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- इस ग्रन्थ में भास्कराचार्य ने अनेक विषयों की चर्चा की है जो संक्षेप में नीचे दिए गए ह इस ग्रन्थ मे निम्नलिखित उपविषय हैं- ...४ KB (६६ शब्द) - १२:५६, १५ जून २०२०
- ...कृत में लिखे हैं। बहुत से ग्रन्थ काल के गाल में समा गये किन्तु उसके बावजूद संस्कृत में रचित बौद्ध गर्न्थ विपुल मात्रा में मिलते हैं। ==संस्कृत में रचित कुछ प्रमुख बौद्धग्रन्थ== ...८ KB (४२९ शब्द) - १७:२४, ४ मार्च २०२०
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- '''सर्वार्थचिन्तामणि''', [[ज्योतिष]] का प्रमुख ग्रन्थ है। [[श्रेणी:संस्कृत ग्रन्थ]] ...५७३ बाइट (२७ शब्द) - ००:०७, १६ जून २०२०
- ...से 'जातकचन्द्रिका' भी कहते हैं। यह [[विंशोत्तरी दशा]] पद्धति का महत्वपूर्ण ग्रन्थ है तथा [[वृहद् पाराशर होराशास्त्र]] पर आधारित है। इसके रचनाकार के बारे में ...0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%B0%E0%A5%80 लघुपाराशरी] (संस्कृत विकिस्रोत) ...२ KB (७१ शब्द) - २०:१३, १५ जून २०२०
- '''शारदातिलक''' एक [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] ग्रन्थ है जिसमें [[गणेश|गणपति]], [[शिव]], [[विष्णु]], तथा [[शक्ति]] आदि अन्य देवता ...७८२ बाइट (२ शब्द) - ०७:१९, ३ मार्च २०२०
- "देशी" शब्द की व्युत्पत्ति [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] शब्द "देश" से है। == सन्दर्भ ग्रन्थ == ...२ KB (० शब्द) - १४:५८, ४ मार्च २०२०
- '''कर्पूरमंजरी''' [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] के प्रसिद्ध नाटककार एवं काव्यमीमांसक [[राजशेखर]] द्वारा रचित [[प्राकृत]] ...यदर्पण]] के अनुसार सट्टक आदि से अंत तक प्राकृत भाषा में रचित होता है, न कि संस्कृत नाटकों के समान जिसमें केवल कुछ पात्र ही प्राकृत भाषा में रचित होता है। उसमे ...५ KB (४७ शब्द) - १०:२३, १६ जून २०२०
- | language = [[संस्कृत]] | genre = हिन्दू धार्मिक ग्रन्थ ...५ KB (३३९ शब्द) - १८:१३, १५ जून २०२०
- '''आर्यसंघाट सूत्रम्''' [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] में लिखित [[गौतम बुद्ध|महात्मा बुद्ध]] के [[राजगृह]] में दिये गये उपदेशों ...इतिहासपरक शोध से पता चलता है कि संघाट सूत्र आठवीं शती तक बौद्धों का मुख्य ग्रन्थ बना रहा। किन्तु इसके बाद दुर्दैव से सन् १९३० तक संघाट सूत्र अप्राप्य रहे। फ ...३ KB (३६ शब्द) - २२:०१, ९ फ़रवरी २०२१
- ...े महान ज्योतिषी [[चंद्रशेखरसिंह सामंत]] द्वारा रचित ज्योतिष ग्रंथ है। यह [[संस्कृत]] में है और काव्य रूप में रचित है। श्री सामन्त का सम्पूर्ण शोध इस महान ग्रं ...तक के लगभग 56 पृष्ठों का अंग्रेजी अनुवाद ने किया था जिसके कारण विश्व को इस ग्रन्थ में छिपी ज्ञान-सम्पदा का पता चला। ...३ KB (९९ शब्द) - ००:४६, १६ जून २०२०
- '''हस्तलक्षणदीपिका''' एक ग्रन्थ है जिसमें हस्तमुद्राओं के बारे में विशद वर्णन है। इसमे २४ मूल मुद्राएं बताय [[श्रेणी:संस्कृत ग्रन्थ]] ...२ KB (४ शब्द) - १०:५६, २३ सितम्बर २०१४
- == जयपुर पर इतिहास-सामग्री का ग्रन्थ == .../books?id=x6-1AAAAIAAJ |author=राम प्रसाद व्यास |publisher=राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी |page=४५१ |year=२००८ |access-date=28 जून 2014 |archive-url=https://w ...८ KB (३९४ शब्द) - ०८:०४, १६ जून २०२०
- इस ग्रन्थ में भास्कराचार्य ने अनेक विषयों की चर्चा की है जो संक्षेप में नीचे दिए गए ह इस ग्रन्थ मे निम्नलिखित उपविषय हैं- ...४ KB (६६ शब्द) - १२:५६, १५ जून २०२०
- ...यं कवि द्वारा प्रकाशित (निःशुल्क वितरण के लिए); दूसरा संस्करण : 'राष्ट्रिय संस्कृत संस्थान, जयपुर से/२०१०) </ref> जो [[जयपुर]] के नगर-सौंदर्य, दर्शनीय स्थानों १० फ़रवरी १९४७ को इस काव्य-ग्रन्थ[ [https://web.archive.org/web/20140724200859/https://hi.wikipedia.org/wiki/ ...९ KB (२२५ शब्द) - ०९:५७, ६ मई २०२१
- ...] में) या '''धर्मचक्रप्रवर्तनसूत्र''' ([[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] में) बौद्ध ग्रन्थ है जिसमें [[गौतम बुद्ध]] द्वारा ज्ञानप्राप्ति के बाद दिया गया प्रथम [[उपदेश धर्मचक्रप्रवतनसूत्र बीस से भी अधिक रूपों में उपलब्ध है, जिसमें [[पालि]], [[संस्कृत]], [[तिब्बती]] और [[चीनी]] रूप सम्मिलित हैं। ...२ KB (२२ शब्द) - ०८:३३, २० मार्च २०२१
- ...हत्वपूर्ण स्रोत है। यह [[दसम ग्रंथ|दसम ग्रन्थ]] का एक भाग है। दसम ग्रंथ ([[ग्रन्थ]]), गुरू गोबिन्द सिंह की कृतियों के संकलन का नाम है। ...ें अद्वितीय थे, वहीं वे स्वयं एक महान लेखक, मौलिक चिंतक तथा [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] सहित कई भाषाओं के ज्ञाता भी थे। उन्होंने स्वयं कई ग्रंथों की रचना की। वे ...४ KB (१६ शब्द) - १७:०९, ३१ जनवरी २०२१
- ...ूला''' के विषय में हैं। [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] साहित्य में [[सूत्र|सूत्र ग्रन्थों]] के लिये सम्बन्धित लेख देखें।'' * [[सूत्र|संस्कृत के सूत्र ग्रन्थ]] ...३ KB (५४ शब्द) - २३:१६, ५ मई २०२१
- ...= 8180312968, 9788180312960| page = २२९ }}</ref><ref>{{cite book | title =संस्कृत नाटको के हिंदी अनुवाद| author = देवेन्द्र कुमार | authorlink = | publisher ...३ KB (७८ शब्द) - १८:३८, ३० नवम्बर २०१८
- *... कि [[तत्त्वार्थसूत्र]] संस्कृत में लिखा गया प्रथम जैन ग्रन्थ हैं ...१ KB (० शब्द) - १२:१९, १७ जनवरी २०१६
- ...ुस्तकालयाध्यक्ष से आरम्भ करते हुए वे १९२३ से १९३७ तक [[वाराणसी]] के शासकीय संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य रहे। इस कालावधि में वे [[सरस्वती भवन ग्रंथमाला|सरस ...गहन अनुशीलन कर, दर्शन और इतिहास के क्षेत्र में जो अंशदान किया है उससे मानव-संस्कृति तथा साधना की अंतर्धाराओं पर नवीन प्रकाश पड़ा है; नयी दृष्टि मिली है। ...७ KB (६६ शब्द) - ०१:०२, १५ जून २०२०
- ...्वामी]] के विशालकाय ग्रन्थ [[सिंह-सिद्धांत-सिन्धु]] के अलावा कई महत्वपूर्ण संस्कृत ग्रंथों का संपादन [[राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान]] जोधपुर के माध्यम से ...१ KB (१२ शब्द) - १५:५७, ६ जून २०१७
- ...25 अगस्त 1636) पंजाबी लेखक, इतिहासकार, उपदेशक तथा धार्मिक नेता थे। [[गुरु ग्रन्थ साहिब]] का मूल लेखन उन्होने ही किया था। वे चार गुरुओं के साथी भी रहे। ...[फ़ारसी भाषा|फ़ारसी]] के प्रसिद्ध विद्वान थे। उन्होंने पंजाबी, ब्रजभाषा और संस्कृत में काव्य रचना की। पंजाबी में वह 'वारां भाई गुरदास' के लिये जाने जाते हैं। ...३ KB (३४ शब्द) - २०:१६, ११ दिसम्बर २०२०