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==पुस्तक के बारे में== इस [[पुस्तक]] में कमलेश डी. पटेल , जो ‘दाजी’ के नाम से जाने जाते हैं और हार्टफुलनेस वंश परंपरा के चौथे गुरु हैं-<ref>{{cite web|title=How I start my day|url=https://timesofindia.indiatimes.com/life-style/health-fitness/de-stress/how-i-start-my-day/articleshow/64778683.cms|publisher=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]]|language=अंग्रेज़ी|accessdate=|archive-url=https://web.archive.org/web/20180829151919/https://timesofindia.indiatimes.com/life-style/health-fitness/de-stress/how-i-start-my-day/articleshow/64778683.cms|archive-date=29 अगस्त 2018|url-status=live}}</ref> वे [[अध्यात्मवाद|आध्यात्मिक]] खोज की प्रकृति का अध्ययन करते हुए एक जिज्ञासु की यात्रा का वर्णन करते हैं| एक गुरु एवं शिष्य के बीच हुए वार्तालाप की शृंखला द्वारा दाजी, हार्टफुलनेस अभ्यास के सिद्धांतों एवं दर्शन का जोशुआ पोलॉक के समक्ष खुलासा करते हैं, जो एक हार्टफुलनेस अभ्यासी एवं प्रशिक्षक हैं|<ref>{{cite web|title=सुरेश प्रभु ने “द हार्टफुलनेस वे” किताब का अनावरण किया!|url=https://hindi.siasat.com/news/%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AD%E0%A5%81-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%A6-%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%AB%E0%A5%81-913621/|publisher=सिआसत|accessdate=|archive-url=https://web.archive.org/web/20190121010745/https://hindi.siasat.com/news/%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AD%E0%A5%81-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%A6-%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%AB%E0%A5%81-913621/|archive-date=21 जनवरी 2019|url-status=dead}}</ref><ref>{{cite web|title=गुरु और शिष्य के बीच एक संवाद है "द हार्टफुलनेस वे' : जोशुआ|url=https://www.bhaskar.com/mp/bhopal/news/latest-bhopal-news-021502-1671639.html|publisher=[[दैनिक भास्कर]]|accessdate=|archive-url=https://web.archive.org/web/20190120144122/https://www.bhaskar.com/mp/bhopal/news/latest-bhopal-news-021502-1671639.html|archive-date=20 जनवरी 2019|url-status=live}}</ref> यहाँ जोशुआ, हर एक हृदय के मूल में बसे असली केन्द्र की खोज की पहल करते हैं तथा इसमें दाजी उनका मार्गदर्शन करते हैं| दाजी ध्यान के बारे में वर्णन करते हुए कहते हैं कि यह केवल अपनी आतंरिक-अवस्था को उसकी स्वाभाविकता में ले आना है, चाहे वह कोई भी अवस्था हो| ध्यान सहजता उत्पन्न करता है तथा जैसे-जैसे हम सहजता की ओर बढ़ते हैं, वह जो अस्वाभाविक है ,ढलने लगता है| लेखकों के अनुसार, इस पुस्तक में दिए गए प्रयोगात्मक तरीके को अपनाकर अनेक लोग इस तथ्य को स्वयं के लिए खोज पाए हैं| यह पुस्तक [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]], [[हिन्दी]], [[तमिल]], [[मलयालम भाषा|मलयालम]], [[गुजराती भाषा|गुजराती]], [[कन्नड़ भाषा|कन्नड]] एवं [[मराठी भाषा|मराठी]] भाषाओं में उपलब्ध है|
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