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- '''पाश्चात्य संगीत''' पश्चिमी जगत के [[संगीत]] को कहा जाता है। ...२७७ बाइट (२ शब्द) - २०:५४, ११ अप्रैल २०१९
- ...oogle.co.in/books?id=O4PhLbKulTQC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false पाश्चात्य दर्शन के सम्प्रदाय] (गूगल पुस्तक; लेखिका - शोभा निगम) ...oogle.co.in/books?id=O9iU7Txl0I8C&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false पाश्चात्य दर्शन का समीक्षात्मक इतिहास] (गूगल पुस्तक; लेखक - वाय मसीह) ...४३ KB (३१८ शब्द) - १४:५८, ६ अप्रैल २०२१
- ...ोतिष पद्धति निरयण (Indian Nirayan Astrology) के सिद्धांत को मानती है। जबकि पाश्चात्य ज्योतिष सायन (Sayan Astrology) पर आधारित है। भविष्य को जानने की चाहत सभी मन ....jpg|thumb|भारतीय और पाश्चात्य ज्योतिष के परिचय तथा तत्व]]|250px|भारतीय और पाश्चात्य ज्योतिष के परिचय तथा तत्व|]] ...८ KB (३२ शब्द) - १४:३६, १५ जून २०२०
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- '''पाश्चात्य संगीत''' पश्चिमी जगत के [[संगीत]] को कहा जाता है। ...२७७ बाइट (२ शब्द) - २०:५४, ११ अप्रैल २०१९
- == पाश्चात्य कार्टून शृंखलाएँ == ...२ KB (११ शब्द) - १७:५९, १५ जून २०२०
- ...साहित्य पक्ष तथा स्वरूप पर शास्त्रीय ढंग से विचार किया जाता है। प्राचीन [[काव्यशास्त्र]], जिसमें [[रस (काव्य शास्त्र)|रसों]], [[अलंकार|अलंकारों]] रीतियों आदि पर व ...in/books?id=w5Ut61s0m34C&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=true भारतीय एवं पाश्चात्य काव्य-सिद्धान्त] (गूगल पुस्तक ; गणपतिचन्द्र गुप्त) ...२ KB (७४ शब्द) - १०:२८, ६ मई २०२१
- ...756]] - [[५ दिसम्बर|5 दिसंबर]] [[१७९१|1791]]) एक प्रसिद्ध [[जर्मनी|जर्मन]] पाश्चात्य शास्त्रीय संगीतज्ञ थे। उन्होने लगभग ६०० संगीत रचनाएँ की। शास्त्रीय संगीतकार [[श्रेणी:पाश्चात्य शास्त्रीय संगीतकार]] ...२ KB (१० शब्द) - ०१:१७, २८ अगस्त २०२१
- ...ोतिष पद्धति निरयण (Indian Nirayan Astrology) के सिद्धांत को मानती है। जबकि पाश्चात्य ज्योतिष सायन (Sayan Astrology) पर आधारित है। भविष्य को जानने की चाहत सभी मन ....jpg|thumb|भारतीय और पाश्चात्य ज्योतिष के परिचय तथा तत्व]]|250px|भारतीय और पाश्चात्य ज्योतिष के परिचय तथा तत्व|]] ...८ KB (३२ शब्द) - १४:३६, १५ जून २०२०
- [[श्रेणी:पाश्चात्य दर्शन]] ...१ KB (१७ शब्द) - ००:२०, ६ जनवरी २०२१
- | purpose = ब्रिटिश भारत में पाश्चात्य शिक्षा का प्रसार •सरकार पाश्चात्य शिक्षा, कला, दर्शन, विज्ञान और साहित्य का प्रसार करें। ...७ KB (६८ शब्द) - १०:१६, ११ अगस्त २०२१
- भारतीय [[काव्यशास्त्र]] में प्रहसन के स्वरूप-विवेचन पर पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है। [[भरत मुनि]] न ...हसनकार हैं। इन सभी ने प्राय: धार्मिक पाखण्ड, बाल एवं वृद्ध विवाह, मद्यपान, पाश्चात्य सभ्यता का प्रभाव, भोजनप्रियता आदि विषयों को ग्रहण किया है और इनके माध्यम से ...१० KB (५८ शब्द) - २३:४०, २२ सितम्बर २०२०
- ...किसी भी प्रकार की कोई क्षति उसे ऐसा करने से रोके नहीं। इस कार्य के लिए आज पाश्चात्य देशों में एक नवीन मानसशास्त्र का जन्म हो गया है तथा उसका प्रशिक्षण प्राप्त ...२ KB (३ शब्द) - १२:४७, ४ मार्च २०१८
- ...ई. में [[प्राच्य कलीसिया|प्राच्य चर्च]] में प्रारंभ हुआ। बाद में वह पर्व [[पाश्चात्य चर्च]] में भी फैल गया। प्रारंभ में वह ईश्वरीय शक्ति के आविर्भाव तथा ईसा के ...२ KB (६४ शब्द) - १०:५१, १५ जून २०२०
- ...सार यह संगीति इससे भी पूर्व अलग-अलग तिथियों पर होने की सूचना मिलती है। कुछ पाश्चात्य विद्वानों के अनुसार प्रथम संगीति, उक्त तिथि के बाद हुई थी। ...२ KB (१९ शब्द) - ००:३७, २४ जुलाई २०२१
- |region = [[पाश्चात्य दर्शन]] ...२ KB (५२ शब्द) - ०८:५९, ४ फ़रवरी २०१७
- [[File:JohannesVermeer-TheAstronomer(1668).jpg|thumb|250px|एक पाश्चात्य खगोल विज्ञानी का चित्र में निरूपण, (c. 1668)]] ...३ KB (११५ शब्द) - ०५:१२, १७ सितम्बर २०२०
- ...[[गृहयुद्ध]] ([[अमेरिकी गृहयुद्ध]]) से पार लगाया। अमेरिका में [[दासप्रथा (पाश्चात्य)|दास प्रथा]] के अंत का श्रेय लिंकन को ही जाता है। ...३ KB (३२ शब्द) - २३:२९, ३१ मार्च २०२१
- ...अपने ज्ञान के अनुरूप अपने चरित्र का संचालन करना अनिवार्य नहीं समझता। केवल पाश्चात्य रहस्यवादी और समाधीवादी विचारक ही इसके अपवाद हैं। ...खता है। समसामयिक विचारधारा में प्राच्य दर्शन को धर्म-दर्शन माना जाता है और पाश्चात्य दर्शन को भाषा सुधार तथा प्रत्ययों का स्पष्टिकरण कहा जाता है ...२३ KB (१०८ शब्द) - ००:३०, १२ अगस्त २०२१
- ...तित्व में, विशेषत: ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास का नाम '''आस्तिकता''' है। पाश्चात्य दर्शन में ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास का ही नाम '''थीज्म''' है। ...प में अवतार लेता है। दुष्टों का दमन और सज्जनों का उद्धार करता है। इस मत को पाश्चात्य दर्शन में थीज्म कहते हैं। ...१३ KB (२५ शब्द) - ०५:१९, ३ मार्च २०२०
- ...तथा [[बौद्ध धर्म]] के बारे में बहुत कम पता था। इस ग्रन्थ के प्रकाशन के बाद पाश्चात्य जनमानस में बौद्ध धर्म की जानकारी और लोकप्रियता बहुत बढ़ गयी। ...३ KB (४४ शब्द) - १०:४३, ८ नवम्बर २०२०
- ...या कि भाषा से सत्य का विवरण नहीं बल्कि सत्य का निर्माण किया जाता है। समस्त पाश्चात्य दर्शन भाषा में ही निहित है, किन्तु भाषा हमें सत्य का एक रूप ही प्रदर्शित कर [[श्रेणी:पाश्चात्य दर्शन]] ...८ KB (२०६ शब्द) - १०:२९, ७ अगस्त २०२०
- [[द्वितीय विश्वयुद्ध|द्वितीय महायुद्ध]] में रिपोर्ताज की विधा पाश्चात्य साहित्य में बहुत लोकप्रिय हुई। विशेषकर [[रूसी भाषा|रूसी]] तथा अंग्रेजी साहि ...४ KB (१८ शब्द) - ०१:२३, ६ जुलाई २०२१
- ...ं अनेक आकस्मिक संयोगों का विशेष महत्व है। अत: इत मत को आकस्मिकवाद कहा गया। पाश्चात्य देशों में वैज्ञानिक विवेचन का प्राधान्य होने पर इस विचारधारा की मान्यता नही ...४ KB (३ शब्द) - १७:०५, १ मार्च २०१७