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- ...लियाँ अनेक पालियों में बँटी हुई हैं। योजी ऊतक (connective tissue) से समूचा यकृत घिरा हुआ है। ...ाती के आकार की, 3-4 इंच लंबी और एक इंच, या इससे कुछ चोडी, थैली होती है। यह यकृत की सतह के नीचे होती है और उससे ऐरियोला (areola) ऊतकों द्वारा जुड़ी होती है। ...२२ KB (७४ शब्द) - ०९:०१, ७ मार्च २०२०
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- Name = पित्ताशय का कर्कट रोग | ...पीलिया]] और उल्टी आने, जैसे [[लक्षण|लक्षणों]] से पता चलता है और तब तक यह [[यकृत]] जैसे अन्य [[अंग|अंगों]] तक फैल चुका होता है। ...१० KB (७२ शब्द) - ०९:५१, १५ जून २०२०
- ...लियाँ अनेक पालियों में बँटी हुई हैं। योजी ऊतक (connective tissue) से समूचा यकृत घिरा हुआ है। ...ाती के आकार की, 3-4 इंच लंबी और एक इंच, या इससे कुछ चोडी, थैली होती है। यह यकृत की सतह के नीचे होती है और उससे ऐरियोला (areola) ऊतकों द्वारा जुड़ी होती है। ...२२ KB (७४ शब्द) - ०९:०१, ७ मार्च २०२०
- ...े पर नष्ट हो जाती हैं और उनके स्थान पर फाइबर तंतुओं का निर्माण हो जाता है। यकृत की बनावट भी असामान्य हो जाती है, जिससे पोर्टल हाइपरटैंशन की स्थिति बन जाती == रोग के लक्षण == ...९ KB (१८९ शब्द) - १९:१८, ३ अक्टूबर २०२०
- ...ेचिश''' (Dysentery) या '''प्रवाहिका''', [[मानव का पोषण नाल|पाचन तंत्र]] का रोग है जिसमें गम्भीर [[अतिसार]] (डायरिया) की शिकायत होती है और [[मल]] में [[रक् ...ाँ इस रोग के प्रसार में अत्यधिक सहायक होती हैं। पेचिश के मुख्य लक्षणों में रोगी को तीव्र स्वरूप के उदरशूल के साथ अतिसार होता है तथा गुदा के पास के भाग में ...१३ KB (४१ शब्द) - १५:४५, २९ जून २०२१
- ...चल नहीं सकता"। संसार के जिन क्षेत्रों में [[चावल]] मुख्य आहार है, उनमें यह रोग विशेष रूप से पाया जाता है। इस रोग की विशेषताएँ हैं : ...१२ KB (१११ शब्द) - ०६:१६, १८ फ़रवरी २०२१
- ...[[यक्ष्मा|टी. बी.]] के फोकस विद्रधि (abcess), कोथ (gangrene), [[अर्बुद]], यकृत विद्रधि (liver abcess) इत्यादि के फटने तथा [[पसली]] के अस्थिभंग के करण होती ...न से विस्थापन (displacement) भी हो जातो है। ऐसी अवस्था में परीक्षा करने पर रोगी तकिए के सहारे वक्ष को दबाए बैठा कराहता हुआ मिलता है तथा साँस की गति मंद एव ...५ KB (५० शब्द) - २१:१३, १५ जून २०२०
- ...वता, आंतों के एट्रेसिया, और इंट्रायूटरिन वृद्धि मंदता शामिल हो सकती है। इस रोग के कारण आमतौर पर अज्ञात है। धूम्रपान करने वाली या शराब पीने वाली, या 20 साल इस रोग के उपचार में शल्य चिकित्सा शामिल है। यह आमतौर पर जन्म के कुछ ही समय बाद होत ...८ KB (२०२ शब्द) - ०५:४२, ३ मार्च २०२०
- ...गों में स्वयंसीमित सर्दी-जुकाम से लेकर [[जीवाणुजन्य न्यूमोनिया]] जैसे घातक रोग हैं। ...ा]] एवं ब्रोंकोन्यूमोनिया, फुफ्फुस-विद्रधि, [[यक्ष्मा]], फुफ्फुसों के फंगस रोग। ...१० KB (४३ शब्द) - १४:३९, २२ फ़रवरी २०२१
- सिरदर्द केवल एक लक्षण है, कोई रोग नहीं। इसके अनेक कारण हो सकते हैं, जैसे साधारण चिंता से लेकर घातक [[मस्तिष्क * मस्तिष्क के रोग - अर्बुद, फोड़ा, मस्तिष्कशोथ तथा मस्तिष्काघात; ...१२ KB (१०७ शब्द) - १८:३५, २६ जनवरी २०२१
- ...त्र]] का वह विभाग है जो [[मानव का पोषण नाल|पाचन तंत्र]] तथा उससे सम्बन्धित रोगों पर केंद्रित है। इस शब्द की उत्पत्ति प्राचीन ग्रीक शब्द gastros (उदर), ent ...canal) से सम्बन्धित मुख से [[गुदा]]द्वार तक के सारे अंगों और उनके रोगों पर केन्द्रित है। इससे सम्बन्धित चिकित्सक जठरांत्ररोगविज्ञानी (gastroenterologists ...२३ KB (११० शब्द) - ०२:२१, ४ मार्च २०२०
- ...बें समय तक चलने वाला जोडों का रोग है जिसमें जोडों मे भारी दर्द होता है। इस रोग का उग्र चरण तो मात्र २ से ५ दिन के लिये चलता है किंतु जोडों का दर्द महीनों ...लक्षण वाली बीमारी पैदा करता है जिस प्रकार की स्थिति [[डेंगू बुख़ार|डेंगू]] रोग मे होती है। ...१७ KB (१६३ शब्द) - २३:२१, २२ सितम्बर २०२०
- ...कामला के लक्षण प्रकट होते हैं। कामला स्वयं कोई रोगविशेष नहीं है, बल्कि कई रोगों में पाया जानेवाला एक [[लक्षण]] है। यह लक्षण नन्हें-नन्हें बच्चों से लेकर ...ादि शल्य रोगों में मार्गाविरोध यकृत बाहर होता है। यकृत के आंतरिक रोगों में यकृत के भीतर की वाहिनियों में संकोच होता है, अत: प्रत्यक्ष पित्तरंजक के अतिरिक्त ...५९ KB (३०४ शब्द) - १३:०७, २६ जून २०२१
- ...के समान है। इस पद्धति में [[रसायन विज्ञान|रसायन]] का आयुर्विज्ञान तथा आल्केमी (रसायन विश्व) के सहायक विज्ञान के रूप में काफी विकास हुआ है। इसे औषध-निर ...के रास्ते में संक्रमण, [[यकृत]] की बीमारी और गैस्ट्रो आंत के रास्ते के रोग, सामान्य डेबिलिटी, पोस्टपार्टम एनेमिया, डायरिया और [[संधि शोथ|गठिया]] (आथ ...६ KB (११३ शब्द) - ००:४६, १६ जून २०२०
- ...ल्व प्रोलेप्स, डायबिटीज, किडनी फैल्यर, बाँझपन, बैल्स पॉल्सी और पेरीओडोन्टल रोगों में किया जाता है। यह बैल, सूअर व मुर्गे आदि की कलेजी (हृदय, गुर्दे, यकृत आदि) और मछली में प्रचुरता से पाया जाता है। यह शरीर के उन अंगों में ज्यादा प ...३१ KB (१९९ शब्द) - ११:५५, १६ जून २०२०
- ...े लक्षण प्रकट होते हैं। इसकी पहचान तीन माह की आयु के बाद ही होती है। इसमें रोगी बच्चे के शरीर में रक्त की भारी कमी होने लगती है जिसके कारण उसे बार-बार बाह ...ोग के शिकार हैं, जबकि पाकिस्तान में १ लाख और भारत में करीब 10 लाख बच्चे इस रोग से ग्रसित हैं।<ref name = "पत्रिका ">{{cite web |url=http://www.patrika.com ...२२ KB (३७६ शब्द) - ०५:४७, १५ जून २०२०
- ...जाना चाहिए क्योंकि ऐसे मामलों में वायुमार्ग में बाधा उत्पन्न हो सकती है और रोगी का दम घुट सकता है। जब वाहिकशोफ़ का कारण एलर्जी हो, तब एपिनेफ्रीन जीवन रक्ष == रोग के लक्षण == ...३० KB (३०४ शब्द) - २१:१९, १५ जून २०२०
- ...सम्पूर्ण [[जीवन|जीव]] इस प्रणाली के कार्य करने पर निर्भर करता है; हालांकि, केवल वे अंग जो विशेष रूप से उत्सर्जन प्रक्रिया के लिए होते हैं उन्हें मलोत्सर् ...े बाहर निकाले जाते हैं। चूंकि इसमें कई ऐसे कार्य शामिल हैं जो एक दूसरे से केवल ऊपरी तौर पर संबंधित हैं, इसका उपयोग आमतौर पर शरीर रचना या प्रकार्य के और ...३० KB (६५ शब्द) - १२:२६, २० जुलाई २०२१
- ...प्रभावित होता है,जिसके कारण शौच करने में बहुत पीड़ा होती होती है ,किसी को केवल गैस की समस्या होती है. किसी को खाने का पाचन ठीक से नहीं हो पाता है। और आज * [[मधुमेह]] के रोगियों में पाचन संबंधी समस्या ...१९ KB (१३३ शब्द) - २२:२१, ६ जुलाई २०२१
- '''मलेरिया''' या '''दुर्वात''' एक [[वाहक]]-जनित [[संक्रामक रोग]] है जो [[प्रोटोज़ोआ]] परजीवी द्वारा फैलता है। यह मुख्य रूप से [[अमेरिका]], ...यह रोग ''[[प्लास्मोडियम]]'' गण के प्रोटोज़ोआ परजीवी के माध्यम से फैलता है। केवल चार प्रकार के ''प्लास्मोडियम'' (''Plasmodium'') परजीवी मनुष्य को प्रभावित ...६३ KB (९०३ शब्द) - ००:०३, ५ जुलाई २०२१
- ...ह DM, MCh, MD, Ph.D., पोस्टडॉक्टोरल फेलोशिप (PDF) तथा पोस्टडॉक्टोरल सर्टिफिकेट कोर्स (PDCC) और सीनियर रेजिडेंसी प्रदान करता है। ...दिखाने के लिए परामर्श शुल्क नहीं ली जाती है। नये मरीज के रजिस्ट्रेशन हेतु केवल एक बार 250 रूपये शुल्क लिया जाता है जो एक वर्ष के लिए मान्य है। वर्ष के स ...४२ KB (१३५ शब्द) - २२:३३, १७ अगस्त २०२१