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==क़ुरआन में काबा के निर्माण में इब्राहीम का वर्णन == {{मुख्य|काबा|काबा=}} [[क़ुरआन]] के कई आयतों में काबा और उसकी व्युत्पत्ति का उल्लेख है। उल्लेखित कहानी के अनुसार, काबा [[अल्लाह]] के लिए बनाया गया पहला प्रार्थनागृह है, जिससे इब्राहिमऔर उनके पुत्र [[इस्माइल]] ने अल्लाह के कहने पे [[मक्का (शहर)]] में निर्मित किया था। इस कहानी का उल्लेख निम्न आयतों में मिलता है: {{quote|''यकीनन लोगों (की इबादत) के वास्ते जो घर सबसे पहले बनाया गया वह तो यक़ीनन यही (काबा) है जो बक्का (मक्का) में है बड़ी (खैर व बरकत) वाला और सारे जहाँ के लोगों का रहनुमा''|सुरा अल-इमरान(३); आयात ९६<ref>https://www.islamicfinder.org/quran/surah-aal-i-imraan/96/?translation=hindi-suhel-farooq-khan-and-saifur-rahman-nadwi सुरा अल-इमरान आयात ९६ (हिंदी अनुवाद)]</ref><ref>{{cite web|last1=Shakir, Ed.|first1=M. H.|title=The Quran|url=http://www.perseus.tufts.edu/hopper/text?doc=Perseus%3Atext%3A2002.02.0003%3Asura%3D3%3Averse%3D96|accessdate=10 January 2018|quote=And another version: "[96] Most surely the first house appointed for men is the one at Bekka, blessed and a guidance for the nations."}}</ref>}} {{quote|''और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब हमने इबराहीम के ज़रिये से इबरहीम के वास्ते ख़ानए काबा की जगह ज़ाहिर कर दी (और उनसे कहा कि) मेरा किसी चीज़ को शरीक न बनाना और मेरे घर को तवाफ और क़याम और रूकू सुजूद करने वालों के वास्ते साफ सुथरा रखना''|सुरा अल-हज(२२), आयात २६<ref>https://www.islamicfinder.org/quran/surah-al-hajj/26/?translation=hindi-suhel-farooq-khan-and-saifur-rahman-nadwi</ref><ref>{{cite web|last1=Shakir, Ed.|first1=M. H.|title=The Quran|url=http://www.perseus.tufts.edu/hopper/text?doc=Perseus%3Atext%3A2002.02.0003%3Asura%3D22%3Averse%3D26|accessdate=10 January 2018|quote=And another version: "[26] And when We assigned to Ibrahim the place of the House, saying: Do not associate with Me aught, and purify My House for those who make the circuit and stand to pray and bow and prostrate themselves."}}</ref>}} {{quote|''और (वह वक्त याद दिलाओ) जब इबराहीम व इसमाईल ख़ानाए काबा की बुनियादें बुलन्द कर रहे थे (और दुआ) माँगते जाते थे कि ऐ हमारे परवरदिगार हमारी (ये ख़िदमत) कुबूल कर बेशक तू ही (दूआ का) सुनने वाला (और उसका) जानने वाला है''|सुरा अल-बक़रा(२), आयात १२७<ref>https://www.islamicfinder.org/quran/surah-al-baqara/127/?translation=hindi-suhel-farooq-khan-and-saifur-rahman-nadwi</ref><ref>{{cite web|last1=Shakir, Ed.|first1=M. H.|title=The Quran|url=http://www.perseus.tufts.edu/hopper/text?doc=Perseus%3Atext%3A2002.02.0003%3Asura%3D2%3Averse%3D127|accessdate=10 January 2018|quote=And another version: "[127] And when Ibrahim and Ismail raised the foundations of the House: Our Lord! accept from us; surely Thou art the Hearing, the Knowing:"}}</ref>}} [[File:Masjid al-Haram panorama.JPG|thumb|center|800px|मस्जिद अल-हराम के बीच स्थित काबा]]
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