पान
पान (वानस्पतिक नाम: Piper betle) एक बहुवर्षीय लता (बेल) है, जिसकी पत्तियों का उपयोग दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में परंपरागत रूप से चबाने योग्य मिश्रण (पान) के रूप में किया जाता है। यह पाइपरेसी (Piperaceae) कुल के अंतर्गत आता है और इसका निकट संबंध काली मिर्च (Piper nigrum) से है।
नामकरण और वानस्पतिक विवरण[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
पान को संस्कृत साहित्य में ताम्बूल और नागवल्ली कहा गया है। यह एक चढ़ने वाली लता है, जिसकी पत्तियाँ हृदयाकार, चिकनी, चमकदार और हरे रंग की होती हैं। पौधे को बढ़ने के लिए सहारे (आधार) की आवश्यकता होती है और यह नम, छायादार तथा उष्ण जलवायु में अच्छी तरह विकसित होता है।
उत्पादन और कृषि[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
पान की खेती मुख्यतः भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, म्यांमार तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देशों में की जाती है। भारत में इसकी खेती मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक के कुछ क्षेत्रों में होती है। पान की खेती के लिए उपजाऊ, जल निकास वाली मिट्टी और पर्याप्त सिंचाई आवश्यक मानी जाती है। अधिकांश क्षेत्रों में इसे "पान बाड़ी" या विशेष छाया-संरचनाओं में उगाया जाता है।
उपयोग[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
पान की पत्तियों का उपयोग परंपरागत रूप से ताम्बूल के रूप में किया जाता है, जिसमें पत्ती के साथ सुपारी, चूना, कत्था और कभी-कभी तम्बाकू भी रखा जाता है। धार्मिक और सामाजिक अवसरों पर पान को शुभ माना जाता है और विवाह, पूजा तथा अतिथि-सत्कार में इसका स्थान है। आयुर्वेदिक परंपरा में इसकी पत्तियों का उपयोग विभिन्न औषधीय प्रयोजनों में उल्लिखित है, यद्यपि इनके चिकित्सकीय लाभों के संबंध में वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं।
स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
पान के साथ सुपारी, तम्बाकू और चूने का सेवन मौखिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है। सुपारी और तम्बाकू युक्त पान के सेवन को मुँह के कैंसर तथा अन्य मौखिक रोगों के जोखिम से जोड़ा गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी (IARC) ने सुपारी और तम्बाकू युक्त पान को कैंसरकारी श्रेणी में वर्गीकृत किया है। इस कारण अनेक देशों में तम्बाकू युक्त पान के सेवन पर सार्वजनिक स्वास्थ्य नियम लागू हैं।
सांस्कृतिक महत्व[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
भारतीय उपमहाद्वीप में पान को सामाजिक मेल-मिलाप और आतिथ्य का प्रतीक माना जाता है। लोकगीतों, साहित्य और लोकाचार में पान का उल्लेख मिलता है। विवाह के अवसर पर वर-वधू के परिवारों के बीच पान का आदान-प्रदान परंपरागत रीति है। दक्षिण भारत में इसे "ताम्बूलम्" कहा जाता है और धार्मिक अनुष्ठानों में इसका विशेष स्थान है।