बुरुली अल्सर
साँचा:Infobox disease बुरुली अल्सर (जिसे बार्न्सडेल अल्सर, सियर्ल्स अल्सर, या डेनट्री अल्सर भी कहा जाता है[१][२][३]) एक संक्रामक रोग है जो माइकोबैक्टीरियम अल्सेरांस के कारण होता है।[४] इस संक्रमण की शुरुआती अवस्था में दर्दरहित गाँठ या सूजन देखने को मिलती है।[४] यह गाँठ अल्सर में बदल सकती है।[४] यह अल्सर जितना त्वचा पर दिखाई पड़ता है उसकी तुलना में अंदर कहीं अधिक बड़ा हो सकता है,[५] और इसके चारों ओर सूजन हो सकती है।[५] जैसे-जैसे यह बीमारी बिगड़ती जाती है, इससे हड्डी भी प्रभावित हो सकती है।[४] बुरुली अल्सर आमतौर पर हाथ या पाँवों पर होते हैं;[४] कभी-कभार बुखार भी आ सकता है।[४]
कारण[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
M. ulcerans (एम. अल्सेरांस) माइकोलैक्टोन नामक एक विषैला पदार्थ निकालता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली की कार्यक्षमता को कमजोर करता है और इसीके चलते ऊतकों की मृत्यु होती है।[४] इसी वर्ग के बैक्टीरिया के चलते ये रोग भी होते हैं - टीबी यानी क्षय रोग और कुष्ठ रोग (M. tuberculosis और M. leprae, क्रमश:)।[४] रोग का फैलाव कैसे होता है, यह अभी नहीं पता चला है।[४] लेकिन इस फैलाव में जलस्रोतों की भूमिका हो सकती है।[५] इसके लिए 2013 तक किसी कारगर वैक्सीन यानी टीके की खोज नहीं हो पाई है। [४][६]
इलाज[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
यदि लोगों को ज़ल्दी इलाज मिल जाए तो एंटीबायटिक का आठ सप्ताह तक का सेवन 80% तक प्रभावी होता है।[४] इस रोग के उपचार में अक्सर रिफाम्पिसिन और स्ट्रेप्टोमाइसिन का प्रयोग होता है।[४] कभी-कभार स्ट्रेप्टोमाइसिन के स्थान पर क्लेरिथ्रोमाइसिन या मॉक्सीफ्लॉक्सासिन का प्रयोग होता है।[४] इसके उपचार में अल्सर को काटकर फेंक देना भी शामिल हो सकता है।[४][७] जब घाव भर जाता है तो उस जगह पर आमतौर पर निशान रह जाता है।[६]
व्यापकता[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
बुरुली अल्सर अधिकांशतया ग्रामीण उप-सहारा अफ्रीका में, और ख़ासतौर से आइवरी कोस्ट में, अधिक होता है लेकिन यह एशिया, पश्चिमी प्रशांत और अमेरिका में भी हो सकता है।[४] 32 से अधिक देशों में इसके मामले देखने को मिले हैं।[५] हर वर्ष पाँच से छह हजार मामले प्रकाश में आते हैं।[४] यह रोग इंसानों के अलावा कई पशुओं में भी होता है।[४] अल्बर्ट रस्किन कुक पहले व्यक्ति थे जिन्होंने 1897 में बुरुली अल्सर रोग की व्याख्या की थी।[५]