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"हिन्दू धर्म का स्वामीनारायण संप्रदाय" के परिणाम खोजें - भारतपीडिया

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देखें (पिछले २० | ) (२० | ५० | १०० | २५० | ५००)
  • ...की पर रख दिया जाता है, इसे ही [[नैवेद्य]] तथा भक्ति निवेदित की जाती है। इस संप्रदाय में [[दीक्षा]] की व्यवस्था नहीं है। ...कहते हैं। इस धर्म का मूल मंत्र है -''एक देव, एक सेव, एक बिने नाइ केव''। इस धर्म में कोई जाति-भेद ऊँच-नीच, धनी-दुखिया का भेद नहीं है। ...
    २ KB (१६ शब्द) - ०९:५७, ६ मई २०२१
  • 'स्वयं भगवान' शब्द का प्रयोग प्रायः [[गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय|गौडीय वैष्णव सम्प्रदाय]] के लोग अधिक करते हैं। [[श्रेणी:हिन्दू धर्म]] ...
    ९८९ बाइट (६ शब्द) - ०४:५४, ३ मार्च २०२०
  • ...ंत्र दीक्षा परंपरा से इन संप्रदायों का प्रवर्तन हुआ है। वर्तमान में ये सभी संप्रदाय अपने प्रमुख आचार्यो के नाम से जाने जाते हैं। यह सभी प्रमुख आचार्य दक्षिण भा ...कुमार संप्रदाय''' जिसके आद्य प्रवर्तक सनतकुमार गण और प्रमुख आचार्य निम्बार्काचार्य हुए जो वर्तमान में '''निम्बार्कसम्प्रदाय''' के नाम से जाना जाता है। ...
    ७ KB (१३७ शब्द) - १३:३३, १६ जून २०२१
  • [[चित्र:Shree Swaminarayan Sampraday, Ahmedabad.jpg|right|170px|thumb|श्री स्वामीनारायण मन्दिर, [[अहमदाबाद]]]] '''स्वामीनारायण सम्प्रदाय''' (पूर्वा नाम: उद्धव सम्प्रदाय) [[ ...
    ४ KB (४१ शब्द) - १५:२६, ३ मार्च २०२०
  • ...िसका स्मरण गूदरपंथी और नाथ जोगी साधु, घर-घर भिक्षा मांगते समय, 'अलख अलख' पुकार का दिलाया करते हैं। * (२) नाथपंथी जोगियों का वह गीत जो भिक्षा मांगते समय, प्राय: चिकारों पर गाया जाता है और जिसमें अधिकतर [[गोपीचंद]], [[भरथरी]], [[गोरक्षनाथ|गोर ...
    ३ KB (२५ शब्द) - ११:००, ३ मार्च २०१७
  • ...को लोकभाषा में [[धर्म]] के मर्म की बात समझाकर, एक सूत्र में पिरोने में इस संप्रदाय से जुड़े लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ...एवं ग्राह्य था। आगे चलकर मानवीय मूल्यों से सम्पन्न इसी धर्म को "रामस्नेही संप्रदाय' की संज्ञा से अभिहित किया गया। ...
    ५ KB (६१ शब्द) - २१:४७, २७ अगस्त २०२१
  • [[चित्र:DevelopmentofShaivism.jpg|right|thumb|300px|शैव परम्परा के अन्तर्गत कापालिक सम्प्रदाय का स्थान]] ...थ हैं, इस कारण इन्हें लकुटीश कहते हैं। डॉ॰ रा.गो. भंडारकर के अनुसार पाशुपत संप्रदाय की उत्पत्ति का समय ई.पू. दूसरी शताब्दी है। ...
    ८ KB (२० शब्द) - ००:२८, १२ मार्च २०२०
  • ...के चार सम्प्रदाय बतलाए गए हैं: (i) शैव (ii) [[पाशुपत]] (iii) कालदमन (iv) [[कापालिक]]। शैवमत का मूलरूप [[ॠग्वेद]] में [[रुद्र]] की आराधना में हैं।<ref>ext ;शैव धर्म से जुड़ी महत्‍वपूर्ण जानकारी और तथ्‍य: ...
    १० KB (९७ शब्द) - १४:१९, ११ अगस्त २०२१
  • '''[[ईसाई धर्म]]'''; में लगभग 2.4 अरब अनुयायी हैं, जो कि लगभग 7.2 अरब लोगों में से करता है और विश्व में सबसे बड़ा धर्म है, जिसमें कैथोलिक ...
    ६ KB (२१० शब्द) - १९:४६, ४ अगस्त २०२०
  • ...वर्ग है। दीक्षा के समय [[कान]] छिदवाकर उसमें मुद्रा या कुंडल धारण करने के कारण इन्हें कनफटा कहते हैं। मुद्रा अथवा कुंडल को दर्शन और पवित्री भी कहते हैं। [[नाथ सम्प्रदाय|नाथयोगी संप्रदाय]] में ऐसे योगी, जो कान नहीं छिदवाते और कुंडल धारण नहीं करते, [[औघड़]] कहलाते हैं। औघड़ [[जालंधरना ...
    ५ KB (१४ शब्द) - १७:१५, २९ फ़रवरी २०२०
  • ...्रदाय|शाक्त संप्रदा]] के अनुसार यह शक्ति मूल रूप में निर्गुण है, परंतु निराकार परमेश्वर जो न स्त्री है न पुरुष, ने जब [[सृष्टि रचना|सृष्टि की रचना]] करनी ...ही आदि शक्ति का सगुण स्वरूप मानते है [[सिख धर्म|सिख]] कॉम [[आदि शक्ति (सिख धर्म)|शक्ति]] को [[निर्गुण ब्रह्म|निर्गुण]] ही मानते है उनके एकोर्डिंग [[चण्डी|च ...
    ३ KB (२३ शब्द) - ०१:०३, २२ अगस्त २०२१
  • मध्यकाल से उत्तरीय भारत में [[भक्तिमार्ग]] के दो भिन्न संप्रदाय हो गए थे। एक ईश्वर के निर्गुण, निराकर रूप का ध्यान करता हुआ [[मोक्ष]] की प् [[श्रेणी:हिन्दू धर्म]] ...
    २ KB (४ शब्द) - ०७:१८, २२ अगस्त २०१९
  • [[चित्र:Unidentified_Object_of_unknown_date_(FindID_383665).jpg|अंगूठाकार|347x347पिक्सेल|[[शिवलिंग]] का निचला हिस्सा पराशक्ति का प्रतिनिधित्व करता ...्रदाय में से एक है। [[परशिव]] के विपरीत पराशक्ति का आकार है ([[परशिव]] निराकार है)।<ref>{{Cite book|url=https://www.himalayanacademy.com/media/books/danc ...
    ४ KB (२८४ शब्द) - ०६:२०, १९ सितम्बर २०२०
  • [[चित्र:Buddhist child 07.jpg|अंगूठाकार|मठ]] ...ठ में इन कार्यो के अतिरिक्त सामाजिक सेवा, [[साहित्य]] इत्यादि से सम्बन्धित कार्य भी होते हैं। ...
    १० KB (८७ शब्द) - ००:५५, ३ फ़रवरी २०२१
  • [[चित्र:Palkhi 2008.jpg|अंगूठाकार|300px|right|[[आलन्दी]] से [[पंढरपुर]] की यात्रा पर निकला एक वारकरी। इनके क भगवान श्री [[विट्ठल]] के भक्त को '''वारकरी''' कहते हैं तथा इस [[संप्रदाय]] को '''वारकरी सम्प्रदाय''' कहा जाता है। <ref>{{Cite web |url=https://www.h ...
    २ KB (५४ शब्द) - १२:४९, २८ जून २०२१
  • ...वर्ष रातभर के लिए एक लाख से अधिक लोग (सफा संप्रदाय के अनुयायी) आते हैं। इस संप्रदाय को बाबा चंदर दास ने बनाया था। बौंसी में लगनेवाले प्राचीन बौंसी मेले को अब ' ...र्ग पर स्थित [[बिहार ]]राज्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस मेले का इतिहास काफी पुराना है इसमें आदिवासी और गैर-आदिवासी बड़े पैमाने पर मिलजुल कर मेले का आ ...
    १२ KB (३८ शब्द) - २१:५६, १४ मई २०२०
  • [[चित्र:Avatars.jpg|right|thumb|250px|हिन्दू धर्म में [[गौतम बुद्ध]] को [[विष्णु]] के दस [[अवतार|अवतारों]] में से एक माना जात ...ध]] को [[दशावतार|दसवाँ अवतार]] माना गया है हालाँकि बौद्ध धर्म इस मत को स्वीकार नहीं करता। ...
    १३ KB (३२३ शब्द) - २३:३५, २० जुलाई २०२१
  • ...]] तथा अन्य राज्य राज्य सरकारों ने "[[नवबौद्ध]]" नामक संज्ञा दी हैं। नवयान संप्रदाय [[महायान]], [[थेरवाद]] और [[वज्रयान]] आदी कुछ मामलों में भिन्न हैं। 2011 के ...ंत ही होंगे, कोई भी कुरीतियों या अंधविश्वास नहीं होंगा। यह एक ‘शुद्ध बौद्ध धर्म’ होंगा।’’ पत्रकार ने फिर पूछां, “क्या हम इसे 'भीमयान' कह सकते हैं?” आम्बेडक ...
    १३ KB (१२५ शब्द) - १६:२०, १५ अप्रैल २०२१
  • ...य]] के उन्नायक, हिन्दी के सुपरिचित कवि, उत्तर भारत में हिन्दू संस्कृति एवं धर्म के महान् रक्षक योगी [[गोरखनाथ]] के बड़े भक्त ही नहीं, वरन् स्वयं हिन्दी के :''शिव में अंश शिवासन कावे, सिद्धि महा बनि आये।। बाबा 1 ।। ...
    ७ KB (१३८ शब्द) - १०:०६, २१ अगस्त २०२१
  • [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] के महान रचनाकार '''[[दण्डी]]''' के लिये उस पृष्ठ पर जाँय। ...ा मुख्य लक्ष्य हो गया। भारत के पवित्र माने जानेवाले तीर्थों और नगरों, जैसे काशी में आज भी अनेक दंडी आरमों, मुमुक्षु भवनों में अथवा पाठशालाओं और घाटों पर ...
    ५ KB (१५ शब्द) - २२:४३, ९ मई २०२१
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