Deprecated: Caller from MediaWiki\Cache\LinkCache::fetchPageRow ignored an error originally raised from MediaWiki\Extension\SmartCommons\Store\MetadataStore::updateMetadata: [1054] Unknown column 'scf_url' in 'SET' in /www/wwwroot/enwiki/w/includes/debug/MWDebug.php on line 385

Deprecated: Caller from MediaWiki\Extension\SmartCommons\Store\MetadataStore::selectOne ignored an error originally raised from MediaWiki\Extension\SmartCommons\Store\MetadataStore::updateMetadata: [1054] Unknown column 'scf_url' in 'SET' in /www/wwwroot/enwiki/w/includes/debug/MWDebug.php on line 385

Deprecated: Caller from MediaWiki\Page\PageProps::getProperties ignored an error originally raised from MediaWiki\Extension\SmartCommons\Store\MetadataStore::updateMetadata: [1054] Unknown column 'scf_url' in 'SET' in /www/wwwroot/enwiki/w/includes/debug/MWDebug.php on line 385
पादप शारीरिकी - भारतपीडिया सामग्री पर जाएँ

पादप शारीरिकी

भारतपीडिया से
अंगूठाकार बनाने में त्रुटि हुई: फ़ाइल गायब है
Chloroplasts in leaf cells of the moss Mnium stellare

पादप शारीरिकी (Plant anatomy या phytotomy) में वनस्पतियों के आन्तरिक संरचना का अध्ययन किया जाता है।

प्रत्येक जीवधारी का शरीर छोटी छोटी कोशिकाओं से मिलकर बना होता है। आवृतबीजियों के शरीर में अलग-अलग अंगों की आंतरिक बनावट विभिन्न होती है। कोशिकाएँ विभिन्न आकार की होती हैं। इन्हें ऊतक कहते हैं। कुछ ऊतक विभाजन करते हैं और इस प्रकार नए ऊतक उत्पन्न होते हैं जिन्हें विमज्यातिकी (meristematic) कहते हैं। यह मुख्यतः एधा (cambium), जड़ और तने के सिरों पर या, अन्य बढ़ती हुई जगहों पर, पाए जाते हैं। इनके अतिरिक्त अन्य ऊतक स्थायी हो जाते हैं और अपना एक निश्चित कार्य करते हैं, जैसे (१) मृदूतक (Parenchyma), जिसमें कोशिका की दीवारें पतली तथा समव्यास होती है; (२) हरित ऊतक (Chlorenchyma) भी इसी प्रकार का होता है, पर इसके अंदर पर्णहरित भी होता है; (३) कोलेनकाइमा में कोशिका के कोने का हिस्सा मोटा हो जाता है; (४) स्क्लेरेनकाइमा में दीवारें हर तरफ से मोटी होती हैं यह वह रेशे जैसे आकार धारण कर लेती हैं। इनके अतिरिक्त संवहनी ऊतक भी होते हैं, जिनका स्थान, संख्या, बनावट इत्यादि द्विदलपत्रीय और एकदलपत्रीय मूल तथा तने के अन्दर काफी भिन्न होती है। संवहनी ऊतकों का कार्य यह है कि जल तथा भोजन नीचे से ऊपर की ओर ज़ाइलम द्वारा चढ़ता है और बना हुआ भोजन पत्तियों से नीचे के अंगों को फ्लोयम द्वारा आता है। इनके अतिरिक्त पौधों में कुछ विशेष ऊतक भी मिलते हैं, जैसे ग्रंथिमय ऊतक इत्यादि।

पौधे का भाग चाहे जड़ हो, तना या पत्री हो, इनमें बाहर की परत बाह्यत्वचा (या जड़ में मूलीय त्वचा, epiblema) होती है। पत्ती में इस पर रन्ध्र का छिद्र और द्वारकोशिका (guard cell) होती है तथा इसके ऊपर उपत्वचा (cuticle) की भी परत होती है। बाह्यत्वचा के नीचे अधस्त्वचा (hypodermis) होती है, जिसकी कोशिका बहुधा मोटी होती है। इनके नीचे वल्कुल (cortex) के ऊतक होते हैं, जो अवसर पतले तथा मृदूतक से होते हैं। इनके अन्दर ढोल के आकार की कोशिकावाली परिधि होती हैं, जिसे अन्तस्त्वचा (Endodermis) कहते हैं। इनके भीतर संवहनी सिलिंडर होता है, जिसका कार्य जल, लवण, भोजन तथा अन्य विलयनों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानांतरण के लिये रास्ता प्रदान करना है।

इन्हें भी देखें[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]