सामग्री पर जाएँ

चित्र:Keralolpatti The origin of Malabar 1868.djvu

भारतपीडिया से

Keralolpatti_The_origin_of_Malabar_1868.djvu (फ़ाइल का आकार: २३.४३ MB, MIME प्रकार: image/vnd.djvu)

चेतावनी: इस फ़ाइल प्रकार में हानिकारक कोड हो सकता है। संभव है कि इसे चलाने से आपका सिस्टम हैक हो जाए।

यह फ़ाइल एक साझे भंडार से है और दूसरे परियोजनाओं द्वारा भी प्रयोग की जा सकती है। वहाँ पर इसका फ़ाइल विवरण पृष्ठ में मौजूद विवरण नीचे दिखाया गया है।

सारांश

विवरणKeralolpatti The origin of Malabar 1868.djvu
English: The Keralolpathi (literally creation of Kerala) is a Malayalam work that deals with the origin of the land of Kerala. Shungunny Menon ascribes the authorship of this work to Thunchaththu Ramanujan Ezhuthachan, a 17th century scholar of the Malabar region of India. The Keralolpathi is mostly an expansion from an earlier Sanskrit work known as the Kerala Mahatmayam. That work is classed among the Hindu Puranas as an Upa Purana (or sub Purana) of the Bhoogola Purana.
മലയാളം: കേരളത്തിന്റെ പ്രാചീനചരിത്രമെന്നോണം ധാരാളം ഐതിഹ്യങ്ങളും കേട്ടുകേൾവികളും ഉൾച്ചേർത്തു് വിവരിക്കുന്ന ഒരു പ്രാചീനഗ്രന്ഥമാണു് കേരളോല്പത്തി. സംസ്കൃതത്തിൽ രചിക്കപ്പെട്ട കേരളമാഹാത്മ്യം മുതലായ ഐതിഹ്യഗ്രന്ഥങ്ങളെ പിന്തുടർന്നുകൊണ്ടു് കേരളചരിത്രത്തിനെക്കുറിച്ചുള്ള ഐതിഹ്യങ്ങൾ കൃത്യമായ ദേശകാലക്രമമില്ലാതെ അലക്ഷ്യമായി കുത്തിക്കെട്ടിയ ഒരു സംഗ്രഹമാണു് ഈ കൃതി.
स्रोत https://books.google.com/ebooks?id=i2M-AAAAcAAJ&num=14
लेखक Hermann Gundert


लाइसेंस

Public domainPublic domainfalsefalse
Public domain
यह कार्य भारत में सार्वजनिक डोमेन में है क्योंकि इसका कॉपीराइट समाप्त हो चुका है।

भारतीय प्रतिलिप्याधिकार अधिनियम, पहली बार भारत में प्रकाशित कार्यों पर लागू होता है। 2012 के अधिनियम क्रमांक 27 तक संशोधित भारतीय प्रतिलिप्याधिकार अधिनियम, 1957 (अध्याय V, धारा 25) के अनुसार:

  • गुमनाम कार्य, फ़ोटोग्राफ़, चलचित्र, ध्वनि रिकॉर्डिंग, सरकारी कार्य, तथा कॉर्पोरेट लेखकत्व या अंतर्राष्ट्रीय संगठनों केे कार्य, उनके पहली बार प्रकाशित होने की तिथि से 60 वर्ष बाद सार्वजनिक डोमेन में आ जाते हैं, जिसकी गणना पंचांग के अगले वर्ष के आरंभ से की जाती है (अर्थात 2026 तक, 1 जनवरी 1966 से पहले प्रकाशित कार्य सार्वजनिक डोमेन में माने गए हैं)।
  • मरणोपरांत प्रकाशित कार्य (उपरोक्त के अलावा), प्रकाशन की तिथि से 60 वर्ष बाद सार्वजनिक डोमेन में आ जाते हैं, जिसकी गणना पंचांग के अगले वर्ष के आरंभ से की जाती है।
  • उपरोक्त के अलावा सभी प्रकार के कार्य, लेखक की (या फिर बहु-लेखकीय कार्यों के मामले में अंतिम जीवित लेखक की) मृत्यु के 60 वर्ष बाद सार्वजनिक डोमेन में आ जाते हैं, जिसकी गणना पंचांग के अगले वर्ष के आरंभ से की जाती है।
  • कानून, अदालती राय, और दूसरे सरकारी रिपोर्ट्स का टेक्स्ट कॉपीराइट से मुक्त होता है।
भारतीय प्रतिलिप्याधिकार अधिनियम, 1957 पूर्वव्यापी नहीं है, तो इसके लागू होने के समय जिन कार्यों पर कॉपीराइट मौजूद नहीं था, उनपर कॉपीराइट पुनर्स्थापित नहीं कर दिया गया था, यानी वे कार्य प्रतिलिप्याधिकार अधिनियम 1911 के अधीन सार्वजनिक डोमेन में हैं।

You must also include a United States public domain tag to indicate why this work is in the public domain in the United States.

العربية  বাংলা  Deutsch  English  français  हिन्दी  italiano  日本語  ಕನ್ನಡ  македонски  മലയാളം  मराठी  Nederlands  português do Brasil  sicilianu  தமிழ்  ತುಳು  తెలుగు  اردو  中文(繁體)  +/−

फ़ाइल का इतिहास

फ़ाइल पुराने समय में कैसी दिखती थी यह जानने के लिए दिनांक/समय पर क्लिक करें।

दिनांक/समयआकारसदस्यटिप्पणी
वर्तमान१८:५०, ३ फ़रवरी २०१२ (२३.४३ MB)smartcommons>Manojk{{Information | Description = {{en|The Keralolpathi (literally creation of Kerala) is a Malayalam work that deals with the origin of the land of Kerala. Shungunny Menon ascribes the authorship of this work to Thunchaththu Ramanujan Ezhuthachan, a 17th

कोई भी ऐसा पृष्ठ नहीं है जो इस चित्र का प्रयोग कर रहा हो।