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== अभिनय == {{quote box|width=30em|align=right|quote="मैं एक [[हिंदू]] से विवाहित हूं, मेरे बच्चों को दोनों धर्मों के साथ लाया जा रहा है, जब मैं ऐसा महसूस करता हूं तो मैं नमाज़ पढ़ता हूं। लेकिन अगर मेरा धर्म चार विवाहों की अनुमति देता है, तो भी मैं इसमे विश्वास नहीं करना चाहूंगा। कई अन्य चीज़ें भी प्रासंगिकता खो चुकी हैं , लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैं [[कुरान]] से पूछताछ कर रहा हूं। मैं नमाज़ [प्रार्थना] को पांच बार पढ़ने के संदर्भ में धार्मिक नहीं हूं लेकिन मैं इस्लामी हूं। मैं [[इस्लाम]] के सिद्धांतों पर विश्वास करता हूं और मेरा मानना है कि यह एक अच्छा धर्म है और एक अच्छा अनुशासन। मैं लोगों को यह जानना चाहता हूं कि [[इस्लाम]] न केवल एक कट्टरपंथी, या मूल रूप से अलग, नाराज व्यक्ति है, या जो केवल [[जिहाद]] करता है। मैं लोगों को यह जानना चाहता हूं कि [[जिहाद]] का वास्तविक अर्थ है अपनी ख़ुद की हिंसा और कमज़ोरी को दूर करने के लिए। यदि आवश्यकता हो, तो इसे अहिंसक तरीक़े से दूर करें। "<ref>{{cite news|url=http://www.tehelka.com/face-me/|title=‘I See Myself As An Ambassador Of Islam’|access-date=19 जून 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20150402123744/http://www.tehelka.com/face-me/|archive-date=2 अप्रैल 2015|url-status=dead}}</ref><ref>{{cite news|url=http://www.theguardian.com/film/2006/aug/04/india.world|title=King of Bollywood|access-date=19 जून 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20160304212812/http://www.theguardian.com/film/2006/aug/04/india.world|archive-date=4 मार्च 2016|url-status=live}}</ref><ref>{{cite news|url=http://scroll.in/article/712341/Why-a-Saudi-award-for-televangelist-Zakir-Naik-is-bad-news-for-India%E2%80%99s-Muslims|title=Why a Saudi award for televangelist Zakir Naik is bad news for India’s Muslims|access-date=19 जून 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180619062913/http://scroll.in/article/712341/Why-a-Saudi-award-for-televangelist-Zakir-Naik-is-bad-news-for-India%E2%80%99s-Muslims|archive-date=19 जून 2018|url-status=dead}}</ref>|source=—शाहरुख़ ख़ान, अपनी धार्मिक मान्यताओं पर}} ख़ान ने अभिनय की शिक्षा प्रसिद्ध रंगमंच निर्देशक बैरी जॉन से [[दिल्ली]] के थियेटर एक्शन ग्रुप में ली । वर्ष २००७ में जॉन ने अपने पुराने शिष्य के बारे में कहा, <blockquote> " The credit for the phenomenally successful development and management of Shah Rukh's career goes to the superstar himself."(अनुवाद - शाह रूख़ के करिअर की असाधारण सफलता का सारा श्रेय उस ही को जाता है|)<ref>{{cite web|url=http://www.hindustantimes.com/StoryPage/StoryPage.aspx?id=f9c017a9-918d-45bf-9162-f147e9fec513&MatchID1=4502&TeamID1=2&TeamID2=6&MatchType1=1&SeriesID1=1122&PrimaryID=4502&Headline='Theatre+is+at+an+all-time+low+in+Delhi'|title=Shahrukh's teacher gives him the credit|access-date=23 सितंबर 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20070930014712/http://www.hindustantimes.com/StoryPage/StoryPage.aspx?id=f9c017a9-918d-45bf-9162-f147e9fec513&MatchID1=4502&TeamID1=2&TeamID2=6&MatchType1=1&SeriesID1=1122&PrimaryID=4502&Headline='Theatre+is+at+an+all-time+low+in+Delhi'|archive-date=30 सितंबर 2007|url-status=live}}</ref> </blockquote> ख़ान ने अपना करिअर [[१९८८]] में [[दूरदर्शन]] के धारावाहिक "[[फ़ौजी]]" से प्रारम्भ किया जिसमे उन्होंने कमान्डो अभिमन्यु राय का किरदार अदा किया|<ref>{{cite web|url=http://www.mid-day.com/entertainment/television/2002/october/32887.htm|title=The camera chose Shah Rukh Khan|access-date=23 सितंबर 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20071127014420/http://www.mid-day.com/entertainment/television/2002/october/32887.htm|archive-date=27 नवंबर 2007|url-status=live}}</ref> उसके उपरांत उन्होंने और कई धारावाहिकों में अभिनय किया जिनमे प्रमुख था [[१९८९]] का "[[सर्कस]]"<ref>{{cite web|title=bbc.co.uk|url=http://news.bbc.co.uk/2/hi/entertainment/2204900.stm|work=Shahrukh goes global|accessdate=7 september 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20070823192438/http://news.bbc.co.uk/2/hi/entertainment/2204900.stm|archive-date=23 अगस्त 2007|url-status=live}}</ref>, जिसमे सर्कस में काम करने वाले व्यक्तियों के जीवन का वर्णन किया गया था और जो [[अज़ीज़ मिर्ज़ा]] द्वारा निर्देशित था| उस ही वर्ष उन्होंने [[अरुंधति राय]] द्वारा लिखित [[अंग्रेज़ी]] फ़िल्म "इन विच एनी गिव्स इट दोज़ वंस" में एक छोटा किरदार निभाया| यह फ़िल्म [[दिल्ली विश्वविद्यालय]] में विद्यार्थी जीवन पर आधारित थी| अपने माता पिता की मृत्यु के उपरांत [[१९९१]] में ख़ान [[नई दिल्ली]] से [[मुम्बई]] आ गये| बॉलीवुड में उनका प्रथम अभिनय "[[दीवाना (1992 फ़िल्म)|दीवाना]]" फ़िल्म में हुआ जो बॉक्स ऑफ़िस पर सफल घोषित हुई|<ref>{{cite web|url=http://www.boxofficeindia.com/1992.htm|title=BoxOfficeIndia.Com|archiveurl=https://web.archive.org/web/20060408044054/http://www.boxofficeindia.com/1992.htm|archivedate=8 अप्रैल 2006|access-date=23 सितंबर 2007|url-status=dead}}</ref> इस फ़िल्म के लिए उन्हें [[फ़िल्मफ़ेयर]] की तरफ़ से सर्वश्रेष्ठ प्रथम अभिनय का अवार्ड मिला| उनकी अगली फ़िल्म थी "[[दिल आशना है]]" जो नही चली। [[१९९३]] की हिट फ़िल्म "[[बाज़ीगर]]" में एक हत्यारे का किरदार निभाने के लिए उन्हें अपना पहला [[फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार]] मिला। उस ही वर्ष में फ़िल्म "[[डर (फ़िल्म)|डर]]" में इश्क़ के जूनून में पागल आशिक़ का किरदार अदा करने के लिए उन्हें सराहा गया। इस वर्ष में फ़िल्म "[[कभी हाँ कभी ना (फ़िल्म)|कभी हाँ कभी ना]]" के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर समीक्षक सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया| १९९४ में ख़ान ने फ़िल्म "[[अंजाम (1994 फ़िल्म)|अंजाम]]" में एक बार फिर जुनूनी एवं मनोरोगी आशिक़ की भूमिका निभाई और इसके लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ खलनायक का पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। [[१९९५]] में उन्होंने [[आदित्य चोपड़ा]] की पहली फ़िल्म "[[दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे]]" में मुख्य भूमिका निभाई। यह फ़िल्म बॉलीवुड के इतिहास की सबसे सफल और बड़ी फ़िल्मों में से एक मानी जाती है। मुम्बई के कुछ सिनेमा घरों में यह १२ सालों से चल रही है।<ref>{{Cite web |url=http://www.boxofficeindia.com/alltime.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=22 दिसंबर 2005 |archive-url=https://web.archive.org/web/20051222235822/http://www.boxofficeindia.com/alltime.htm |archive-date=22 दिसंबर 2005 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web|work=planetbollywood.com|title=´DDLJ´ Enters The Twelfth Year At The Theaters!|url=http://www.planetbollywood.com/displayArticle.php?id=011307064804|accessdate=14 January 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20070930154548/http://www.planetbollywood.com/displayArticle.php?id=011307064804|archive-date=30 सितंबर 2007|url-status=dead}}</ref> इस फ़िल्म के लिए उन्हें एक बार फिर [[फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार]] हासिल हुआ। १९९६ उनके लिए एक निराशाजनक साल रहा क्यूंकि उसमे उनकी सारी फ़िल्में असफल रहीं।<ref name="boxofficeindia1">{{Cite web |url=http://www.boxofficeindia.com/shahrukhkhan.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=15 अक्तूबर 2006 |archive-url=https://web.archive.org/web/20061015173528/http://www.boxofficeindia.com/shahrukhkhan.htm |archive-date=15 अक्तूबर 2006 |url-status=dead }}</ref> १९९७ में उन्होंने [[यश चोपड़ा]] की ''[[दिल तो पागल है]]'', [[सुभाष घई]] की ''[[परदेस]]'' और [[अज़ीज़ मिर्ज़ा]] की ''[[येस बॉस]]'' जैसी फ़िल्मों के साथ सफलता के क्षेत्र में फिर क़दम रखा।<ref>{{Cite web |url=http://www.boxofficeindia.com/1997.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=8 अप्रैल 2006 |archive-url=https://web.archive.org/web/20060408044031/http://www.boxofficeindia.com/1997.htm |archive-date=8 अप्रैल 2006 |url-status=dead }}</ref> वर्ष १९९८ में करण जोहर की बतौर निर्देशक पहली फ़िल्म ''[[कुछ कुछ होता है]]'' उस साल की सबसे बड़ी हिट घोषित हुई और ख़ान को चौथी बार [[फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार]] हासिल हुआ। इसी साल उन्हें [[मणि रत्नम]] की फ़िल्म ''[[दिल से (1998 फ़िल्म)|दिल से]]'' में अपने अभिनय के लिए फ़िल्म समीक्षकों से काफ़ी तारीफ़ मिली और यह फ़िल्म भारत के बाहर काफ़ी सफल रही।<ref>{{cite web|work=Dil se performs better|title=boxofficeindia.com|url=http://www.boxofficeindia.com/overseas.htm|accessdate=जुलाई 21 2007|archiveurl=https://web.archive.org/web/20051223014121/http://www.boxofficeindia.com/overseas.htm|archivedate=23 दिसंबर 2005|url-status=live}}</ref> अगला वर्ष उनके लिए कुछ ख़ास लाभकारी नही रहा क्यूंकि उनकी एक मात्र फ़िल्म, ''[[बादशाह (1999 फ़िल्म)|बादशाह]]'', का प्रदर्शन स्मरणीय नही रहा और वह औसत व्यापार ही कर पायी|<ref>{{Cite web |url=http://www.boxofficeindia.com/1999.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=2 अप्रैल 2004 |archive-url=https://web.archive.org/web/20040402124634/http://www.boxofficeindia.com/1999.htm |archive-date=2 अप्रैल 2004 |url-status=dead }}</ref> सन २००० में [[आदित्य चोपड़ा]] की ''[[मोहब्बतें]]'' में उनके किरदार को समीक्षकों से बहुत प्रशंसा मिली और इस फ़िल्म के लिए उन्हें अपना दूसरा [[फ़िल्मफ़ेयर समीक्षक सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार]] मिला| उस ही साल आई उनकी फ़िल्म जोश भी हिट हुई। उस ही वर्ष में ख़ान ने [[जूही चावला]] और [[अज़ीज़ मिर्ज़ा]] के साथ मिल कर अपनी ख़ुद की फ़िल्म निर्माण कम्पनी, 'ड्रीम्ज़ अन्लिमिटिड', की स्थापना की। इस कम्पनी की पहली फ़िल्म ''[[फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी]]'', जिसमे ख़ान और चावला दोनों ने अभिनय किया, बॉक्स ऑफ़िस पे जादू बिखेरने में असमर्थ रही। [[कमल हसन]] की विवादग्रस्त फ़िल्म ''[[हे राम (2000 फ़िल्म)|हे राम]]'' में भी ख़ान ने एक सहयोगी भूमिका निभाई जिसके लिए उन्हें समीक्षकों ने सराहा हालांकि यह फ़िल्म भी असफल श्रेणी में रही।<ref name="boxofficeindia1"/> सन २००१ में ख़ान ने [[करण जोहर]] के साथ अपनी दूसरी फ़िल्म ''[[कभी खुशी कभी ग़म|कभी ख़ुशी कभी ग़म]]'' की, जो एक पारिवारिक कहानी थी और जिसमें अन्य भी कई सितारे थे। यह फ़िल्म उस वर्ष की सबसे बड़ी हिट फ़िल्मों की सूची में शामिल थी। उन्हें अपनी फ़िल्म ''[[अशोका (2001 फ़िल्म)|अशोका]]'', जो की ऐतिहासिक सम्राट [[अशोक]] के जीवन पर आधारित थी, के लिए भी प्रशंसा मिली लेकिन यह फ़िल्म भी नाकामयाब रही। सन् २००२ में ख़ान ने [[संजय लीला भंसाली]] की दुखांत प्रेम कथा ''[[देवदास (2002 फ़िल्म)|देवदास]]'' में मुख्य भूमिका अदा की जिसके लिए उन्हें एक बार फिर [[फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार]] दिया गया। यह [[शरतचंद्र चट्टोपाध्याय]] के उपन्यास [[देवदास]] पर आधारित तीसरी हिन्दी फ़िल्म थी। अगले साल ख़ान की दो फ़िल्में रिलीज़ हुईं, ''[[चलते चलते (2003 फ़िल्म)|चलते चलते]]'' और ''[[कल हो ना हो]]''। चलते चलते एक औसत हिट साबित हुई<ref name="web.archive.org">{{Cite web |url=http://www.boxofficeindia.com/2003.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=12 फ़रवरी 2006 |archive-url=https://web.archive.org/web/20060212104056/http://www.boxofficeindia.com/2003.htm |archive-date=12 फ़रवरी 2006 |url-status=dead }}</ref> लेकिन कल हो ना हो, जो की [[करण जोहर]] की तीसरी फ़िल्म थी, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों ही बाज़ारों में काफ़ी कामयाब रही। इस फ़िल्म में ख़ान ने एक दिल के मरीज़ का किरदार निभाया जो मरने से पहले अपने चारों ओर ख़ुशियाँ फैलाना चाहता है और इस अदाकारी के लिये उन्हें सराहा भी गया।<ref name="web.archive.org"/> २००४ ख़ान के लिये एक और महत्वपूर्ण वर्ष रहा। इस साल की उनकी पहली फ़िल्म थी [[फ़राह ख़ान]] निर्देशित ''[[मैं हूँ ना]]'', जो ख़ान द्वारा सह-निर्मित भी थी। यह फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर एक बड़ी हिट सिद्ध हुई। उनकी अगली फ़िल्म थी [[यश चोपड़ा]] कृत ''[[वीर-ज़ारा]]'', जो उस साल की सबसे कामयाब फ़िल्म थी और जिसमे ख़ान को अपने अभिनय के लिये कई अवार्ड और बहुत प्रशंसा मिली।{{cn|date=जनवरी 2013}} उनकी तीसरी फ़िल्म थी [[आशुतोष गोवारिकर]] निर्देशित ''[[स्वदेश]]'', जो दर्शकों को सिनेमा-घरों में लाने में तोह सफल ना हो सकी लेकिन उसमें ख़ान के भारत लौटे एक अप्रवासी भारतीय की भूमिका को सराहा गया और ख़ान ने अपना छठवाँ [[फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार]] जीता।<ref>{{Cite web |url=http://www.boxofficeindia.com/2004.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=27 अक्तूबर 2004 |archive-url=https://web.archive.org/web/20041027004300/http://www.boxofficeindia.com/2004.htm |archive-date=27 अक्तूबर 2004 |url-status=dead }}</ref> सन २००५ में उनकी एकमात्र फ़िल्म ''[[पहेली (2005 फ़िल्म)|पहेली]]'' (जो की [[अमोल पालेकर]] द्वारा निर्देशित थी) बॉक्स ऑफ़िस पर असफल रही हालांकि उसमें ख़ान के अभिनय को सराहा गया|<ref>{{cite web|url=http://www.boxofficeindia.com/2005.htm|title=boxofficeindia.com|archiveurl=https://web.archive.org/web/20060212103931/http://www.boxofficeindia.com/2005.htm|archivedate=12 फ़रवरी 2006|access-date=29 सितंबर 2007|url-status=live}}</ref> २००६ में ख़ान एक बार फिर [[करण जोहर]] की फ़िल्म ''[[कभी अलविदा ना कहना]]'' में देखे गये जो एक अतिनाटकीय फ़िल्म थी। इस फ़िल्म ने भारत में तो सफलता प्राप्त की ही, साथ ही साथ यह विदेश में सबसे सफल हिन्दी फ़िल्म भी बन गई।<ref>{{cite web|url=http://www.boxofficeindia.com/2006.htm|title=boxofficeindia.com|archiveurl=https://web.archive.org/web/20060326011123/http://www.boxofficeindia.com/2006.htm|archivedate=26 मार्च 2006|access-date=29 सितंबर 2007|url-status=live}}</ref> उसी वर्ष ख़ान ने १९७८ की हिट फ़िल्म ''[[डॉन (1978 फ़िल्म)|डॉन]]'' की रीमेक ''[[डॉन (2006 फ़िल्म)|डॉन]]'' में भी अभिनय किया जो एक बड़ी हिट सिद्ध हुई।<ref>{{cite web|url=http://www.boxofficeindia.com/2006.htm|title=BoxOfficeIndia.com|archiveurl=https://web.archive.org/web/20060326011123/http://www.boxofficeindia.com/2006.htm|archivedate=26 मार्च 2006|access-date=29 सितंबर 2007|url-status=live}}</ref> २००७ में ख़ान की दो फिल्में आई है - ''[[चक दे! इंडिया (2007 फ़िल्म)|चक दे! इंडिया]]'' और '['[ओम शांति ओम]]''। ''[[चक दे! इंडिया (2007 फ़िल्म)|चक दे! इंडिया]]'' में ख़ान भारतीय महिला हॉकी टीम के कोच के किरदार में नज़र आते हैं जिनका लक्ष्य है भारत को विश्व कप दिलवाना। इस किरदार की लिये ख़ान को समीक्षकों से तो ख़ासी प्रशंसा मिली ही है साथ ही साथ यह फ़िल्म एक विशाल हिट भी सिद्ध हुई है।<ref>{{cite web |url=http://www.boxofficeindia.com |title=Boxofficeindia.com |publisher=Boxofficeindia.com |date= |accessdate=29 जनवरी 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20061220031328/http://boxofficeindia.com/ |archive-date=20 दिसंबर 2006 |url-status=live }}</ref> २००७ की दूसरी फ़िल्म ''ओम शांति ओम'' में भी नज़र आए ये फराह ख़ान की शाहरुख़ ख़ान के साथ दूसरी फ़िल्म है। इसमें ख़ान ने दोहरी भूमिका निभाई। पहला किरदार ओम एक जूनियर कलाकार है और एक हादसे में मारा जाता है और दूसरा एक नामी अभिनेता ओम कपूर है। ये फ़िल्म भी २००७ की एक सफल फ़िल्म थी।
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