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== आंशिक ईथर को घसीटने में समस्याएं== घसीटने का फ्रेनल गुणक, [[फिज़ाऊ प्रयोग]] (Fizeau experiment) और इसकी पुनर्रावर्तियों से पुष्टि की जा रही थी। इस गुणक की सहायता से सभी ईथर अपवाह प्रयोगों (जैसे - आरगो, फिजाऊ, होईक मसकर्ट इत्यादि) जो प्रथम कोटि तक के प्रभावों का मापन करने में सक्षम थे से आ रहे ऋणात्मक परिणामों की व्याख्या की जा सकती है। स्थायी (लगभग) ईथर की परिकल्पना भी [[तारकीय विपथन]] के लिए तर्कयुक्त है। तथापि इस सिद्धांत का खण्डन निम्न कारणों से हुआ :<ref name=whit>{{Citation|author=Whittaker, Edmund Taylor|year=1910|title=A History of the theories of aether and electricity|edition=1.|location=Dublin|publisher=Longman, Green and Co.|url=http://www.archive.org/details/historyoftheorie00whitrich|access-date=26 अप्रैल 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20090225121802/http://www.archive.org/details/historyoftheorie00whitrich|archive-date=25 फ़रवरी 2009|url-status=live}}</ref> <ref name=jann>{{Citation|author=Jannsen, Michel & Stachel, John|year=2008|title=The Optics and Electrodynamics of Moving Bodies|url=http://www.mpiwg-berlin.mpg.de/Preprints/P265.PDF|access-date=26 अप्रैल 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20150929110752/http://www.mpiwg-berlin.mpg.de/Preprints/P265.PDF|archive-date=29 सितंबर 2015|url-status=live}}</ref> <ref name=ferr>{{Citation|title=Arago (1810): the first experimental result against the ether|author=Rafael Ferraro and Daniel M Sforza|year=2005|journal=Eur. J. Phys.|volume=26|pages=195–204|arxiv=physics/0412055|bibcode = 2005EJPh...26..195F |doi = 10.1088/0143-0807/26/1/020 }}</ref> * यह १९वीं शताब्दी से ही ज्ञात था, कि आंशिक ईथर को घसीटने के लिए ईथर का आपेक्षिक वेग होना चाहिए और यह अलग वर्णों (रंगो) के लिए अलग-अलग होना चाहिए - निस्संदेह यह स्थिति नहीं है। * फ्रेनल का (लगभग) स्थिर ईथर का सिद्धांत के परिणाम उन प्रयोगों में सही साबित हो रहे थे जो द्वितीय कोटि तक के प्रभाव संसूचित करने के लिए पर्याप्त संवेदी थे। तथापि, वे प्रयोग जैसे [[माइकलसन मोर्ले प्रयोग]] व [[ट्रोउटन-नोबल प्रयोग]] ने ऋणात्मक परिणाम दिये और इसलिए फ्रेनल ईथर का सीधा खण्डन हुआ।
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