध्य दैनिक दूरंदेश के प्रकाशन में अहम भूमिका निभाई। उसमें व्यंग्य कालम लिखने, प्रूफ पढ़ने से लेकर केन्द्रीय सचिवालय बस स्टैंड पर फेरी लगाकर ब ===व्यंग्य संग्रह=== ...१२ KB (२० शब्द) - १९:०६, १९ जून २०२१
- ...ैवेल" मानवता पर सबसे बड़ा व्यंग्य है। उसे बालविनोद बनाकर लेखक ने मानवता पर व्यंग्य किया है। जार्ज बर्कले (1685-1753) ने यूरोपीय दर्शनशास्त्र में विचार के सूक् ...्स लीवर (1806-72) ने हास्य और व्यंग्य लिखने में प्रसिद्धि प्राप्त की। आयरी व्यंग्य अपने ही ऊपर आकर समाप्त होता है। लीवर पर अपनी ही जाति का मजाक उड़ाने का दोष ...१८ KB (११९ शब्द) - १०:२८, ६ मई २०२१
- ...है कि राजस्थानी भाषा में व्यंग्य को विद्या के रूप में प्रतिष्ठित करने वाले व्यंग्य-लेखक के रूप में भी आप चर्चित रहे। राजस्थानी साहित्य की इस सॄजन-यात्रा का सम ...१० KB (५७ शब्द) - १८:५२, ६ नवम्बर २०२०
- ...का प्रभाव, भोजनप्रियता आदि विषयों को ग्रहण किया है और इनके माध्यम से हास्य व्यंग्य की सृष्टि करते हुए प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रीति से इनके दुष्परिणामों की ओर संक ...कुछ कुछ प्रहसन के निकट है। इसमें हास्य के सूक्ष्मतर रूपहृ जैसे शुद्ध विनोद व्यंग्य, आदि की अपेक्षा प्रत्यक्ष शारीरिक विकृतियों पर अधिक बल रहता है। पाश्चात्य प ...१० KB (५८ शब्द) - २३:४०, २२ सितम्बर २०२०
- ...ुचि और अनुभव सँजोनेवाला तंत्र उनके बुनियादी विश्लेषण के आधार रहे हैं। रोष, व्यंग्य, कुढ़न, ललकार, विषाद, करुणा, भावुकता और आत्मदया के तमाम शेड्सवाली समकालीन र ...६ KB (२३१ शब्द) - १५:५१, १५ जून २०२०
- ...8|url-status= dead}}</ref> यह भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में आज भी हिन्दी व्यंग्य पत्रिका के रूप में सम्मान के साथ याद की जाती है।<ref>{{cite web|url= http:/ ...५ KB (११३ शब्द) - १५:४८, ३१ अगस्त २०२०
- ...्ञान]], [[पर्यावरण]] आदि विषयों के लेखक, साहित्यकार, तथा हिंदी के जानेमाने व्यंग्य लेखक और कहानीकार हैं।<ref>{{Cite web |url=http://www.springerreference.com/ ...्रचुरता से लिखा है। हिंदी साहित्य में साठ के दशक से कमलानाथ के नाम से उनके व्यंग्य तथा कहानियां भी देश की विभिन्न पत्रिकाओं में छपते रहे हैं।<ref>]http://www. ...४१ KB (१,३४८ शब्द) - १७:०२, २९ जनवरी २०२१