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== रचनाएँ == ऋग्वेद में पराशर की कई ऋचाएँ (1, 65-73-9, 97) हैं। [[विष्णु पुराण|विष्णुपुराण]], [[पराशर स्मृति]], विदेहराज जनक को उपदिष्ट गीता ([[पराशर गीता]]) जो महाभारत के शांतिपर्व का एक भाग है, बृहत्पराशरसंहिता आदि पराशर की रचनाएँ हैं। भीष्माचार्य ने [[युधिष्ठिर|धर्मराज]] को पराशरोक्त [[श्रीमद्भगवद्गीता|गीता]] का उपदेश किया है ([[महाभारत]], शांतिपर्व, 291-297)। इनके नाम से संबद्ध अनेक ग्रंथ ज्ञात होते हैं : 1. बृहत्पराशर होरा शास्त्र, 2. लघुपाराशरी (ज्यौतिष), 3. बृहत्पाराशरीय धर्मसंहिता, 4. पराशरीय धर्मसंहिता (स्मृति), 5. पराशर संहिता (वैद्यक), 6. पराशरीय पुराणम् ([[मध्वाचार्य|माधवाचार्य]] ने उल्लेख किया है), 7. पराशरौदितं नीतिशास्त्रम् ([[चाणक्य]] ने उल्लेख किया है), 8. पराशरोदितं, वास्तुशास्त्रम् ([[विश्वकर्मा]] ने उल्लेख किया है)। === पराशर स्मृति === पराशर स्मृति एक धर्मसंहिता है, जिसमें युगानुरूप धर्मनिष्ठा पर बल दिया गया है। कहते हैं कि, एक बार ऋषियों ने [[कलियुग]] योग्य धर्मों को समझाने की [[व्यास]] से प्रार्थना की। व्यासजी ने अपने पिता पराशर से इसके संबंध में पूछना उचित समझा। अतः वे मुनियों को लेकर [[बद्रीनाथ (नगर)|बदरिकाश्रम]] में पराशर के पास गये। पराशर ने समझाया कि कलियुग में लोगों की शारीरिक शक्ति कम होती है, इसलिए तपस्या, ज्ञान-संपादन, यज्ञ आदि सहज साध्य नहीं हैं। इसलिए कलिकाल में दान रूप धर्म की महत्ता है। :''तपः परं कृतयुगे त्रेतायां ज्ञानमुच्यते।'' :''द्वापरे यज्ञमित्यूचुर्दानमेकं कलौयुगे॥'' <ref>(पराशर स्मृति 1.23)</ref> कलियुग में पराशर प्रोक्त धर्म को विशेष मान्यता प्राप्त हुई है। कहा गया है कि - :''कृतेतु मानवो धर्मस्त्रेतायां गौतमः स्मृतः।'' :''द्वापरे शंखलिखितः कलौ पराशरः स्मृतः॥'' (पराशर स्मृति 1.24) अर्थात् [[सत्य युग|सत्ययुग]] में [[मनु]] द्वारा प्रोक्त धर्म मुख्य था, [[त्रेतायुग|त्रेता]] में [[गौतम]] की महत्ता थी। द्वापर में शंख-लिखित मुनियों द्वारा कहे गये धर्म की प्रतिष्ठा थी। पर कलिकाल में पराशर से निर्दिष्ट धर्म की प्रतिष्ठा है। पराशर मुनि अहिंसा को परमाधिक महत्त्व देते हैं। पराशरस्मृति में [[गाय|गो]]<nowiki/>माता कोे न केवल अवध्य, अपि तु पूजनीय भी कहा गया है। वैसे ही वानप्रस्थ एवं संन्यास आश्रमों का विशद वर्णन उनके स्मृति ग्रंथ में है। ग्रंथ के अन्त में योग पर ज़ोर दिया गया है। पराशर ने आयुर्वेद एवं ज्योतिष पर भी अपनी रचनाएँ प्रस्तुत की हैं।
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