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== अधिक मास == पुरातन काल से ही भारत में ‘सौर वर्ष’ तथा ‘चन्द्र वर्ष’ प्रचलित हैं। इनमें एक का ऋग्वेद तथा दूसरे का अथर्ववेद में भी वर्णन आया है। सौर वर्ष से ऋतुओं का ज्ञान होता है। चन्द्र तिथियों, मासों से हमारे अधिकतर पर्व व त्यौहार मनाये जाते हैं। इस कारण हमारे पूर्वजों ने इन दोनों का समन्वय कर एक वर्ष बनाया जिसे चंद्र-सौर वर्ष कहते हैं। मगर हर दो या तीन वर्षों में एक मास बढ़ा दिया जाता है, जिसे ‘मलमास’, ‘पुरूषोत्तममास’ या ‘अधिकमास’ कहते हैं, उस चन्द्र वर्ष में 13 चन्द्रमास होते हैं। दोनों वर्षों (चन्द्र व सौर वर्ष) का समन्वय करने के लिये नियम बनाया गया कि जब एक सौर मास में दो बार अमावस्या का अन्त होता हो, तब उस मास के नाम के दो चन्द्र मास हो जाते हैं और वह चंद्र-सौर वर्ष 13 चंद्रमास का हो जाता है। सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में जाना संक्रान्ति कहलाता है। इसे ‘सौर मास’ (Solar Month) कहते हैं। राशियाँ 12 है, अतः सौर वर्ष में भी 12 मास होते हैं, जिसका मान 365.2422 दिन है। चंद्र वर्ष 354.372 दिन का होता है। इनमें लगभग 11 दिन का अन्तर है। सामान्यतया 32 मास 16 दिन 4 घड़ी बीतने पर एक मास का अन्तर आ जाता है। इस प्रकार जब दो पक्ष में संक्रान्ति नहीं होती तो उसे अधिक मास कहते हैं। एक ही नाम के दो मासों के बीच का माह (2 पक्ष) शुद्ध होता है। पहला कृष्ण पक्ष तथा अन्तिम शुक्ल पक्ष ’अधिक। वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद तथा आश्विन अधिमास हो सकते हैं।
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