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लालेह बख्तियार

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लालेह बख्तियार (जन्म 29 जुलाई, 1938; इंग्लिश: Laleh Bakhtiar), ईरानी-अमेरिकन मुस्लिम लेखिका, अनुवादक और मनोवैज्ञानिक, कुरआन का इंग्लिश में अनुवाद करने वाली पहली अमेरिकी महिला हैं। [] []

परिचय [सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

लालेह मेहरी बख्तियार का जन्म 29 जुलाई, 1938[] को अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में अमेरिकी मां और ईरानी पिता के घर हुआ था।
उन्होंने लॉस एंजिल्स और वाशिंगटन डीसी में अपना बचपन बिताया। उनका पालन-पोषण कैथोलिक चर्च में हुआ था।
24 साल की उम्र में, वह अपने पति और तीन बच्चों के साथ ईरान चली गईं, जहाँ उन्होंने तेहरान विश्वविद्यालय में पढ़ाई की।
तेहरान यूनिवर्सिटी में सैयद हुसैन नस्र की देखरेख में इस्लाम का अध्ययन किया। उन्होंने 1964 में क़ुरआन अरबी का अध्ययन किया और इस्लाम धर्म अपना लिया।
1976 में तलाक लिया।
1988 में संयुक्त राज्य अमेरिका लौट आई। उसने चाथम कॉलेज, पेंसिल्वेनिया से इतिहास में बीए किया। उसने दर्शनशास्त्र में एमए और परामर्श मनोविज्ञान में एमए किया। उन्होंने शैक्षिक नींव में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है।
वह राष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित काउंसलर भी हैं। पारंपरिक मनोविज्ञान और विद्वान संस्थान की अध्यक्ष भी हैं।

लेखन कार्य [सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

लाला मेहरी बख्तियार की इस्लाम पर उनकी लिखी और अनुवादित पुस्तकों की कुल संख्या 25 है। उनकी अधिकांश पुस्तकें सूफीवाद से संबंधित या इस्लाम में महिलाओ की स्थिति पर केंद्रित हैं। [] उन्होंने सह-लेखक या सह-लेखक के रूप में कई आत्मकथाएँ भी लिखी हैं।
उन्होंने क़ुरआन का अनुवाद भी किया है, जिसे 2007 में द सबलाइम क़ुरआन (The Sublime Quran: The misinterpretation) के रूप में प्रकाशित किया गया था। ये कार्य उनकी पहचान बन गया।
वह कुरआन का अंग्रेजी में अनुवाद करने वाली पहली अमेरिकी महिला हैं। क़ुरआन के अपने अनुवाद में, उन्होंने पारंपरिक काफिरों या विश्वास नहीं करने वाले लोगों के बजाय काफिरों को कृतघ्न (अधन्यवादी, नाशुक्रे) के रूप में अनुवादित किया है।
वह अपने अनुवादों में अल्लाह और मरियम शब्दों के बजाय अंग्रेजी शब्दों गॉड और मैरी का उपयोग करती है। उनका अनुवाद गेर मुस्लिम की भावनाओं का खयाल रख कर किया गया है। [] [] []

बाहरी कड़ियाँ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

सन्दर्भ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

इन्हें भी देखें[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

  1. John Colson, Symposium focuses on Muslim women Archived 2007-09-04 at Web Archive Aspen Times, August 15, 2007
  2. "A Bridge Between Two Cultures".[१]Retrieved 13 जुलाई 2020.
  3. "Biography of Laleh Bakhtiar".[२]Retrieved 13 जुलाई 2020.
  4. "How Islam Confirms Women’s Rights".[३]Retrieved 13 जुलाई 2020.
  5. Andrea Useem, Laleh Bakhtiar: An American Woman Translates the Qur'an Archived 31 दिसंबर 2010 at Web Archive Publishers Weekly, April 16, 2007
  6. Neil MacFarquhar, New Translation Prompts Debate on Islamic Verse, New York Times, March 25, 2007
  7. "Disobedient Muslim Women".[४]Retrieved 13 जुलाई 2020.