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- '''कर्पूरमंजरी''' [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] के प्रसिद्ध नाटककार एवं काव्यमीमांसक [[राजशेखर]] द्वारा रचित [[प्राकृत]] का [[नाटक]] ([[सट्टक]] ...यदर्पण]] के अनुसार सट्टक आदि से अंत तक प्राकृत भाषा में रचित होता है, न कि संस्कृत नाटकों के समान जिसमें केवल कुछ पात्र ही प्राकृत भाषा में रचित होता है। उसमे ...५ KB (४७ शब्द) - १०:२३, १६ जून २०२०
- == संस्कृत साहित्य में प्रहसन == ...ध्यम से संस्कृत नाटकों में हास्य की सृष्टि अवश्य होती रही। संस्कृत भाषा के नाटककार [[वत्सराज]] द्वारा रचित प्रहसन '[[हास्यचूड़ामणि]]' इसका एक उदाहरण है। ...१० KB (५८ शब्द) - २३:४०, २२ सितम्बर २०२०
- ...873]]) जन्म से मधुसुदन दत्त, [[बाङ्ला भाषा|बंगला भाषा]] के प्रख्यात कवि और नाटककार थे। नाटक रचना के क्षेत्र मे वे प्रमुख अगुआई थे। उनकी प्रमुख रचनाओ मे मेघनाद ...अँगरेजी के साथ-साथ अनेक यूरोपीय भाषाओं का गहन अध्ययन किया। [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] तथा [[तेलुगू भाषा|तेलुगु]] पर भी उनका अच्छा अधिकार था। ...६ KB (११ शब्द) - १५:१६, ८ मार्च २०२०
- ...(वर्तमान [[डॉ॰ भीमराव आंबेडकर|डॉ. भीमराव आंबेडकर]] विश्वविद्यालय) से आपने संस्कृत कला अधिस्नातक परीक्षा में सफलता प्राप्त की। शिक्षण कार्य और अकादमिक प्रयासो ...ीश भानु प्रकाश शर्मा उनके छोटे भाई थे। आपके बड़े पुत्र [[दिवाकर शर्मा]] भी संस्कृत विद्वान थे और छोटे पुत्र गिरिजा शंकर शर्मा इतिहासकार और हिंदी तथा राजस्थानी ...१७ KB (७७ शब्द) - १९:५०, ८ जुलाई २०२१
- | occupation = हिन्दी साहित्यकार, आलोचक तथा नाटककार ...रभाकर श्रोत्रिय''' (जन्म १९ दिसम्बर १९३८) [[हिन्दी]] साहित्यकार, आलोचक तथा नाटककार हैं। हिंदी आलोचना में प्रभाकर श्रोत्रिय एक महत्वपूर्ण नाम है पर आलोचना से प ...११ KB (२३६ शब्द) - १०:५०, १५ जून २०२०
- ...क व्यापार होना चाहिए। उपसंहार में मंगल ही दिखाया जाना चाहिए। वियोगांत नाटक संस्कृत [[काव्यशास्त्र|अलंकार शास्त्र]] के विरुद्ध है। ...े 'विरह उपस्थित' ऐसी प्रतीत होता है और एक प्रकार का चमत्कार मालूम होता है। संस्कृत साहित्य में नाटक संबंधी ऐसे ही अनेक कौशलों की उद्भावना की गई है और अनेक प्र ...५० KB (२५६ शब्द) - १२:०७, १३ अगस्त २०२१
- ...रतेन्दु हरिश्चंद्र]] से माना जाता है। उस काल के भारतेन्दु तथा उनके समकालीन नाटककारों ने लोक चेतना के विकास के लिए नाटकों की रचना की इसलिए उस समय की सामाजिक सम ...परेखा बनी थी, प्रचार और प्रसार का जो काम हुआ था तथा इनके कारण जो कुछ अच्छे नाटककार हिन्दी को मिले थे-उस अवसर और परिस्थिति का लाभ नहीं उठाया जा सका था। ...३० KB (१५७ शब्द) - ०९:२२, ९ जून २०२१
- भारत के अन्य विद्वानों की तरह बंगाल के भी विद्वान् [[संस्कृत]] की रचनाओं को ही विशेष महत्त्व देते थे। उनकी दृष्टि में वही "अमर भारती" का ...मान्य बाहरी अर्थ तो प्राय: यों ही समझ में आ जाता है और गूढ़ अर्थ भी साथ की संस्कृत टीका की सहायता से, जो इस संग्रह के साथ ही श्री हरप्रसाद शास्त्री को प्राप्त ...६९ KB (१५९ शब्द) - १०:०९, ६ मई २०२१
- ...ो में केवल भोजराज ने इन दोनो अभिनय को अपने काव्यशास्त्र में स्थान दिया है।(संस्कृत नाट्यकोश ,भाग-2,पृ-31 ...वह रंगशाला के व्यावहारिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर अपनी प्रतिभा के बल से नाटककार की भावना का उचित और स्पष्ट संरक्षण करता हुआ नाटक का प्रवाह और प्रभाव बनाए र ...४१ KB (६६ शब्द) - ०९:२७, ६ मई २०२१
- ...िया', "गोरखाली" या 'खस-कुरा' (खस ([[संस्कृत भाषा|संस्कृत]]: कश्यप ; कुराउ, संस्कृत : काकली) भी कहते थे। ...्थी के लिए "यात", षष्ठी के लिए "यागु", सप्तमी के लिए "या" प्रत्यय इत्यादि। संस्कृत शब्दों के नेवारी [[तद्भव]] बना लेने की इस भाषा में अप्रतिम क्षमता है। कभी क ...४७ KB (३१६ शब्द) - १०:०६, ६ मई २०२१
- ...ाल युग की सन्धि पर खड़ा है। उन्होंने [[रीति काल|रीतिकाल]] की विकृत सामन्ती संस्कृति की पोषक वृत्तियों को छोड़कर स्वस्थ परम्परा की भूमि अपनाई और नवीनता के बीज ...नी' पत्रिकाओं का संपादन भी किया। वे एक उत्कृष्ट कवि, सशक्त व्यंग्यकार, सफल नाटककार, जागरूक पत्रकार तथा ओजस्वी गद्यकार थे। इसके अलावा वे लेखक, कवि, संपादक, निब ...६२ KB (७०० शब्द) - १८:०६, २ मई २०२१
- | occupation = [[कवि]], [[लेखक]], [[नाटककार]], [[अनुवादक]] ...पाली (बहुविकल्पी)|नेपाली]], [[हिन्दी]] और [[पुराण|पौराणिक]] [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] साहित्य से भरपुर दादाजी का पुस्तकालय के कारण वो छोटी सी उम्र से ही [[साहि ...६४ KB (४,८४१ शब्द) - ०७:१७, ५ दिसम्बर २०२०
- ...गाया जाता है। बाद में कोणाँगीदा सर नामक विदूषक रंगमंच में प्रवेश करता है। नाटककार की विशेषताएँ और नाटक का लक्ष्य ओरडिसिंधु (एकाक्षर छंद) में गाए जाते हैं। ...। तमिल महाकाव्यों में श्रेष्ठ शिलप्पधिकारम् में भी इस नृत्य का उल्लेख है। संस्कृत नाटकों का अंश कूडियाट्टम से अभिनयादि विशेष अंग कथकली में लिया गया है। शाक्य ...३२ KB (२७ शब्द) - ०७:५०, १६ जून २०२१
- ...्य रचे हैं। आपने विविध विषयवस्तु वाली ७५ पुस्तकें रची हैं, जिन्होंने हमारी संस्कृति, धरोहर और परम्पराओं पर छाप छोड़ी है और जिन्हें सम्मान प्राप्त हुआ है। आपने ...त्रयी]] ([[ब्रह्मसूत्र]], [[भगवद्गीता]] और प्रधान [[उपनिषद्|उपनिषदों]]) पर संस्कृत भाष्य सम्मिलित हैं।<ref name="dinkarbiblio">दिनकर २००८, पृष्ठ ४०–४३।</ref> ...१४५ KB (३,८८३ शब्द) - २१:२१, २७ अगस्त २०२१