सामग्री पर जाएँ

खोज परिणाम

देखें (पिछले २० | ) (२० | ५० | १०० | २५० | ५००)
  • | nationality = भारतीय ...ाम से जाने जानेवाली चौदवहीं सदी की एक भक्त कवियित्री थी जो [[कश्मीर]] की [[शैव]] [[भक्ति]] परम्परा और [[कश्मीरी भाषा]] की एक अनमोल कड़ी थीं।<ref name="MGC ...
    ७ KB (२८६ शब्द) - ०८:४१, १६ जुलाई २०२१
  • ...इसके तीन प्रकार है: '''वैष्णव आगम''' ([[पंचरात्र]] तथा [[वैखानस]] आगम), '''शैव आगम''' (पाशुपत, शैवसिद्धांत, त्रिक आदि) तथा '''शाक्त आगम'''। ...रणतया 'तंत्रशास्त्र' के नाम से प्रसिद्ध है। निगमागममूलक [[भारत की संस्कृति|भारतीय संस्कृति]] का आधार जिस प्रकार निगम (=वेद) है, उसी प्रकार आगम (=तंत्र) भी है ...
    ८ KB (५८ शब्द) - ०७:०२, १६ जून २०२०
  • ...है, गोरक्षनाथ ने ([[शंकराचार्य]] द्वारा संगठित शैव संन्यासियों से) अवशिष्ट शैवों का 12 पंथों में संगठन किया जिनमें गोरखनाथी प्रमुख हैं। इन्हें ही कनफटा कह [[श्रेणी:भारतीय संस्कृति]] ...
    ५ KB (१४ शब्द) - १७:१५, २९ फ़रवरी २०२०
  • [[तन्त्र|तंत्र]] भारतीय उपमहाद्वीप की एक वैविधतापूर्ण एवं सम्पन्न आध्यात्मिक परिपाटी है। तंत्र के अ '''भारतीय तंत्र साहित्य''' विशाल और वैचित्र्यमय [[साहित्य]] है। यह प्राचीन भी है तथा ...
    १९ KB (२८० शब्द) - १८:०३, २० जून २०२१
  • ...भारतीय रॉक-कट वास्तुकला ज्यादातर प्रकृति में धार्मिक है। पल्लव [[दक्षिण]] भारतीय वास्तुकला के अग्रदूत थे। पल्लव वास्तुकला की सबसे बड़ी उपलब्धियाँ महाबलीपुरम ...यों का स्मारक है। सभी भारतीय मंदिरों में सबसे बड़ा और सबसे ऊँचा, यह दक्षिण भारतीय वास्तुकला के उच्च-पानी के निशान का निर्माण करने वाला एक उत्कृष्ट कृति है। ...
    ९ KB (२८ शब्द) - २०:२८, २४ सितम्बर २०२०
  • ...ैं क्योंकि उसमें ब्रह्मसूत्र शब्द आया है जो वेदान्तसूत्र का पर्यायवाची है। भारतीय विद्वान् इसका रचनाकाल ई.पू.५०० से २०० के बीच मानते हैं। | width=100px | [[शैव]] ...
    २३ KB (१,३४२ शब्द) - ०७:५१, २६ अगस्त २०२१
  • [[File:SaivismFlag.svg|thumb|शैव दर्शन के लिए एक चिह्न]] '''प्रत्यभिज्ञा दर्शन''', [[कश्मीर शैवदर्शन|काश्मीरी शैव दर्शन]] की एक शाखा है। यह ९वीं शताब्दी में जन्मा एक [[अद्वैत वेदान्त|अद्वैत ...
    २८ KB (१३८ शब्द) - १४:३८, ३ जुलाई २०२०
  • |अनुयायी = [[हिन्दू धर्म|हिन्दू]], [[भारतीय]], भारतीय प्रवासी जो मनुष्य वैष्णव होकर शिव की और शैव होकर विष्णु की निंदा करते हैं, वे अवश्य नरकवासी होते हैं। सहस्रों वाजपेय और ...
    ८ KB (१८ शब्द) - २२:१०, २७ अगस्त २०२०
  • ...र, मूर्ति या मूर्ति को मूर्ति या प्रतिमा कहा जाता है। [5] [118] वैष्णववाद, शैव धर्म, शक्तिवाद और स्मृतीवाद जैसे प्रमुख हिंदू परंपराएं मूर्ति (मूर्ति) का उ हिंदू धर्म में एक मूर्ति, जीनियन फोवेलर कहते हैं - भारतीय धर्मों पर विशेष धार्मिक अध्ययनों के एक प्रोफेसर हैं, वह खुद भगवान नहीं हैं, ...
    १९ KB (१८ शब्द) - १२:५५, २७ मई २०२१
  • ...सनातन धर्म मूलतः [[भारतीय धर्म]] है, जो किसी समय पूरे [[बृहत्तर भारत]] ([[भारतीय उपमहाद्वीप]]) तक व्याप्त रहा है। विभिन्न कारणों से हुए भारी धर्मान्तरण के ब ...[[सम्प्रदाय]] होते थे। [[गाणपत्य]] [[गणेश]]की, [[वैष्णव]] [[विष्णु]] की, [[शैव]]देव, कोटी [[शिव]] की, [[शाक्त]] [[शक्ति]] की और [[सौर]] [[सूर्य]] की पूजा ...
    १६ KB (३९५ शब्द) - ०८:२८, ९ जून २०२१
  • ...िक दृष्टि तथा दूसरा पौराणिक पूर्त। इसी को इष्ट पूर्त कहते हैं जिसके द्वारा भारतीय जनता का योगक्षेम वहन होता आया है। प्राचीन वैदिक कर्मकांड : यज्ञवेदी, यजमान, ...ूल, मिथुन, सुर, सुंदरी, वाहन, आयुध आदि भी चित्रित होने लगे जिनकी प्रतिमाएँ भारतीय मूर्तिकला के समुज्वल निदर्शन हैं। ...
    २० KB (२२ शब्द) - ०९:१५, ६ मई २०२१
  • ...-परम्परा तथा [[जापान]] की [[शिन्तो धर्म|शिन्तो]] परम्परा में पायी जाती है। भारतीय परम्परा में किसी भी व्यवस्थित ग्रन्थ, सिद्धान्त, विधि, उपकरण, तकनीक या कार् ...antra#CITEREFFlood2006 |date=22 मार्च 2017 }}, pp. 7–8, 61, 102–103.</ref> शैव परम्परा में तन्त्र ग्रन्थों के वक्ता साधारणतयः [[शिव]]जी होते हैं। बौद्ध धर ...
    ४९ KB (१,११८ शब्द) - १६:३३, २९ जून २०२१
  • ...यारहवीं शताब्दी के प्रारम्भ में क़रीब दस वर्षों तक भारत में रहा। यद्यपि वह भारतीय ज्ञान और विज्ञान का प्रशंसक था, उसने यहाँ के शिक्षित वर्गों और विशेषकर ब्रा ...
    ११ KB (२६५ शब्द) - ००:०३, १ अगस्त २०२१
  • ...सर्वगोचर देशभाषा" में मिलता है। संभवत: शैव सिद्धों ने ही पहले कश्मीरी को [[शैव दर्शन]] का लोकसुलभ माध्यम बनाया और बाद में धीरे-धीरे इसका लोकसाहित्य भी लिख ...छुम्मं संप्रदाय में कश्मीरी छंदों से अधिक कश्मीरी "सूत्र" पाए जाते हैं जो शैव सिद्धों द्वारा कश्मीरी भाषा के लोकग्राह्य उपयोग की ओर निश्चित संकेत करते है ...
    २७ KB (९४५ शब्द) - १०:२८, ६ मई २०२१
  • |अनुयायी = [[हिन्दू धर्म|हिन्दू]], [[भारतीय]], भारतीय प्रवासी ...गान करता है उसे अग्निष्टोम नामक यज्ञ का फल प्राप्त होता है। इस पूर्णिमा को शैव मत में जितनी मान्यता मिली है उतनी ही वैष्णव मत में भी। ...
    १५ KB (१८८ शब्द) - २१:०५, १७ जुलाई २०२१
  • '''वैशेषिक''' [[भारतीय]] दर्शनों में से एक [[दर्शनशास्त्र|दर्शन]] है। इसके मूल प्रवर्तक ऋषि [[कणाद ...इन्होंने इसके परिचायक एकमात्र पदार्थ "विशेष" पर बल दिया है, इसलिए प्राचीन भारतीय दर्शन की इस धारा को "वैशेषिक" दर्शन कहते हैं। अन्य शास्त्रों ने इस बात का व ...
    ५० KB (४२१ शब्द) - ०९:३३, १२ मई २०२१
  • ...ञ्जलि]] ने इसे सुव्यवस्थित रूप दिया। इस रूप को ही आगे चलकर [[सिद्ध]]पंथ, [[शैव]]पंथ, [[नाथपंथ]], वैष्णव और शाक्त पंथियों ने अपने-अपने तरीके से विस्तार दिय ११ दिसम्बर सन २०१४ को भारतीय प्रधानमंत्री [[नरेन्द्र मोदी]] ने [[संयुक्त राष्ट्र संघ]] की महासभा में २१ ...
    १५ KB (४६ शब्द) - १३:२७, ४ मई २०२१
  • वैष्णव लोग [[विष्णु]] को ही ईश्वर मानते है, तो शैव [[शिव]] को। भारतीय दर्शनों में "ईश्वर" के विषय में क्या कहा गया है, वह निम्नवत् है- ...
    २२ KB (१२४ शब्द) - २०:११, २२ जुलाई २०२१
  • ...य मारा गया। मुसलमानी सेना ने विजयनगर को नष्ट कर दिया जिससे दक्षिण भारत में भारतीय संस्कृति की क्षति हो गई। अरवीदु के निर्बल शासकों में भी वेकंटपतिदेव का नाम ...नहीं करता था और सुप्रबन्ध के लिए योग्य राजकुमार से सहयोग लेता था। प्राचीन भारतीय प्रणाली पर शासन की नीति निर्भर थी। सुदूर दक्षिण में सामन्त वर्तमान थे जो वा ...
    ३६ KB (३४४ शब्द) - १३:११, २१ अगस्त २०२१
  • ...ाजों और संस्थाओं की स्मृति अपने साथ लेते आए होंगे और उनके सिवा समाज संबंधी भारतीय विचारधारा तथा वर्गों की ऊँच-नीच भावना भी उनके साथ चली आई होगी। [[कलिंग]], [ सिंहली कला [[भारतीय कला]] से विशेष रूप से प्रभावित थी। वहाँ चित्रकार, मिस्त्री, राज, बढ़ई, लोहा ...
    २१ KB (८४ शब्द) - १०:५८, २३ अगस्त २०२०
देखें (पिछले २० | ) (२० | ५० | १०० | २५० | ५००)