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"वैयाकरण" के परिणाम खोजें - भारतपीडिया सामग्री पर जाएँ

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  • ...क्त नाम से सबसे पहले वैदिक शब्दों का निर्वचन व व्याख्या की। संस्कृत के चार वैयाकरण सबसे प्रसिद्ध हैं: संस्कृत के शब्दों की व्युत्पत्ति में उपर्युक्त वैयाकरणों के कार्यों का सन्दर्भ लिया जाता है। संस्कृत के इस अग्रग कार्य का सन्दर्भ ...
    ६ KB (८२ शब्द) - २२:२६, १५ जून २०२०
  • '''प्रभाकर बैगा घोघरी''' (७वीं शताब्दी) [[भारत]] के [[दार्शनिक]] एवं [[वैयाकरण]] थे। वे [[मीमांसा दर्शन|मीमांसा]] से सम्बन्धित हैं। उनके गुरु [[कुमारिल भट ...
    २ KB (१०० शब्द) - १६:५१, २२ अप्रैल २०२०
  • ...कृत भाषा|संस्कृत]] : कात्यायन) या 'महाकच्चान' [[पालि भाषा|पालि]] भाषा के [[वैयाकरण]] तथा [[गौतम बुद्ध|बुद्ध भगवान]] के दस शिष्यों में से एक परम ऋद्धिमान्‌ शिष [[श्रेणी:वैयाकरण]] ...
    ७ KB (१०२ शब्द) - ०३:५२, १७ सितम्बर २०२०
  • ...स्थितिप्रवृत्ति के अनुसार लोकशिक्षण करता है। व्याकरण के नियमो के ज्ञाता को वैयाकरण कहते है। ...लंघन करने पर भी भाषा को कोई ग़लत न कह देगा। [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] के एक वैयाकरण ने "पुंसु" के साथ "पुंक्षु" पद को भी नियमबद्ध किया; परंतु वह वहीं धरा रह गय ...
    २५ KB (१०४ शब्द) - ०२:४१, १२ जुलाई २०२१
  • ...ंग के यात्रा विवरण से यह ज्ञात होता है कि ६५१ ईस्वी में भर्तृहरि नामक एक [[वैयाकरण]] की मृत्यु हुयी थी। इस प्रकार इनका सातवीं शताब्दी का प्रतीत होता है परन्तु [[श्रेणी:वैयाकरण]] ...
    २६ KB (१८५ शब्द) - १७:५९, १६ जुलाई २०२१
  • गाथा की भाषा वैदिक मंत्रों की भाषा से भिन्न है। इसमें वेद के विषम वैयाकरण रूपों का सर्वथा अभाव है तथा पदों का सरलीकरण ही स्फुटततया अभिव्यक्त होता है। ...
    १५ KB (१५ शब्द) - ०९:५१, ६ मई २०२१
  • '''पाणिनि''' (7०० ई पू) [[संस्कृत]] भाषा के सबसे बड़े [[वैयाकरण]] हुए हैं। इनका जन्म तत्कालीन उत्तर पश्चिम भारत के [[गांधार]] में हुआ था। इ ...ों के उल्लेख से ज्ञात होता है। शाकटायन निश्चित रूप से पाणिनि से पूर्व के [[वैयाकरण]] थे, जैसा निरुक्तकार [[यास्क]] ने लिखा है। शाकटायन का मत था कि सब संज्ञा श ...
    ४४ KB (३६६ शब्द) - १३:५१, १६ जून २०२१
  • आचार्य हेमचन्द्र संस्कृत के अन्तिम महा[[वैयाकरण]] थे। [[अपभ्रंश]] साहित्य की प्राचीन समृद्वि के सम्बध में विद्वान उन पदों क [[श्रेणी:वैयाकरण]] ...
    ४६ KB (३५७ शब्द) - १७:०२, ९ जनवरी २०२१
  • ...ब्दी) की टीकाएँ विश्रुत हैं। कौंडभट्ट (ई. 1600) का वैयाकरणभूषण और नागेश की वैयाकरण सिद्धांतमंजूषा उल्लेखनीय हैं। नागेश का स्फोटवाद, कृष्णभट्टमौनि की स्फोटचंद् ...
    ३२ KB (२९८ शब्द) - २१:२४, २२ मार्च २०२१
  • ...मुख हैं। नागेश ने अपने 'शब्देन्दुशेखर', 'परिभाषेन्दुशेखर', 'स्फोटवाद' एवं 'वैयाकरण सिद्धांत-मंजूषा' ग्रन्थों का बड़ा ही सूक्ष्म विवेचन किया है। ...मूल में सादृश्य है, जिसकी पूर्वाचार्यो ने उपेक्षा की थी। इस प्रकार ये नव्य वैयाकरण बड़े व्यवस्थावादी थे। ...
    ६६ KB (२३८ शब्द) - १३:२५, ४ मई २०२१
  • * [[वैयाकरण]] (Grammarian) ...
    १९ KB (१,२३५ शब्द) - १०:२३, १६ जून २०२०
  • ...्र के शासनकाल में पश्चिम से यवनों का आक्रमण हुआ। इसी काल के माने जाने वाले वैयाकरण [[पतञ्जलि|पतंजलि]] ने इस आक्रमण का उल्लेख किया है। [[कालिदास]] ने भी अपने [ ...
    ५८ KB (४२५ शब्द) - ०८:०८, १८ अगस्त २०२१
  • ...ति से अन्वित होकर अंशत्रय विशिष्ट भावनारूप वाक्यार्थ का प्रतिपादन करता है। वैयाकरण मत से वाक्यार्थ वाक्यशक्ति से भासित होता है। इस मत के अनुसार शब्दबोध में पद ...
    १०५ KB (२४६ शब्द) - २०:३५, २० अगस्त २०२०
  • ...त्री; विश्वेश्वरानन्द वैदिक शोध संस्थान, लाहौर; संस्करण-1945 ई.(घ)चतुर्वेद वैयाकरण पद-सूची, खण्ड-1,2) - सं. विश्वबन्धु शास्त्री; विश्वेश्वरानन्द वैदिक शोध संस ...
    ८६ KB (६१८ शब्द) - १२:०८, ९ अगस्त २०२१