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- '''ज्योतिष सिद्धान्त''' अथवा एस्ट्रानमी {{वैदिक साहित्य}} ...१८७ बाइट (२ शब्द) - ००:५३, ४ फ़रवरी २०१४
- ...शायद इस बात का ज्ञान भी न हो कि विगत कुछ वर्षों में उनके अपने [[देश]] में ज्योतिष की एक नई शाखा का विकास हुआ है, {{वैदिक साहित्य}} ...४३३ बाइट (० शब्द) - २०:१५, २८ जुलाई २०२०
- ...ला, आकाशीय पातालीय और धरातलीय जीवों, तत्वों और गतिविधियों पर नजर रखने वाला ज्योतिषी कहलाता है। {{वैदिक साहित्य}} ...५७९ बाइट (१ शब्द) - ००:२७, ४ अगस्त २०२१
- ...नुसार राजा [[बलि]] की अस्थियों से रत्नों का निर्माण हुआ। विभिन्न प्रकार के ज्योतिषिय रत्न निम्न प्रकार के हैं- {{वैदिक साहित्य}} ...१ KB (१ शब्द) - १५:३२, २९ अगस्त २०२०
- {{वैदिक साहित्य}} [[श्रेणी:ज्योतिष]] ...१७२ बाइट (० शब्द) - २२:३९, २९ जुलाई २०२०
- ...[[कंप्यूटर|कम्प्यूटर]] दोनों ही अंकों पर कार्य करते हैं। कम्प्यूटर और अंक ज्योतिष (दशमलव) में इस्तेमाल की जानेवाली अंक प्रणाली में साम्य बैठाकर कर आप अपने लि {{वैदिक साहित्य}} ...८५१ बाइट (० शब्द) - १७:५५, २९ फ़रवरी २०२०
- {{वैदिक साहित्य}} [[श्रेणी:ज्योतिष]] ...३२३ बाइट (० शब्द) - ००:०५, २० मार्च २०१५
- {{भारतीय ज्योतिष}} {{वैदिक साहित्य}} ...१ KB (० शब्द) - २०:५७, १५ फ़रवरी २०१३
- ...े गये वैदिक वर्णन का प्रयोग के रूप में समझा जाना होता है, जमिनी पद्धति में ज्योतिष के प्रत्येक फ़र्मूले को विभिन्न लोगों की कुन्डलिया और जन्म समय को खुद के द् {{वैदिक साहित्य}} ...२ KB (२ शब्द) - ०६:५१, १९ सितम्बर २०२०
- ...ोतिष में इसके अतिरिक्त फलित के लिये कारकांश का प्रयोग किया जाता है। जैमिनि ज्योतिष में पद या आरुढ लग्न भी फलित का एक महत्वपूर्ण भाग है। '''जैमिनी ज्योतिष कारक''' ...५ KB (३२ शब्द) - ०३:३८, १५ जून २०२०
- ...जन्म के समय पूर्वी क्षितिज में हो रहा होता, वही राशि लग्न - राशि होती है| ज्योतिष शास्त्र में [[मेष]] [[वृषभ]] [[मिथुन]] [[कर्क]] [[सिंह]] [[कन्या]] [[तुला]] {{वैदिक साहित्य}} ...१ KB (१ शब्द) - १६:५८, ९ मार्च २०२१
- [[भदावरी ज्योतिष]] में जीवन के दो पहलुओं का विवरण मिलता है, प्रथम पहलू के अन्दर जीवन का चढाव {{वैदिक साहित्य}} ...१ KB (१ शब्द) - १५:४२, २ मार्च २०२०
- ज्योतिष के अनुसार [[जन्म कुण्डली]] के जिस घर में कोई ग्रह न हो तथा जिस घर पर किसी ग ...ताब में सोये हुए घरों को जगाने के लिए कई उपाय बताए गये हैं। परन्तु [[वैदिक ज्योतिष]] में इस प्रकार के विधान नहीं मिलते है। जो भाव खाली है उन भावों के कारको के ...२ KB (० शब्द) - ००:३०, २७ जनवरी २०१७
- {{वैदिक साहित्य}} [[श्रेणी:ज्योतिष]] ...६४८ बाइट (१ शब्द) - २२:४२, १ मार्च २०२०
- ...में रहते थे और भगवान श्री कृष्ण के भक्त थे, इनके ग्रन्थो में कृष्णभक्ति और ज्योतिष की तरफ़ काफ़ी रुचि मिलती है, सिद्धान्तलेश की टीका नाम इन्होने कृष्णालंकार ह {{वैदिक साहित्य}} ...३ KB (१ शब्द) - १९:२०, २६ मार्च २०१७
- {{वैदिक साहित्य}} [[श्रेणी:ज्योतिष]] ...८७० बाइट (० शब्द) - १२:५०, २ मार्च २०१७
- ...देशों में रहना वाला हो। भविष्य जानने का तरीका भले ही अलग है परंतु ग्रह और ज्योतिष सिद्धांत को वह भी स्वीकार करते हैं एवं कई स्थानों पर दोनों में समानताएं भी ...|भारतीय और पाश्चात्य ज्योतिष के परिचय तथा तत्व]]|250px|भारतीय और पाश्चात्य ज्योतिष के परिचय तथा तत्व|]] ...८ KB (३२ शब्द) - १४:३६, १५ जून २०२०
- {{वैदिक साहित्य}} [[श्रेणी:ज्योतिष]] ...७९९ बाइट (० शब्द) - १४:५४, ६ जून २०१७
- {{वैदिक साहित्य}} [[श्रेणी:ज्योतिष]] ...९८० बाइट (१ शब्द) - १२:५०, २ मार्च २०१७
- ...ता है। और यह समझ आती है कि क्यों ऋग्वेद में ४३२००० अक्षर हैं। इस ग्रन्थ से वैदिक अध्ययन को बहुत स्फूर्ति मिली है। [[संयुक्त राज्य अमेरिका|अमेरिका]] के [[वेद ...े १० मण्डल एक [[वैदिक चिति]] समान हैं, यह सुभाष काक की खोज का पहला चरण था। वैदिक चिति ५ परत की होती है, अतः ऋग्वेद को भी ५ परत में देखना चाहिये। मूल तथ्य अध ...५ KB (८६ शब्द) - १९:३३, २३ जून २०२१