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इस विकि पर "साहित्य की विधाएँ" नाम का पृष्ठ बनाएँ! खोज परिणाम भी देखें।
- ...होती है। वैसे ही है जैसे जीवविज्ञान में जीवों का वर्गीकरण किया जाता है। [[साहित्य]] एवं भाषण में '''विधा''' शब्द का प्रयोग एक वर्गकारक (CATEGORIZER) के रूप म == साहित्य की विधाएँ == ...७ KB (११४ शब्द) - ०७:५४, १४ अगस्त २०२०
- [[श्रेणी:साहित्य]] ...२ KB (१७२ शब्द) - १२:०१, १२ अप्रैल २०२१
- ...अप्रतिम गद्यकार और कवि। कहानी जगत में इनकी अपनी एक अलग पहचान है। ये हिन्दी साहित्य की युवा पीढ़ी की सशक्त कहानीकार हैं। ...२ KB (१८ शब्द) - ०८:५०, ९ अप्रैल २०२०
- ...[[लघुकथा|लघुकथाएँ]], और [[नाटक]] शामिल हैं। कपोलकल्पना को कभी-कभी किसी भी "साहित्यिक कथा" का अर्थ देने के लिए इसकी सबसे कम समझ में उपयोग किया जाता है। कपोलकल्पना साहित्य की वह शाखा है जिसमें कथाओं में दर्शाए गए स्थान, व्यक्ति, घटनाएँ और सन्दर्भ ...५ KB (१२६ शब्द) - ०७:२७, १० अक्टूबर २०२०
- [[श्रेणी:साहित्यिक पत्रिकाएँ]] [[श्रेणी:हिन्दी साहित्य]] ...५ KB (२०५ शब्द) - २३:२६, २९ अगस्त २०२०
- ...िभक्त किया गया है - श्रव्य काव्य और दृश्य काव्य। श्रव्य काव्य के अंतर्गत [[साहित्य]] की वे सभी विधाएँ आती हैं जिनकी रसानुभूति श्रवण द्वारा होती है जब कि दृश्य ...ोती है, प्रहसन कहलाता है। निकृष्ट श्रेणी के पात्रों का परिहासपूर्ण अभिनय संकीर्ण प्रहसन के अंतर्गत आता है। धनंजय तथा शारदातनय ने भी लगभग इसी आधार पर प्रह ...१० KB (५८ शब्द) - २३:४०, २२ सितम्बर २०२०
- ...नुसार [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] में भी निबंध का साहित्य है। प्राचीन संस्कृत साहित्य के उन निबंधों में धर्मशास्त्रीय सिद्धांतों की तार्किक व्याख्या की जाती थी। इस परिभाषा में अतिव्याप्ति दोष है। लेकिन निबंध का रूप साहित्य की अन्य विधाओं की अपेक्षा इतना स्वतंत्र है कि उसकी सटीक परिभाषा करना अत्यंत ...१२ KB (९४ शब्द) - १२:३५, ११ अगस्त २०२१
- ...ंग्वेज]] प्रकाशित हुई। इस ने जो स्तर स्थापित किया वह पहले कभी नहीं हुआ था। साहित्यिक शब्दावली के साथ साथ कला और विज्ञान क्षेत्रों को स्थान दिया गया था। कोश को ...शविद्या का विकसित स्वरूप [[भाषाविज्ञान|भाषा विज्ञान]], [[व्याकरण]]शास्त्र, साहित्य, अर्थविज्ञान, शब्दप्रयोगीय, ऐतिहासिक विकास, सन्दर्भसापेक्ष अर्थविकास और नान ...४७ KB (२४१ शब्द) - १३:०९, १० अगस्त २०२१
- ...णों की कमी ही है। फिर भी ऐतिहासिक सिंहावलोकन से यह भी स्पष्ट हो जाता है कि साहित्य में हास्यरस का प्रवाह वैदिक काल से लेकर आज तक निरंतर चला आ रहा है, यद्यपि व ...लोकों में देखिए। दोनों ही श्लोक पर्याप्त काव्यगुणयुक्त हैं। जितना विश्लेषण कीजिए उतना ही मजा आता जाएगा: ...५९ KB (१८५ शब्द) - १०:३४, ६ मई २०२१
- ...्ररूप में तथा तथा श्लोकबद्ध लिखे जाते थे। प्रस्तुत विषय से सम्बद्ध बहुत सा साहित्य मुगल काल में मतान्ध शासकों तथा सैनिकों ने नष्ट कर दिया है, जो कुछ बचा है वह ...२० KB (२१ शब्द) - १७:३९, ८ मई २०१८
- ...आख्यायिका का सदृशार्थक सिद्ध करने का प्रयत्न किया है। एक अन्य स्थल (हिंदी साहित्य, द्वितीय खंड, सं. [[धीरेंद्र वर्मा]] तथा ब्रजेश्वर वर्मा, पृ. 245) पर भी, क ...ेने का अवश्य ही कोई दूसरा कारण रहा होगा। [[वैदिक साहित्य]] से लेकर [[हिंदी साहित्य]] तक जितने भी आख्यान ग्रंथ मिलते हैं या जिन्हें आख्यानक ग्रंथ माना जाता है, ...४३ KB (१२० शब्द) - ०९:३८, ६ मई २०२१
- ...हैं - इसमें लोककथाएँ, काव्य और भजन, उपदेश और नीतिकथाएँ आदि अनेक प्रकार के साहित्यिक रूप पाए जाते हैं। अध्ययन तथा व्याख्यान करते समय प्रत्येक अंश की अपनी शैली मनुष्य की कृति होने के कारण अन्य लौकिक साहित्य की तरह बाइबिल का अध्ययन किया जाना चाहिए; अत: ...४६ KB (९२ शब्द) - २१:०९, १० मई २०२१