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- '''चैतन्य महाप्रभु'''(1486-1533) भक्तिकाल के प्रमुख कवियों में से एक हैं। इन्होंने वै ...र्ण का होने के कारण लोग इन्हें गौरांग, गौर हरि, गौर सुंदर आदि भी कहते थे। चैतन्य महाप्रभु के द्वारा [[गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय]] की आधारशिला रखी गई। उनके द्वा ...३ KB (८ शब्द) - १०:४७, १५ जुलाई २०१४
- * [[चैतन्य महाप्रभु]] ...७२७ बाइट (२ शब्द) - २०:२२, १२ जून २०२१
- *[[चैतन्य महाप्रभु]] ...२ KB (० शब्द) - २२:१६, ९ अगस्त २०२०
- ...[[वृन्दावन]] के छ: प्रभावशाली गोस्वामियों में वे सबसे ज्येष्ठ थे।<ref>श्री चैतन्य चरितामृतम, आदि-लीला, १०.८४, मध्य-लीला १.३५ अध्याय २०-२४ एवं अंत्य-लीला अध्य ...ने तीनों पौत्रों का पालन कर उन्हें उचित शिक्षा दिलाई। इन्हीं तीनों को श्री चैतन्य महाप्रभु ने क्रमश: सनातन, रूप तथा अनुपम नाम दिया। ...९ KB (५१ शब्द) - २३:४७, १५ जून २०२०
- ...द में से नहीं है।जिसे वैष्णव लोग 'महामन्त्र' कहते हैं। १५वीं शताब्दी में [[चैतन्य महाप्रभु]] के भक्ति आन्दोलन के समय यह [[मन्त्र|मंत्र]] प्रसिद्ध हुआ।। यह अ ...२ KB (१८ शब्द) - १९:२९, १० जून २०२१
- [[चैतन्य महाप्रभु|महाप्रभु चैतन्य]] (१४८६-१५३३ ई.) की प्रेरणा से [[वृन्दावन|वृंदावन]] के षट्गोस्वामियों में अ ...स्त्र]] के ग्रंथों में वर्णित भेद प्रभेद के ग्रहण, परिहाण, परिवर्धन के साथ चैतन्य संप्रदाय की सांस्कृतिक चेतना के नए संदर्भ में इन्हीं विभावादि तथा आनुषंगिक ...६ KB (६ शब्द) - ०२:३२, ३ मार्च २०२०
- ...र यात्रा करते संवत् 1602 में [[बृज|ब्रज]] पहुँच गए। श्री [[चैतन्य महाप्रभु|चैतन्य]] के पार्षद [[गदाधर पंडित]] के शिष्य कृष्णदास ब्रह्मचारी राधाकुंड पर मदनमोह ...३ KB (४ शब्द) - १३:०१, ६ मार्च २०२०
- ...ए थे। इनके जन्म का समय ठीक से पता नहीं, पर यह बात प्रसिद्ध है कि ये श्री [[चैतन्य महाप्रभु]] को [[भागवत पुराण|भागवत]] सुनाया करते थे। इनका समर्थन [[भक्तमाल]] ...समय (वि ० सं ० १५४२ से वि ० सं ० १५९० ) के आसपास अनुमानित किया जा सकता है। चैतन्य महाप्रभु और षट्गोस्वामियों के संपर्क के कारण आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इनका ...१० KB (१४४ शब्द) - ११:३४, ६ मई २०२१
- {{/box-footer|[[चैतन्य महाप्रभु|इनके बारे में अधिक...]]}} ...५ KB (१०८ शब्द) - ०६:३१, ४ मार्च २०१९
- ...सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार]], १९५४ ([[श्री चैतन्य महाप्रभु (१९५४ फ़िल्म)|चैतन्य महाप्रभु]]) ...ूषण का यह सिलसिला आगे भी जारी रहा। ठनमें प्रमुख हैं भक्त कबीर (1942), श्री चैतन्य महाप्रभु (1954), मिर्जा गालिब (1954), रानी रूपमती (1957), सोहनी महीवाल (195 ...१७ KB (१५९ शब्द) - १५:१४, २७ जनवरी २०२१
- ...भ रसिक ने स्वयं कुछ नहीं लिखा। अपनी वाणी में तो [[चैतन्य महाप्रभु|महाप्रभु चैतन्य]] अथवा षट्गोस्वामियों की उन्होंने वन्दना भी नहीं की। ...९ KB (६० शब्द) - ११:३८, ६ मई २०२१
- {{चैतन्य महाप्रभु}} {{चैतन्य महाप्रभु}} ...१६ KB (२५ शब्द) - १५:३२, ४ मार्च २०२०
- ...ही कृष्ण हैं और कृष्ण ही राधा हैं। भारत के धार्मिक सम्प्रदाय निम्बार्क और चैतन्य महाप्रभु इनसे भी राधा को सम्मीलित किया गया है। ...१० KB (११६ शब्द) - १५:०७, २७ अगस्त २०२१
- ...। मंदार वैष्णव संप्रदाय का प्रमुख केंद्र माना जाता है। प्रसिद्ध वैष्णव संत चैतन्य महाप्रभु ने भी अनेक जगह मंदार पर्वत की चर्चा की है। समुद्र मंथन का आख्यान म ...१२ KB (३८ शब्द) - २१:५६, १४ मई २०२०
- *श्री चैतन्य महाप्रभु (1954) ...११ KB (५० शब्द) - १५:१८, २० जनवरी २०२१
- ...ंकराचार्य]] थे जो एक महान विचारक और जाने माने दार्शनिक रहे। इस अभियान को [[चैतन्य महाप्रभु|चैतन्य महाप्रभु]], [[नामदेव]], [[संत तुकाराम|तुकाराम]], [[जयदेव]] [[चैतन्य महाप्रभु|चैतन्य महाप्रभु]] सोलहवीं शताब्दी के दौरान [[बंगाल]] में हुए। भग ...४३ KB (१६० शब्द) - १०:०३, १४ जुलाई २०२१
- ;[[शंकराचार्य|शंकर]] की मत्त और महाप्रभु [[चैतन्य महाप्रभु|गौरांग]] की पथ * [[चैतन्य महाप्रभु|गौरांग]] ...३८ KB (१,१८६ शब्द) - ०२:१६, १६ जून २०२०
- ...र्तकों के नाम से जानी जाती हैं जिनमें [[भास्कर]], [[वल्लभाचार्य|वल्लभ]], [[चैतन्य]], [[निम्बार्क]], [[वाचस्पति मिश्र]], [[सुरेश्वर]] और [[विज्ञान भिक्षु]]। आ ...हैं। अत: यदि हम तत्व को अनश्वर मानते हैं तो हमें उसे अद्वय, अज्ञेय, शुद्ध चैतन्य मानना ही होगा। ऐसे तत्व को मानकर जगत् की अनुभूयमान स्थिति का हमें विवर्तवा ...४३ KB (५९ शब्द) - १४:३७, २ जून २०२१
- ...[[निम्बार्काचार्य|निम्बार्क]], [[वल्लभाचार्य|वल्लभ]] तथा [[चैतन्य महाप्रभु|चैतन्य]] जैसे महान आचार्यों के समर्थन से संपुष्ट हुई है। आचार्यत्व की दृष्टि से [[ ...३६ KB (५३ शब्द) - १४:५४, १२ मई २०२१
- ...के पहले, लगभग 1400 ई. में, विद्यमान थे। दूसरे चंडीदास द्विज चंडीदास थे जो चैतन्य के बाद में या उत्तर काल में हुए। इन्होंने ही राधा कृष्ण के प्रेमविषयक उन अध इसी समय प्रसिद्ध वैष्णव कवि [[चैतन्य महाप्रभु|चैतन्य]] का आविर्भाव हुआ (1486-1533)। समसामयिक कवियों और विचारकों पर उनका गहरा प्र ...६९ KB (१५९ शब्द) - १०:०९, ६ मई २०२१