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इब्राहीम (इस्लाम)

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इब्राहीम (इस्लाम) (अंग्रेज़ी:Abraham in Islam), उर्दू:ابراہیم (اسلام)) इबराहीम अलैहिस्सलाम : इस्लाम धर्म के भी महान पैगम्बर(नबी) थे। पवित्र ग्रन्थ क़ुरआन में जिन पैग़म्बरों (रसूलों) का वर्णन विस्तार से किया गया है, उन में इब्राहीम मुख्य हैं।[]

विवरण[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

साँचा:इस्लाम साँचा:मुख्य हज़रत इब्राहीम का इब्राहीमी धर्म अर्थात यहूदी धर्म, ईसाई धर्म, इस्लाम में विशेष स्थान है।[] इस्लामी मान्यता में विशेष स्थान है कि पैगम्बर मुहम्मद को भी उन्हीं के वंश से माना जाता। क़ुरआन में 14 वां अध्याय इब्राहिम (सूरा) जिसमें 52 आयतें हैं सहित उन का ज़िक्र मक्की-मदनी दोनों किस्म की सूरा में मौजूद है, 35 सूरतों की लगभग 63 आयतों में हज़रत इब्राहीम (अलैहि सलाम) का ज़िक्र मिलता है।[]

इस्लाम धर्म की महत्वपूर्ण पुस्तक क़िसासुल अंबिया और ऐतिहासिक पुस्तकों के अनुसार हज़रत इस्माइल के पिता हज़रत इब्राहीम का मक्का (शहर) में इस्लाम के तीर्थ स्थल काबा में काबा की तामीर, ज़मज़म कुंआ (आबे ज़मज़म), मक़ामे इब्राहीम, हज्रे अस्वद[], ईद अल-अज़हा का त्यौहार और इब्राहीमी धर्म में प्रचलित खतना अर्थात सुन्नते इब्राहिम[] और नमरूद का उनको पालना, आग में डालना[] आदि इस्लाम मे प्रसिद्ध बातों का ऐतिहासिक संबंध भी हज़रत इब्राहीम से है।

क़ुरआन में काबा के निर्माण में इब्राहीम का वर्णन[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

साँचा:मुख्य क़ुरआन के कई आयतों में काबा और उसकी व्युत्पत्ति का उल्लेख है। उल्लेखित कहानी के अनुसार, काबा अल्लाह के लिए बनाया गया पहला प्रार्थनागृह है, जिससे इब्राहिमऔर उनके पुत्र इस्माइल ने अल्लाह के कहने पे मक्का (शहर) में निर्मित किया था। इस कहानी का उल्लेख निम्न आयतों में मिलता है:

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मस्जिद अल-हराम के बीच स्थित काबा

ज़मज़म कुंआ (आबे ज़मज़म) और हज़रत इब्राहीम[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

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मक़ामे इब्राहीम[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

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मुसलमानों के तीर्थ स्थल काबा में एक विशेष स्थल और पवित्र पत्थर है, जिस पर हज़रत इब्राहीम के पदचिह्न थे।

हज्रे अस्वद और इब्राहीम[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

1850 में हज्रे अस्वद

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मुसलमानों के तीर्थ स्थल काबा में वो पत्थर है जो काबा की दीवार पर लगा है। कई घटनाओं के बाद इस समय ये तीन बड़े और विभिन्न रूपों के कई छोटे टुकड़ों में है।

इस्लामी मान्यता के अनुसार जब हज़रत इब्राहीम और उनके बेटे हज़रत इस्माईल ख़ाना काबा की तामीर कर रहे थे। तो हज़रत जिब्राईल ने ये पत्थर जन्नत से ला कर दिया जिसे हज़रत इबराहीम ने अपने हाथों से दीवार काबा में नसब किया।

खतना अर्थात सुन्नते इब्राहिम[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

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नमरूद और इब्राहिम

इन्हें भी देखें[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

साँचा:कुरान में पैगम्बर

सन्दर्भ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]

हज़रत इब्राहीम अलैहि सलाम

  1. "इबराहीम"- प्रो. डॉक्टर जियाउर्रहमान आज़मी, कुरआन मजीद की इन्साइक्लोपीडिया, हिंदी संस्करण(2010), पृष्ठ 127
  2. ""हज़रत इब्राहीम"-क़ससुल अंबिया-पृष्ठ 61 से 90".https://archive.org/'.[१]
  3. हज़रत इब्राहीम अलैहि सलाम https://web.archive.org/web/20200808220754/https://sites.google.com/site/islaminindian/qasasul-anbiya-hazrat-ibrahim-alaihissalam-hindi
  4. حجر اسود - ویکیپیڈیا https://ur.wikipedia.org/wiki/%D8%AD%D8%AC%D8%B1_%D8%A7%D8%B3%D9%88%D8%AF
  5. ختنہ - ویکیپیڈیا https://ur.wikipedia.org/wiki/%D8%AE%D8%AA%D9%86%DB%81
  6. Ibrahim and Namrud https://islamicstories.com/story/93