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- '''फिल्म शृंगार''' [[हिन्दी]] की एक फिल्मी मासिक [[पत्रिका]] है। यह वर्ष 1970 से [[दिल्ली]] ...१,००८ बाइट (१४ शब्द) - ११:२१, १५ जून २०२०
- ...कि प्रसाधक और प्रसाधिकाओं का एक अलग वर्ग ही बन गया था। इनमें से प्राय: सभी शृंगारों के दृश्य हमें रेलिंग या द्वारस्तंभों पर अंकित (उभारे हुए) मिलते हैं। ...से माँग भरती थीं। वस्तुत: वारवनिताओं को छोड़कर अधिकतर विवाहित स्त्रियों के शृंगार प्रसाधनों का उल्लेख मिलता है, कन्याओं का नहीं। सिंदूर के स्थान पर कभी कभी फ ...१८ KB (४१ शब्द) - ०५:०१, ४ मार्च २०२०
- [[File:Mani Madhava Chakyar-Sringara-new.jpg|thumb|मणि माधव चाक्यार द्वारा शृंगार रस का प्रदर्शन]] '''शृंगार रस''' [[रस (काव्य शास्त्र)|रसों]] में से एक प्रमुख [[रस (काव्य शास्त्र)|रस] ...८ KB (२१ शब्द) - १४:३०, २५ जनवरी २०२१
पृष्ठ के टेक्स्ट में मिलान
- ...ा, पक्षी, मेघ अथवा पवन द्वारा भी नायक को उपालंभ भेजती है। ऐसा प्राय: वियोग शृंगार में देख पड़ता है। ...ता और मिलन की अभिलाषा। परिभाषा के इसी वैशिष्ट्य के कारण उपालम्भ काव्य केवल शृंगार तक ही सीमित नहीं माना जा सकता। ...५ KB (७ शब्द) - २१:२४, ५ मई २०२१
- '''फिल्म शृंगार''' [[हिन्दी]] की एक फिल्मी मासिक [[पत्रिका]] है। यह वर्ष 1970 से [[दिल्ली]] ...१,००८ बाइट (१४ शब्द) - ११:२१, १५ जून २०२०
- ...ै। इसे पूरब अंग की ठुमरी का हल्का संस्करण भी कहा जाता है। इसमें प्रमुख भाव शृंगार का होता है लेकिन इसमें ठुमरी के मुकाबले अधिक उन्मुक्तता होती है। ...७७१ बाइट (२ शब्द) - १३:५५, २० मार्च २०२१
- [[File:Mani Madhava Chakyar-Sringara-new.jpg|thumb|मणि माधव चाक्यार द्वारा शृंगार रस का प्रदर्शन]] '''शृंगार रस''' [[रस (काव्य शास्त्र)|रसों]] में से एक प्रमुख [[रस (काव्य शास्त्र)|रस] ...८ KB (२१ शब्द) - १४:३०, २५ जनवरी २०२१
- ...गया। वर्ण्य-विषय मात्र फाग से संबंधित और रस शृंगार था, वह भी संयोग। वियोग शृंगार को धमार बहुत कम स्थान प्राप्त हैं। ...७ KB (५२ शब्द) - ०६:५५, १५ जून २०२०
- ...वर्णनों से इस काव्य की भावभूमि का विस्तार हुआ है। [[वीर रस]] के साथ-साथ [[शृंगार रस]] की भी प्रधानता है। इसमें [[दोहा]], [[सवैया]], [[कवित्त]] आदि छंद प्रयु ...३ KB (१५ शब्द) - १४:३७, २२ अगस्त २०२१
- [[श्रेणी:शृंगार]] ...३ KB (४ शब्द) - २०:२२, ६ मार्च २०२०
- ...वित्त और सवैये स्फुट रूप में उपलब्ध हैं। इनकी समस्त वाणी सिद्धांत के पद और शृंगार के पद दो भागों में विभक्त है। ...ति आदि सभी वर्णन किया है किया है। अपनी प्रिया को प्रसन्न करने के लिए उसका शृंगार करते हुए कृष्ण का यह वर्णन भाव और भाषा की दृष्टि से उत्तम : ...६ KB (२५ शब्द) - १०:५७, ६ मई २०२१
- ...रक्षा अथवा उन्हें सुंदर श्यामल करने के लिए चूर्ण द्रव्य, नारियों के [[सोलह शृंगार|सोलह सिंगारों]] में से एक। प्रोषितपतिका विरहणियों के लिए इसका उपयोग वर्जित ...३ KB (३ शब्द) - १७:०६, २१ अप्रैल २०२१
- ...कि प्रसाधक और प्रसाधिकाओं का एक अलग वर्ग ही बन गया था। इनमें से प्राय: सभी शृंगारों के दृश्य हमें रेलिंग या द्वारस्तंभों पर अंकित (उभारे हुए) मिलते हैं। ...से माँग भरती थीं। वस्तुत: वारवनिताओं को छोड़कर अधिकतर विवाहित स्त्रियों के शृंगार प्रसाधनों का उल्लेख मिलता है, कन्याओं का नहीं। सिंदूर के स्थान पर कभी कभी फ ...१८ KB (४१ शब्द) - ०५:०१, ४ मार्च २०२०
- ...ाखों वर्षों से हो रहा है। पादप हमारे जीवन में [[पुष्प|फूल]] और [[शृंगार रस|शृंगार]] के रूप में प्रयुक्त होते हैं। अभी हाल के वर्षों तक पादपों से ही हमारी अधि ...८ KB (२८२ शब्द) - १४:५३, २९ नवम्बर २०२०
- ठुमरी में अधिकतर शृंगार के पद होते हैं। यह पंजाबी ठेका, दीपचंदी इत्यादि तालों में गाई जाती है। ठुमर ...त्य के साथ गाया जाता है। जावड़ि गीत भी कर्णाटक में ही प्रचलित है। इसमें भी शृंगार रस ही प्रधान होता है, किंतु इसकी लय पद्म की लय की अपेक्षा द्रुत और चंचल होत ...१५ KB (१६ शब्द) - ०९:५२, ६ मई २०२१
- भक्तिरसामृतसिंधु में भक्ति तथा भक्तिरसों का विशद विवेचन करने के बाद शृंगार अथवा मधुर भक्तिरस का विशेष प्रतिपादन उज्ज्वलनीलमणि का प्रतिपाद्य है। इस मधु ...६ KB (६ शब्द) - ०२:३२, ३ मार्च २०२०
- ...कालीन नरेश रावराजा बुधसिंह की सभा में सम्मानित हुए। इनकी आज्ञा से उन्होंने शृंगार रसमाधुरी तथा विदग्ध रसमाधुरी नामक ग्रंथों की रचना की।<ref>'ईश्वरविलास महाका *[[शृंगार रसमाधुरी]] ...३६ KB (७५९ शब्द) - १०:२६, ६ मई २०२१
- ...[[प्राकृत]], [[अपभ्रंश]], [[फारसी]] और हिंदी के आदिकाव्य तथा कृष्णकाव्य की शृंगारी प्रवृत्तियों में मिलते हैं। ...और जिन्होंने विविध काव्यांगों के लक्षण देने वाले ग्रंथ भी लिखे। इस युग में शृंगार की प्रधानता रही। यह युग मुक्तक-रचना का युग रहा। मुख्यतया [[कवित्त]], [[सवैय ...१९ KB (९३ शब्द) - १६:५८, ८ अगस्त २०२१
- ...भी कहते हैं - की सहज अभिव्यक्ति इनकी वाणी में हुई है। इन्होंने [[शृंगार रस|शृंगार]] के अंतर्गत संयोगपक्ष को नित्यलीला का प्राण माना है। [[राधा]] का नखशिख और ...१२ KB (१७० शब्द) - ११:४४, ६ मई २०२१
- ...ी तमाम विशेषताएँ मिलती है। [[प्रकृति]], [[सुन्दरता|सौन्दर्य]], [[शृंगार रस|शृंगार]] और नारी-मन की सुकोमल अभिव्यक्ति के साथ ही जीवन-संघर्ष की आधुनिकतम समस्याओ ...१४ KB (१३४ शब्द) - १०:०६, ६ मई २०२१
- ...्यों की है, जिनकी शैली दूतकाव्यों से मिलती है, किंतु विषयवस्तु [[शृंगार रस|शृंगार]] रसपरक न होकर शांत रसपरक है। इन काव्यों का लक्ष्य आध्यात्मिक अथवा नैतिक सं ...१५ KB (११ शब्द) - १४:३६, ३ मार्च २०२०
- ;नित ही शृंगार बागे बरत बरन।। ...७ KB (१७३ शब्द) - ११:३४, ६ मई २०२१
- ...के यौन व्यापारों से है। "अग्निपुराण" में प्रथम बार नायक-नायिका का विवेचन [[शृंगार रस]] के आलंबन विभावों के रूप में किया गया है। *(5) शृंगार के बाहर की किसी भी बात का वर्णन निषिद्ध समझा गया है। गर्भवती का वर्णन कवि क ...३६ KB (५३ शब्द) - १४:५४, १२ मई २०२१