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- |language = [[हिन्दी]], [[भोजपुरी भाषा|भोजपुरी]], [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] |notablework = कविता, कहानी, लेख, नाटक, समीक्षा आदि का अनियमित लेखन ...४ KB (९२ शब्द) - १३:१०, ९ जून २०२१
- ...माधव चाक्यार''' (15 फर्वरि 1899 - 14 जन्वरि 1991) केरला के प्राचीन संस्कृत नाटक परम्परा कुटियाट्टम के महान कलाकार थे। वो अपने सर्वश्रेश्ठ अभिनय तथा [[नाट्य ...१ KB (२४ शब्द) - १६:२३, १५ जून २०२०
- ...नदेव पन्त|publisher=मोतीलाल बनारसीदास|isbn=9788120826168|page=२९६|language=संस्कृत|access-date=18 अप्रैल 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140419 ...था। [[बौद्ध धर्म|बौद्ध]] भिक्षु को 'भई क्षपणक' कहा गया है। [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] के आर्वाचीन [[कोश]]कारों ने मागध अथवा स्तुतिपाठक के अर्थ में इस शब्द का प ...३ KB (४८ शब्द) - ०२:२६, ११ अगस्त २०२०
- ...प्रसिद्ध नाटककार एवं काव्यमीमांसक [[राजशेखर]] द्वारा रचित [[प्राकृत]] का [[नाटक]] ([[सट्टक]]) है। प्राकृत भाषा की विशुद्ध साहित्यिक रचनाओं में इस कृति का व ...के अनुसार सट्टक आदि से अंत तक प्राकृत भाषा में रचित होता है, न कि संस्कृत नाटकों के समान जिसमें केवल कुछ पात्र ही प्राकृत भाषा में रचित होता है। उसमें अद् ...५ KB (४७ शब्द) - १०:२३, १६ जून २०२०
- ...े स्थानों, उत्सवों आदि का विस्तार से वर्णन है। लीला सम्बन्धी एक प्रेमांकुर नाटक भी लिखा है। इन्होंने ब्रज के लुप्त तीर्थों के उद्धार, ब्रजयात्रा के प्रचार [[श्रेणी:संस्कृत]] ...३ KB (४ शब्द) - १३:०१, ६ मार्च २०२०
- '''प्राणचंद चौहान''' [[भक्ति काल|भक्तिकाल]] के [[कवि]] थे। 'रामायण महानाटक' उनकी प्रसिद्ध कृति है। इनके व्यक्तित्व पर पर्याप्त विवरण नहीं मिलता है।<re ...ं। इसी पिछली पद्धति पर संवत 1667 (सन् 1610ई.) में प्राणचंद चौहान रामायण महानाटक लिखा।<ref>{{cite book | title =रामचंद्र शुक्ल| author = विश्वनाथ प्रसाद तिव ...५ KB (१२४ शब्द) - ०५:०६, १२ मार्च २०२१
- [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] साहित्य के आचार्यों ने समूचे [[साहित्य]] को '''दृश्य काव्य''' और '''श्रव् (1) दृश्य काव्य में नाटक (रूपक और उपरूपक) हैं। ...७ KB (११४ शब्द) - ०७:५४, १४ अगस्त २०२०
- ...(वर्तमान [[डॉ॰ भीमराव आंबेडकर|डॉ. भीमराव आंबेडकर]] विश्वविद्यालय) से आपने संस्कृत कला अधिस्नातक परीक्षा में सफलता प्राप्त की। शिक्षण कार्य और अकादमिक प्रयासो ...ीश भानु प्रकाश शर्मा उनके छोटे भाई थे। आपके बड़े पुत्र [[दिवाकर शर्मा]] भी संस्कृत विद्वान थे और छोटे पुत्र गिरिजा शंकर शर्मा इतिहासकार और हिंदी तथा राजस्थानी ...१७ KB (७७ शब्द) - १९:५०, ८ जुलाई २०२१
- ...मेहता फतेहशंकर भट्ट [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी]] पढ़े-लिखे थे, फिर भी वे [[संस्कृत भाषा|संस्कृतनिष्ठ]] थे। उन्होंने [[बृज भाषा|ब्रजभाषा]] में [[कवित्त]], [[सव ...पश्चात् अपने पितामह पं. दुर्गाशंकर के संरक्षण में इटावा में रहने लगे। आपने संस्कृत, हिन्दी और अंग्रेजी की शिक्षा इटावा में प्राप्त की और सन् १९२३ में जीविका क ...९ KB (१०० शब्द) - ००:२८, २९ अगस्त २०२०
- ...थ साहिब]] को पूरा किया तथा उन्हें [[गुरु]] रूप में सुशोभित किया। [[बिचित्र नाटक]] को उनकी [[आत्मकथा]] माना जाता है। यही उनके जीवन के विषय में जानकारी का सब ...ें अद्वितीय थे, वहीं वे स्वयं एक महान लेखक, मौलिक चिंतक तथा [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] सहित कई भाषाओं के ज्ञाता भी थे। उन्होंने स्वयं कई ग्रंथों की रचना की। वे ...४ KB (१६ शब्द) - १७:०९, ३१ जनवरी २०२१
- ...कृत में लिखे हैं। बहुत से ग्रन्थ काल के गाल में समा गये किन्तु उसके बावजूद संस्कृत में रचित बौद्ध गर्न्थ विपुल मात्रा में मिलते हैं। ==संस्कृत में रचित कुछ प्रमुख बौद्धग्रन्थ== ...८ KB (४२९ शब्द) - १७:२४, ४ मार्च २०२०
- नाटकों में राजा के अवरोध का अधिकारी अधिकतर वृद्ध ही होता था जिससे अंतःपुर शुद्धा ...रियाँ ललित कलाएँ सीखती थीं। वहीं उनके लिए क्रीड़ा स्थल भी होता था। संस्कृत नाटकों में वर्णित अधिकतर प्रणय षड्यंत्र अंतःपुर में ही चलते थे। ...५ KB (३१ शब्द) - ०२:२०, १ मार्च २०२०
- ...महाकाव्यों की रचना की। [[भास]], [[कालिदास]] एवं अन्य कवियों ने संस्कृत में नाटक लिखे। ...ttps://web.archive.org/web/20190522122845/http://srijangatha.com/ साहित्य, संस्कृति और भाषा अंतराष्ट्रीय मंच सृजनगाथा] ...९ KB (३१६ शब्द) - १४:४२, १० जुलाई २०२१
- ...कुछ समय के लिए हमें दूर ले जा सके; जैसे जासूसी उपन्यास, संगीतात्मक सुखांत नाटक, चित्रपट आदि। किंतु यह अर्थ समझाने के पश्चात् शिपले न अपने अंगरेजी साहित्य === संस्कृत साहित्य === ...१० KB (२८ शब्द) - ०९:१९, १५ जून २०२०
- ...ल की देन है। आधुनिक काल से पहले आलोचना का स्वरुप प्रमुखतया [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] [[काव्यशास्त्र]] की पुनरावृति हुआ करती थी। लेकिन आज जो हिन्दी आलोचना का स ...ता पर विचार करने की आवश्यता के कारण जन्मी और विकसित हुई।” हिन्दी आलोचना भी संस्कृत काव्यशास्त्र की आधार-भूमि से जुड़कर भी स्वाभाविक रूप से रीतिवाद, [[साम्राज् ...८ KB (१४१ शब्द) - ००:३५, १६ जून २०२०
- ...ेतना के विकास के लिए नाटकों की रचना की इसलिए उस समय की सामाजिक समस्याओं को नाटकों में अभिव्यक्त होने का अच्छा अवसर मिला। ...न ही इनसे हिन्दी का रंगमंच निर्मित हुआ। इसी से भारतेन्दु हरिश्चन्द्र इनको 'नाटकाभास' कहते थे। उन्होंने इनकी [[पैरोडी]] के रूप में ‘[[बंदर सभा]]’ लिखी थी। ...३० KB (१५७ शब्द) - ०९:२२, ९ जून २०२१
- ...ेक उपभेद किए गए हैं। रूपक के दस भेद है; '''प्रहसन''' इन्हीं में से एक है - नाटक, प्रकरण, भाण, व्यायोग, समवकार, डिम, ईहामून, अंक, वीथी, '''प्रहसन'''। == संस्कृत साहित्य में प्रहसन == ...१० KB (५८ शब्द) - २३:४०, २२ सितम्बर २०२०
- ...१ : २) में काव्यरचना में रुचि रखनेवाले व्यक्तियों को निर्देश दिया है कि वे नाटक, शिल्पकौशल, सुंदर चित्र, मानवस्वभाव, समुद्र, नदी, पर्वत आदि विभिन्न स्थानों ...]] का पूरा काव्य संस्कृत के उपर्युक्त ग्रंथों से प्रभावित है और इस काल में संस्कृत ग्रंथों की मान्यताओं का परंपरा के रूप में अनुसरण भी किया गया है। आचार्य केश ...९ KB (१७ शब्द) - १६:१२, ५ मार्च २०२०
- ...नाटकों के क्षेत्र में। उन्होंने कम [[नाटक]] लिखे पर जो भी लिखे उसने हिंदी नाटकों को नई दिशा दी। पूर्व में [[मध्यप्रदेश साहित्य परिषद]] के सचिव एवं '[[साक् ...कारण इन्हें काफी कष्टों से गुज़रना पड़ा। इनकी आरंभिक शिक्षा [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] [[हिन्दी]] पाठशाला से आरंभ हुई। कक्षा छह में इनका दाखिला सरकारी विद्यालय ...११ KB (२३६ शब्द) - १०:५०, १५ जून २०२०
- ...ांत दर्शन के जाने माने अध्येता विद्वान, [[तन्त्र|तंत्र-विद्या]] के ज्ञाता, संस्कृत गद्य और पद्य के जाने-माने लेखक और आशुकवि थे। इनके पिता का नाम गोपीकृष्ण गोस ...य अथवा पद्य रचना लिखवाते थे। सन १९४५ से 1979 तक इनकी रचनाएँ देश की विभिन्न संस्कृत पत्रिकाओं में छपती रहीं। ...१७ KB (२०५ शब्द) - ०१:०९, १५ जून २०२०