सामग्री पर जाएँ

मनसा देवी

भारतपीडिया से

साँचा:अविश्वसनीय स्रोत साँचा:Hdeity infobox

मनसा देवी को भगवान शिव और माता पार्वती की पुत्री हैं । इनका प्रादुर्भाव मस्तक से हुआ है इस कारण इनका नाम मनसा पड़ा। महाभारत के अनुसार इनका वास्तविक नाम जरत्कारु है और इनके समान नाम वाले पति महर्षि जरत्कारु तथा पुत्र आस्तिक जी हैं। इनके भाई बहन गणेश जी, कार्तिकेय जी , देवी अशोकसुन्दरी , देवी ज्योति और भगवान अय्यपा हैं ,इनके प्रसिद्ध मंदिर एक शक्तिपीठ पर हरिद्वार में स्थापित है।[] समय आने पर भगवान शिव ने अपनी पुत्री का विवाह जरत्कारू के साथ किया और इनके गर्भ से एक तेजस्वी पुत्र हुआ जिसका नाम आस्तिक रखा गया। आस्तिक ने नागों के वंश को नष्ट होने से बचाया। [] राजा नहुष इनके जीजा लगते हैं | इनके बड़े भाई भगवान कार्तिकेय और भगवान अय्यपा हैं तथा इनकी बड़ी बहन देवी अशोकसुन्दरी, और देवी ज्योति हैं | भगवान गणेश इनके छोटे भाई हैं |

मूल[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

मनसा देवी

ग्रीस में भी मनसा नामक देवी का प्रसंग आता है।[][] इन्हें शिव और पार्वती की पुत्री तथा विष की देवी के रूप में भी माना जाता है। 14 वी सदी के बाद इन्हे शिव के परिवार की तरह मंदिरों में आत्मसात किया गया। यह मान्यता भी प्रचलित है कि इन्होने शिव को हलाहल विष के पान के बाद बचाया था, परंतु यह भी कहा जाता है कि मनसा का जन्म समुद्र मंथन के बाद हुआ।[]

विष की देवी के रूप में इनकी पूजा झारखंड बिहार और बंगाल बड़े धूमधाम से हिन्दी और बंग्ला पंचांग के अनुसार भादो महीने मे पूरी माह इनकी स्तुति होती है ।।[]

इनके सात नामों के जाप से नाग का भय नहीं रहता। ये नाम इस प्रकार है जरत्कारु, जगद्गौरी, मनसा, सिद्धयोगिनी, वैष्णवी, नागभगिनी, शैवी, नागेश्वरी, जरत्कारुप्रिया, आस्तिकमाता और विषहरी।[]

रूप[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

मनसा देवी आस्तिक को गोद में लिए हुए, 10वीँ सदी पाल वंश, बिहार

मनसा देवी मुख्यत: नाग से आच्छादित तथा कमल पर विराजित हैं 7 नाग उनके रक्षण में सदैव विद्यमान हैं। कई बार देवी के चित्रों तथा भित्ति चित्रों में उन्हें एक बालक के साथ दिखाया गया है जिसे वे गोद में लिये हैं, वह बालक देवी का पुत्र आस्तिक है।[]

उपाख्यान[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

महाभारत[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

पाण्डुवंश में पाण्डवों में से एक धनुर्धारी अर्जुन और उनकी द्वितीय पत्नी सुभद्रा जो श्री कृष्ण की बहन हैं, उनके पुत्र अभिमन्यु हुआ जो महाभारत के युद्ध में मारा गया। अभिमन्यु का पुत्र परीक्षित हुआ, जिसकी मृत्यु तक्षक सर्प के काटने से हुई।[] परीक्षित पुत्र जन्‍मेजय ने अपने छ: भाइयों के साथ प्रतिशोध में सर्प जाति के विनाश के लिये सर्पेष्ठी यज्ञ किया। शिव ने अपनी पुत्री मनसा का विवाह किया तथा उसके पुत्र आस्तिक नें सर्पों को यज्ञ से बचाया।[१०]

राजा युधिष्ठिर ने भी माता मानसा की पूजा की थी जिसके फल स्वरूप वह महाभारत के युद्ध में विजयी हुए। जहाँ युधिष्ठिर ने पूजन किया वहाँ सालवन गाँव में भव्य मंदिर का निर्माण हुआ।[११]

पुराण[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

अलग अलग पुराणों में मनसा की अलग अलग किंवदंती है। पुराणों में बताया गया है कि इनका जन्म शिव के मस्तिष्क से हुआ तथा मनसा किसी भी विष से अधिक शक्तिशाली थी इसलिये ब्रह्मा ने इनका नाम विषहरी रखा।

विष्णु पुराण[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

विष्णु पुराण के चतुर्थ भाग में एक नागकन्या का वर्णन है जो आगे चलकर मनसा के नाम से प्रचलित हुई।[१२]

ब्रह्मवैवर्त पुराण[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अंतर्गत एक नागकन्या थी जो शिव तथा कृष्ण की भक्त थी। उसने कई युगों तक तप किया तथा शिव से वेद तथा कृष्ण मंत्र का ज्ञान प्राप्त किया जो मंत्र आगे जाकर कल्पतरु मंत्र के नाम से प्रचलित हुआ। उस कन्या ने पुष्कर में तप कर कृष्ण के दर्शन किए तथा उनसे सदैव पूजित होने का वरदान प्राप्त किया।[१३]

मंगलकाव्य[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

मनसा की प्रतिमा सुन्दरवन

मंगलकाव्य बंगाल में 13वीं तथा 18वीं शताब्दी में लिखित काव्य है जो कई देवताओं के संदर्भ में लिखित हैं। विजयगुप्त का मनसा मंगल काव्य और विप्रदास पिल्ले का मनसाविजय (1495) मनसा के जन्म का वृत्तांत बताते हैं।

मनसाविजय के अनुसार वासुकि नाग की माता नें एक कन्या की प्रतिमा का निर्माण किया जो शिव वीर्य से स्पर्श होते ही एक नागकन्या बन गई, जो मनसा कहलाई। जब शिव ने मनसा को देखा तो वे मोहित हो गए, तब मनसा ने बताया कि वह उनकी बेटी है, शिव मनसा को लेकर कैलाश गए। माता पार्वती नें जब मनसा को शिव के साथ देखा तब चण्डी रूप धारण कर मनसा के एक आँख को अपने दिव्य नेत्र तेज से जला दिया। मनसा ने ही शिव को हलाहल विष से मुक्त किया था।

माता पार्वती ने मनसा का विवाह भी खराब किया, मनसा को सर्पवस्त्र पहनने को कहकर कक्ष में एक मेंढक डाल दिया। जगत्कारु भाग गये थे, बाद में जगत्कारु तथा मनसा से आस्तिक का जन्म हुआ।[१४]

मंदिर[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

मनसा देवी मंदिर, हरिद्वार[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

मनसा देवी मंदिर, हरिद्वार।

यह मंदिर अत्यंत ही प्रसिद्ध है तथा हरिद्वार से 3 किमी की दूरी पर स्थित है।[१५] यहाँ पर माता शक्तिपीठ पर स्थापित दुख दूर करतीं हैं। यहाँ 3 मंदिर हैं। यहाँ के एक वृक्ष पर सूत्र बाँधा जाता है परंतु मनसा पूर्ण होने के बाद सूत्र निकालना आवश्यक है।[१६][१७]

यह मंदिर सुबह ८ बजे से शाम ५ बजे तक खुला रहता है। दोपहर में 2 घंटे के लिए १२ से २ तक मंदिर के पट बंद कर दिए जाते है जिसमे माँ मनसा का श्रृंगार और भोग लगता है। मंदिर परिसर में एक पेड़ है जिसपे भक्त मनोकामना पूर्ति के लिए एक पवित्र धागा बांधते है।

मनसा देवी मंदिर, पंचकूला[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

मनसा देवी मंदिर के पास पटियाला मंदिर।

माता मनसा चंडीगढ़ के समीप पंचकूला में विराजमान होकर दुख दूर करतीं हैं। यहाँ नवरात्रि में भव्य मेले का आयोजन प्रतिवर्ष होता है, यह 100 एकड़ में फैला विशाल मंदिर है। यह मंदिर सन् 1811-1815 के मध्य राजा गोलासिह द्वारा बनवाया गया था।[१८]

यातायात सुविधा[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

चंडीगढ़ बस स्टैंड से लगभग 10 किमी तथा पचकुला बस स्टैंड से 4 किमी की दुरी पर स्तिथ , मनसा देवी मंदिर में बसों या ऑटो रिक्शा से पहुंचा जा सकता है ।

नवरात्री के दिनों में यह  यात्रियों के आने जाने का विशेष प्रबंध चंडीगढ़ परिवहन द्वारा किया जाता है यदि आप लोग रेल से यात्रा के बारे में सोच रहे है तो यह उसका भी उचित व्यवस्था है । चंडीगढ़ -कालका रेल लाइन यह आपको हमेशा ही उपलब्ध मिलेगी ।

इन्हें भी देखें[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

सन्दर्भ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

  1. मनसा देवी मंदिर हरिद्वार Archived 6 जून 2014 at Web Archive मनसा देवी नागों की देवी हैं, उनका मुख्य मंदिर हरिद्वार में है जो शक्तिपीठ पर स्थापित है। नवरात्रि को यहाँ बहुत भीड़ लगती है तथा तीर्थ के साथ ही यह पर्यटन स्थल भी है जो मन में शांति का अनुभव कराने वाला है।
  2. मनसा Archived 7 जून 2014 at Web Archive मनसा शिव की पुत्री हैं
  3. List Of Mycenaean deities Archived 19 अगस्त 2014 at Web Archive लीनियर बी में MA-NA-SA
  4. The Knossos Labyrinth Archived 2 जुलाई 2014 at Web Archive A New View of the Palace of Minos at Knossos
  5. (2017-03-28)."माता मनसा देवी मंदिर का इतिहास क्या आप जानते हैं, पौने दो सौ साल पहले हुआ मंदिर का निर्माण".punjabkesari'.[१]Retrieved 2021-07-31.
  6. 108 दैवीय स्थल. CCC प्रकाशन.ISBN 1-888729-11-2.
  7. मनसा के सात नाम Archived 6 जून 2014 at Web Archive इसके पाठ से सर्पभय जाता है।
  8. मुनि आस्तिक Archived 23 सितंबर 2015 at Web Archive इन्होनें ही जन्मेजय के सर्पेष्ठी यज्ञ से सर्पों की रक्षा की थी तथा ये मनसा के पुत्र थे।
  9. परीक्षित Archived 6 जून 2014 at Web Archive ब्रजडिस्कवरी
  10. नागकुल Archived 6 जून 2014 at Web Archive, इस पृष्ठ में नागकुल का वर्णन है तथा द्वितीय कुल में वासुकि का वर्णन है
  11. "सालवन का प्रसिद्ध मंदिर".[२]Retrieved 6 जून 2014.
  12. विष्णुपुराण का वृत्तांत Archived 6 जून 2014 at Web Archive, विष्णुपुराण में भी मनसा का वर्णन है।
  13. "ब्रह्मवैवर्तपुराण का वृत्तांत".[३]Retrieved 6 जून 2014.
  14. "Manasa से".[४]Retrieved 6 जून 2014.
  15. मनसा देवी मंदिर हरिद्वार Archived 7 जून 2014 at Web Archive गूगल प्लस
  16. मनसा देवी मंदिर Archived 6 जून 2014 at Web Archive हरिद्वार उत्तरांचल
  17. मनसा देवी मंदिर Archived 6 जून 2014 at Web Archive भारत डिक्शनरी
  18. पंचकुला, चंडीगढ़ Archived 6 जून 2014 at Web Archive मनसा मंदिर

बाहरी कड़ियाँ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

साँचा:शैव धर्म