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- ...क पत्र में "विभिन्न सभ्यताओं के बीच संवाद" पर एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के विचार का सुझाव दिया था और 1974 में, [[सेनेगल]] के राष्ट्रपति ल्योपोल्ड सेडेल सेनघ [[श्रेणी:राजनीतिक नववादिता]] ...२ KB (७३ शब्द) - १२:३३, ३१ अगस्त २०२०
- ...प्रचलित उन विचारों का समुच्चय है जिनके आधार पर वह किसी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संगठन विशेष को उचित या अनुचित ठहराता है।<ref>दर्शनकोश, प्रगति प्रकाशन, मास् ...ें उस वर्ग के विचार होते हैं जिसका उस काल में समाज पर प्रभुत्व होता है। इन विचारों को वह वर्ग बाकी समाज पर थोपे रखता है क्योंकि यह वर्ग प्रचार के सारे साधनो ...११ KB (९७ शब्द) - ०९:३६, ३ नवम्बर २०२०
- ...्त्र पर दिए गए अपने व्याख्यानों से उनके प्रति पुन: अभिरुचि पैदा की। मेन इस विचार के पोषक थे कि आस्टिन की देन के ही फलस्वरूप विधि का दार्शनिक रूप प्रकट हुआ, ...५ KB (१५ शब्द) - १९:२०, ४ मार्च २०२०
- ...कश की लेकिन उन्होंने इसे यह कहकर अस्वीकार कर दिया कि इससे जनता के बीच अपने विचार स्वतंत्रतापूर्वक रखने के उनके अधिकार पर अंकुश लग जाएगा। ...५ KB (५६ शब्द) - ०४:४०, १५ जून २०२०
- ...्रवाई के एक पाठ्यक्रम की योजना बनाने के लिए एक साथ परामर्श लिया। उद्देश्य। विचार-विमर्श से निकलने वाला अंतिम निर्णय '''गुरमत''' का था। इसने खालसा की सामान्य ...ी। पूरे सिख लोगों, सरबत खालसा की इन सभाओं में शामिल होने वाले सभी लोगों ने विचार-विमर्श में बराबर की बात कही। "सभी निजी दुश्मनी समाप्त हो गई" और सभी ने उपस् ...१० KB (२९ शब्द) - ०१:३३, ८ मार्च २०२०
- ...रीय आय एवं सम्पदा के वितरण के अध्ययन को 'राजनीतिक अर्थशास्त्र' कहा गया था। राजनीतिक अर्थशास्त्र की उत्पत्ति नैतिक दर्शन (moral philosophy) से हुई। अट्ठारहवीं श ...ातें होने लगी हैं और नये राजनीतिक अर्थशास्त्र की चर्चा सुनायी देने लगी है। राजनीतिक अर्थशास्त्र का इस नये उभार में ख़ास बात यह है कि यह राजनीति के आर्थिक महत्त ...२२ KB (३४ शब्द) - १३:३७, २३ मार्च २०२०
- ...ोगों अथवा अल्पसंख्यक समूह में ही केन्द्रित होती है। यह किस प्रकार होता है? राजनीतिक समाजशास्त्र में इन प्रश्न का उत्तर ढूँढने के प्रयासों के परिणाम-स्वरूप ही अ ...ाफी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रत्येक समाज में किसी न किसी प्रकार का सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक संस्तरण पाया जाता है। ...१७ KB (३१ शब्द) - ११:५८, ५ मार्च २०२०
- ...केवल एक विशिष्ट प्रकार की शासन प्रणाली ही नहीं है वरन् एक विशेष प्रकार के राजनीतिक संगठन, सामाजिक संगठन, आर्थिक व्यवस्था तथा एक नैतिक एवं मानसिक भावना का नाम ...ियों लंबा इतिहास है। यद्यपि रोमन साम्राज्यवाद ने लोकतंत्र के विकास में कोई राजनीतिक योगदान नहीं किया, परंतु फिर भी रोमीय सभ्यता के समय में ही स्ताइक विचारकों न ...१७ KB (१४ शब्द) - १२:२१, ८ मार्च २०२०
- == न्याय-विषयक राजनीतिक विचार == ...यायपालिका को समानता के मध्यवर्ती बिंदु पर पहुँचने का प्रयत्न करना चाहिए और राजनीतिक अधिकारों, सम्मान, संपत्ति तथा वस्तुओं के आवंटन में वितरणात्मक न्याय के सिद् ...१६ KB (१०१ शब्द) - ०७:३१, २४ अप्रैल २०२१
- ...ित्व से मुक्त महसूस कर सकता है? क्या ऐसा भी कोई बिंदु है जब वह सभी तरह के राजनीतिक दायित्वों को नज़रअंदाज़ करके विद्रोह करने के अधिकार का दावा कर सके? ...भों को भोगने के बदले राजनीतिक दायित्वों को निभाना पड़ता है। यहाँ सुकरात की राजनीतिक दायित्व संबंधी समझ उसके बिना शर्त पालन की है। यानी सुकरात संबंधित राज्य के ...२१ KB (२० शब्द) - १५:३७, २३ अगस्त २०२०
- राजनीति में बहुत से रास्ते अपनाये जाते हैं जैसे- राजनीतिक विचारों को आगे बढ़ाना,विधि बनाना, विरोधियों के विरुद्ध युद्ध आदि शक्तियों का प्र ...कुंडली की तरह जकड़ रखा है और इससे जूझने के सिवाय कोई अन्य रास्ता नहीं है ।राजनीतिक संगठन और सामूहिक निर्णय के किसी ढांचे के बिना कोई भी समाज जीवित नहीं रह सक ...१४ KB (९८ शब्द) - २१:५१, ८ अगस्त २०२१
- ...समय भारत में भगवान [[महावीर]] और [[गौतम बुद्ध|बुद्ध]] धर्म के संबध में नए विचार रख रहें थे, चीन में भी एक महात्मा का जन्म हुआ, जिसका नाम '''कन्फ़्यूशियस''' ...ा वाहक हो सकता है, उनका स्रष्टा नहीं। वह पुरातत्व का उपासक था, कयोंकि उसका विचार था कि उसी के माध्यम से यथार्थ ज्ञान प्राप्त प्राप्त हो सकता है। उसका कहना थ ...१७ KB (४३ शब्द) - ०१:५४, २२ दिसम्बर २०२०
- ...रोम और यूनान के बीच राजनीतिक संबंध भी थे। फलत:, रोम का धर्म संघ एक ओर अपनी राजनीतिक सत्ता एवं दंड नीति के द्वारा यूरोप की जनता को अपने अनुशासन में रखने का प्रय ...ध हो जाता है। मॉलीनॉस के अनुसार, मौन की अवस्था में सभी प्रयोजनों, इच्छाओं, विचारों और संकल्पों का अभाव हो जाता है। यह सांसारिक वस्तुओं से पूर्ण विराम की अवस ...१३ KB (८ शब्द) - १०:०९, ३ मार्च २०२०
- केल्सन के अनुसार निश्चयात्मक विधि सम्बन्धी कथन न तो नैतिक और राजनीतिक मूल्य सम्बन्धी कथन है और न ही तथ्य सम्बन्धी। यह इसलिए 'शुद्ध' कहा जाता है क ...धान्त [[मनोविज्ञान]], [[समाजशास्त्र]], [[नीतिशास्त्र]] और [[राजनीतिक दर्शन|राजनीतिक सिद्धान्त]] के तत्वों के साथ मिश्रित हो गया है।’’ उन्होंने विधिवेत्ताओं और ...२४ KB (४६ शब्द) - ०२:४७, ६ मार्च २०२०
- ...या और गिरफ्तार कर लिया तो उन्होंने धार्मिक उपदेशों के बहाने आदिवासियों में राजनीतिक चेतना फैलाना शुरू किया। वह स्वयं को भगवान कहने लग गया। उसने [[मुण्डा|मुंडा ...की विशाल सभा हुई, जिसमें आंदोलन की पृष्ठभूमि तैयार हुई। आदिवासियों के बीच राजनीतिक चेतना फैलाने का काम चलता रहा। अंत में 24 दिसम्बर 1899 को बिरसापंथियों ने अं ...८ KB (१५४ शब्द) - २१:३३, २६ मई २०२१
- ...थायी रूप से उस बनावट को बनाये रखने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इस विचार को प्रकट करते हुए [[हैरी एम जानसन]] ने भूमिका तथा उपसमूह के सरंचनात्मक सबंध ...दो सैद्धान्तिक पक्षों को उजागर किया है। पहले श्रेणी में हम उन सैद्धान्तिक विचार की बात कर सकते हैं जिसमें सामाजिक सरंचना का एक ऐसा स्वरूप होता है जिसे देखा ...१४ KB (२६ शब्द) - १८:३३, २२ जून २०२१
- ...ाजा के अस्तित्व को जारी रखना सही मायनों में संप्रभु राष्ट्र के लिए उपयुक्त विचार नहीं था। आजादी से पहले भारत के आखरी ब्रिटिश वाइसराय [[लुईस माउंटबेटन, बर्मा ...६ KB (५ शब्द) - १०:३६, ६ मई २०२१
- ...ही सर्वाधिक प्रभावशाली विचार बन जाते हैं। इस सामाजिक चेतना तथा प्रभावशाली विचारों का संबंध भी भ्रांत चेतना से है क्योंकि सर्वहारा निजी चेतना के विकास के स् ...ही उत्पादन पद्धति सामूहिक हो जाती है और इस सामूहिकता के कारण व्यक्तिवाद का विचार सर्वहारा की दृष्टि में महत्त्वपूर्ण नहीं रह जाता है। ...२१ KB (२९ शब्द) - ०९:५४, ४ मार्च २०२०
- सामाजिक और राजनीतिक चिंतन में '''समतावाद''' (Egalitarianism) एक स्थापित लेकिन विवादित अवधारणा ह समतावाद के दर्शन पर विचार करते समय कुछ महत्त्वपूर्ण सवाल उत्पन्न होते हैं, जैसे ‘किस बात की समानता हो ...२३ KB (२२ शब्द) - १५:१७, ४ मार्च २०२०
- ...का सबूत दिया। स्पष्ट है कि सरकार सामाजिक और धार्मिक संकीर्णता को, भारत के राजनीतिक-ऐक्य का सबसे बड़ा शत्रु समझते थे। ...ी अंग्रेज़ों से उपाधि मिली। उन्होने अंग्रेज़ों की बहुत प्रशंसा की है। उनका विचार था कि अंग्रेज़ों के कारण ही भारत में प्रगति आयी। ...११ KB (६० शब्द) - १७:५५, १५ जून २०२०