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== होम्योपैथी के सिद्धान्त एवं नियम == {{More citations needed section}} [[चित्र:Hahnemann 1996.png|right|thumb|250px]] === समरूपता या सादृश्य नियम (Law of Similar) === डा हैनिमैन द्वारा प्रवर्तित होमियोपैथी का मूल सिद्धांत है - "सिमिलिया सिमिविबस क्यूरेंटर" (Similia Similibus Curanter / " सम: समम शमयति ") अर्थात् रोग उन्हीं औषधियों से निरापद रूप से, शीघ्रातिशीघ्र और अत्यंत प्रभावशाली रूप से निरोग होते हैं, जो रोगी के रोगलक्षणों से मिलते-जुलते लक्षण उत्पन्न करने में सक्षम हैं। दूसरे शब्दों में, इस नियम के अनुसार जिस औषधि की अधिक मात्रा स्वस्थ शरीर में जो विकार पैदा करती है उसी औषधि की लघु मात्रा वैसे समलक्षण वाले प्राकृतिक लक्षणॊं को नष्ट भी करती है। उदाहरण के लिये कच्चे प्याज काटने पर जुकाम के जो लक्षण उभरते हैं जैसे नाक, आँख से पानी निकलना उसी प्रकार के जुकाम के स्थिति में होम्योपैथिक औषधि ऐलीयम सीपा देने से ठीक भी हो जाता है। === एकमेव औषधि (Single Medicine) === होम्योपैथी में रोगियों को एक समय में एक ही औषधि को देने का निर्देश दिया जाता है। हानेमान ने अनुभव के आधार पर एक बार में केवल एक औषधि का विधान निश्चित किया था, किंतु अब इस मत में भी पर्याप्त परिवर्तन हो गया है। आधुनिक चिकित्सकों में से कुछ तो हानेमान के बताए मार्ग पर चल रहे हैं और कुछ लोगों ने अपना स्वतंत्र मार्ग निश्चित किया है और एक बार में दो, तीन औषधियों का प्रयोग करते हैं। === औषधि की न्यून मात्रा (The Minimum dose) === सदृश विज्ञान के आधार पर रोगी की चयन की गई औषधि की मात्रा अति नयून होनी चाहिये ताकि दवा के दुष्परिणाम न दिखें। प्रथमत: यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को सफ़ल करने में घटक का काम करता है। होम्योपैथिक औषधि को विशेष रूप से तैयार किया जाता है जिसे औषधि शक्तिकरण का नाम दिया जाता है। ठॊस पदार्थों को ट्राच्यूरेशन और तरल पदार्थों को सक्शन प्रणाली से तैयार किया जाता है। === व्यक्तिपरक और संपूर्ण चिकित्सा (Individualization & Totality of Symptoms) === यह एक मूल प्रसंग है। यह सच भी है कि होम्योपैथी रोगों के नाम पर चिकित्सा नहीं करती। वास्तव में यह रोग से ग्रसित व्यक्ति के मानसिक, भावत्मक तथा शारीरिक आदि सभी पहलूहॊं की चिकित्सा करती है। अस्थमा (asthma) के पाँच रोगियों की होम्योपैथी में एक ही दवा से चिकित्सा नहीं की जा सकती। संपूर्ण लक्षण के आधार पर यह पाँच रोगियों में अलग-२ औषधियाँ निर्धारित की जा सकती हैं। === जीवनी शक्ति (Vital Force) === हैनिमैन ने मनुष्य के शरीर में जीवनी शक्ति को पहचान कर यह प्रतिपादित किया कि यह जीवनी शक्ति शरीर को बाह्य रूप से आक्रमण करने वाले रोगों से बचाती है। परन्तु रोग्की अवस्था में यह जीवनी शक्ति रोग ग्रसित हो जाती है। सदृश विज्ञान के आधार पर चयन की गई औषधि इस जीवनी शक्ति के विकार को नष्ट कर शरीर को रोग मुक्त करती है। === मियाज्म (रोग बीज) (Miasm) === हैनिमैन ने पाया कि सभी पुराने रोगों के आधारभूत कारण सोरा (psora), साइकोसिस (sycosis) और सिफ़िलिस (syphlis) हैं। इनको हैनिमैन ने मियाज्म शब्द दिया जिसका यूनानी अर्थ है - प्रदूषित करना। === औषधि प्रमाणन (Drug Proving) === औषधि को चिकित्सा हेतु उपयोग करने के लिये उनकी थेरापुयिटक क्षमता का ज्ञान होना आवशयक है। औषधि प्रमाणन होम्योपैथी में ऐसी प्रकिया है जिसमे औषधियों की स्वस्थ मनुष्यों में प्रयोग करके दवा के मूल लक्षणॊं का ज्ञान किया जाता है। इन औषधियों का प्रमाणन स्वस्थ मनुष्यों पर किया जाता है और इनसे होने वाले लक्षणॊं की जानकारी के आधार पर सदृशता विज्ञान की मदद से रोगों का इलाज किया जाता है।
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