शाहरुख़ ख़ान

साँचा:Commonscat शाहरुख़ ख़ान (उच्चारण साँचा:IPA-hns; जन्म 2 नवम्बर 1965), जिन्हें अक्सर शाहरुख़ ख़ान के रूप में श्रेय दिया जाता है और अनौपचारिक रूप में एसआरके नाम से सन्दर्भित किया जाता, एक भारतीय फ़िल्म अभिनेता है। अक्सर मीडिया में इन्हें "बॉलीवुड का बादशाह", "किंग ख़ान", "रोमांस किंग" और किंग ऑफ़ बॉलीवुड नामों से पुकारा जाता है। ख़ान ने रोमैंटिक नाटकों से लेकर ऐक्शन थ्रिलर जैसी शैलियों में 72 हिन्दी फ़िल्मों में अभिनय किया है।[१][२][३][४] फ़िल्म उद्योग में उनके योगदान के लिये उन्होंने तीस नामांकनों में से चौदह फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीते हैं। वे और दिलीप कुमार ही ऐसे दो अभिनेता हैं जिन्होंने फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार 8 बार जीता है। 2005 में भारत सरकार ने उन्हें भारतीय सिनेमा के प्रति उनके योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया।
अर्थशास्त्र में उपाधि ग्रहण करने के बाद इन्होंने अपने करियर की शुरुआत १९८० में रंगमंचों व कई टेलिविज़न धारावाहिकों से की और १९९२ में व्यापारिक दृष्टि से सफल फ़िल्म दीवाना से फ़िल्म क्षेत्र में कदम रखा। इस फ़िल्म के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर प्रथम अभिनय पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके पश्चात् उन्होंने कई फ़िल्मों में नकारात्मक भूमिकाएं अदा की जिनमें डर (१९९३), बाज़ीगर (१९९३) और अंजाम (१९९४) शामिल है। वे कई प्रकार की भूमिकाओं में दिखें व भिन्न-भिन्न प्रकार की फ़िल्मों में कार्य किया जिनमे रोमांस फ़िल्में, हास्य फ़िल्में, खेल फ़िल्में व ऐतिहासिक ड्रामा शामिअर्थशास्त्र में उपाधि ग्रहण करने के बाद इन्होंने अपने करियर की शुरुआत १९८० में रंगमंचों व कई टेलिविज़न धारावाहिकों से की और १९९२ में व्यापारिक दृष्टि से सफल फ़िल्म दीवाना से फ़िल्म क्षेत्र में कदम रखा। इस फ़िल्म के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर प्रथम अभिनय पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके पश्चात् उन्होंने कई फ़िल्मों में नकारात्मक भूमिकाएं अदा की जिनमें डर (१९९३), बाज़ीगर (१९९३) और अंजाम (१९९४) शामिल है। वे कई प्रकार की भूमिकाओं में दिखें व भिन्न-भिन्न प्रकार की फ़िल्मों में कार्य किया जिनमे रोमांस फ़िल्में, हास्य फ़िल्में, खेल फ़िल्में व ऐतिहासिक ड्रामा शामिल है।
उनके द्वारा अभिनीत ग्यारह फ़िल्मों ने विश्वभर में साँचा:Indian Rupee १०० करोड़ का व्यवसाय किया है। ख़ान की कुछ फ़िल्में जैसे दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे (१९९५), कुछ कुछ होता है (१९९८), देवदास (२००२), चक दे! इंडिया (२००७), ओम शांति ओम (२००७), रब ने बना दी जोड़ी (२००८) और रा.वन (२०११) अब तक की सबसे बड़ी हिट फ़िल्मों में रही है और कभी ख़ुशी कभी ग़म (२००१), कल हो ना हो (२००३), वीर ज़ारा'उनके द्वारा अभिनीत ग्यारह फ़िल्मों ने विश्वभर में साँचा:Indian Rupee १०० करोड़ का व्यवसाय किया है। ख़ान की कुछ फ़िल्में जैसे दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे (१९९५), कुछ कुछ होता है (१९९८), देवदास (२००२), चक दे! इंडिया (२००७), ओम शांति ओम (२००७), रब ने बना दी जोड़ी (२००८) और रा.वन (२०११) अब तक की सबसे बड़ी हिट फ़िल्मों में रही है और कभी ख़ुशी कभी ग़म (२००१), कल हो ना हो (२००३), वीर ज़ारा (२००६)।
वेल्थ रिसर्च फ़ॉर्म वैल्थ एक्स के मुताबिक किंग ख़ान सबसे अमीर भारतीय अभिनेता बन गए हैं। फ़र्म ने अभिनेता की कुल संपत्ति 3660 करोड़ रूपए आंकी थी लेकिन अब 4000 करोड़ बताई जाती है।[५]वेल्थ रिसर्च फ़ॉर्म वैल्थ एक्स के मुताबिक़ किंग ख़ान सबसे अमीर भारतीय अभिनेता बन गए हैं। फ़र्म ने अभिनेता की कुल संपत्ति 3660 करोड़ रूपए आंकी थी लेकिन अब 4000 करोड़ बताई जाती है।
जीवनी[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
ख़ान के माता पिता पठान मूल के थे|[६][७][८] उनके पिता ताज मोहम्मद ख़ान एक स्वतंत्रता सेनानी थे और उनकी माँ लतीफ़ा फ़ातिमा मेजर जनरल शाहनवाज़ ख़ान की पुत्री थी|[९]
ख़ान के पिता हिंदुस्तान के विभाजन से पहले पेशावर के किस्सा कहानी बाज़ार से दिल्ली आए थे,[१०] हालांकि उनकी माँ रावलपिंडी से आयीं थी|[११] ख़ान की एक बहन भी हैं जिनका नाम है शहनाज़ और जिन्हें प्यार से लालारुख बुलाते हैं|[१२][१३] ख़ान ने अपनी स्कूली पढ़ाई दिल्ली के सेंट कोलम्बा स्कूल से की जहाँ वह क्रीड़ा क्षेत्र, शैक्षिक जीवन और नाट्य कला में निपुण थे| स्कूल की तरफ़ से उन्हें "स्वोर्ड ऑफ़ ऑनर" से नवाज़ा गया जो प्रत्येक वर्ष सबसे काबिल और होनहार विद्यार्थी एवं खिलाड़ी को दिया जाता था| इसके उपरांत उन्होंने हंसराज कॉलेज से अर्थशास्त्र की डिग्री एवं जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की मास्टर्स डिग्री हासिल की|[१४]
अपने माता पिता के देहांत के उपरांत ख़ान १९९१ में दिल्ली से मुम्बई आ गए| १९९१ में उनका विवाह गौरी ख़ान के साथ हिंदू रीति रिवाज़ों से हुआ|[१५] उनकी तीन संतान हैं - एक पुत्र आर्यन (जन्म १९९७) और एक पुत्री सुहाना (जन्म २०००) व पुत्र अब्राहम।
अभिनय[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
साँचा:Quote box
ख़ान ने अभिनय की शिक्षा प्रसिद्ध रंगमंच निर्देशक बैरी जॉन से दिल्ली के थियेटर एक्शन ग्रुप में ली । वर्ष २००७ में जॉन ने अपने पुराने शिष्य के बारे में कहा,
" The credit for the phenomenally successful development and management of Shah Rukh's career goes to the superstar himself."(अनुवाद - शाह रूख़ के करिअर की असाधारण सफलता का सारा श्रेय उस ही को जाता है|)[१६]
ख़ान ने अपना करिअर १९८८ में दूरदर्शन के धारावाहिक "फ़ौजी" से प्रारम्भ किया जिसमे उन्होंने कमान्डो अभिमन्यु राय का किरदार अदा किया|[१७] उसके उपरांत उन्होंने और कई धारावाहिकों में अभिनय किया जिनमे प्रमुख था १९८९ का "सर्कस"[१८], जिसमे सर्कस में काम करने वाले व्यक्तियों के जीवन का वर्णन किया गया था और जो अज़ीज़ मिर्ज़ा द्वारा निर्देशित था| उस ही वर्ष उन्होंने अरुंधति राय द्वारा लिखित अंग्रेज़ी फ़िल्म "इन विच एनी गिव्स इट दोज़ वंस" में एक छोटा किरदार निभाया| यह फ़िल्म दिल्ली विश्वविद्यालय में विद्यार्थी जीवन पर आधारित थी|
अपने माता पिता की मृत्यु के उपरांत १९९१ में ख़ान नई दिल्ली से मुम्बई आ गये| बॉलीवुड में उनका प्रथम अभिनय "दीवाना" फ़िल्म में हुआ जो बॉक्स ऑफ़िस पर सफल घोषित हुई|[१९] इस फ़िल्म के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर की तरफ़ से सर्वश्रेष्ठ प्रथम अभिनय का अवार्ड मिला| उनकी अगली फ़िल्म थी "दिल आशना है" जो नही चली। १९९३ की हिट फ़िल्म "बाज़ीगर" में एक हत्यारे का किरदार निभाने के लिए उन्हें अपना पहला फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार मिला। उस ही वर्ष में फ़िल्म "डर" में इश्क़ के जूनून में पागल आशिक़ का किरदार अदा करने के लिए उन्हें सराहा गया। इस वर्ष में फ़िल्म "कभी हाँ कभी ना" के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर समीक्षक सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया| १९९४ में ख़ान ने फ़िल्म "अंजाम" में एक बार फिर जुनूनी एवं मनोरोगी आशिक़ की भूमिका निभाई और इसके लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ खलनायक का पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।
१९९५ में उन्होंने आदित्य चोपड़ा की पहली फ़िल्म "दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे" में मुख्य भूमिका निभाई। यह फ़िल्म बॉलीवुड के इतिहास की सबसे सफल और बड़ी फ़िल्मों में से एक मानी जाती है। मुम्बई के कुछ सिनेमा घरों में यह १२ सालों से चल रही है।[२०][२१] इस फ़िल्म के लिए उन्हें एक बार फिर फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार हासिल हुआ।
१९९६ उनके लिए एक निराशाजनक साल रहा क्यूंकि उसमे उनकी सारी फ़िल्में असफल रहीं।[२२] १९९७ में उन्होंने यश चोपड़ा की दिल तो पागल है, सुभाष घई की परदेस और अज़ीज़ मिर्ज़ा की येस बॉस जैसी फ़िल्मों के साथ सफलता के क्षेत्र में फिर क़दम रखा।[२३]
वर्ष १९९८ में करण जोहर की बतौर निर्देशक पहली फ़िल्म कुछ कुछ होता है उस साल की सबसे बड़ी हिट घोषित हुई और ख़ान को चौथी बार फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार हासिल हुआ। इसी साल उन्हें मणि रत्नम की फ़िल्म दिल से में अपने अभिनय के लिए फ़िल्म समीक्षकों से काफ़ी तारीफ़ मिली और यह फ़िल्म भारत के बाहर काफ़ी सफल रही।[२४]
अगला वर्ष उनके लिए कुछ ख़ास लाभकारी नही रहा क्यूंकि उनकी एक मात्र फ़िल्म, बादशाह, का प्रदर्शन स्मरणीय नही रहा और वह औसत व्यापार ही कर पायी|[२५] सन २००० में आदित्य चोपड़ा की मोहब्बतें में उनके किरदार को समीक्षकों से बहुत प्रशंसा मिली और इस फ़िल्म के लिए उन्हें अपना दूसरा फ़िल्मफ़ेयर समीक्षक सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार मिला| उस ही साल आई उनकी फ़िल्म जोश भी हिट हुई। उस ही वर्ष में ख़ान ने जूही चावला और अज़ीज़ मिर्ज़ा के साथ मिल कर अपनी ख़ुद की फ़िल्म निर्माण कम्पनी, 'ड्रीम्ज़ अन्लिमिटिड', की स्थापना की। इस कम्पनी की पहली फ़िल्म फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी, जिसमे ख़ान और चावला दोनों ने अभिनय किया, बॉक्स ऑफ़िस पे जादू बिखेरने में असमर्थ रही। कमल हसन की विवादग्रस्त फ़िल्म हे राम में भी ख़ान ने एक सहयोगी भूमिका निभाई जिसके लिए उन्हें समीक्षकों ने सराहा हालांकि यह फ़िल्म भी असफल श्रेणी में रही।[२२]
सन २००१ में ख़ान ने करण जोहर के साथ अपनी दूसरी फ़िल्म कभी ख़ुशी कभी ग़म की, जो एक पारिवारिक कहानी थी और जिसमें अन्य भी कई सितारे थे। यह फ़िल्म उस वर्ष की सबसे बड़ी हिट फ़िल्मों की सूची में शामिल थी। उन्हें अपनी फ़िल्म अशोका, जो की ऐतिहासिक सम्राट अशोक के जीवन पर आधारित थी, के लिए भी प्रशंसा मिली लेकिन यह फ़िल्म भी नाकामयाब रही। सन् २००२ में ख़ान ने संजय लीला भंसाली की दुखांत प्रेम कथा देवदास में मुख्य भूमिका अदा की जिसके लिए उन्हें एक बार फिर फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार दिया गया। यह शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास देवदास पर आधारित तीसरी हिन्दी फ़िल्म थी।
अगले साल ख़ान की दो फ़िल्में रिलीज़ हुईं, चलते चलते और कल हो ना हो। चलते चलते एक औसत हिट साबित हुई[२६] लेकिन कल हो ना हो, जो की करण जोहर की तीसरी फ़िल्म थी, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों ही बाज़ारों में काफ़ी कामयाब रही। इस फ़िल्म में ख़ान ने एक दिल के मरीज़ का किरदार निभाया जो मरने से पहले अपने चारों ओर ख़ुशियाँ फैलाना चाहता है और इस अदाकारी के लिये उन्हें सराहा भी गया।[२६]
२००४ ख़ान के लिये एक और महत्वपूर्ण वर्ष रहा। इस साल की उनकी पहली फ़िल्म थी फ़राह ख़ान निर्देशित मैं हूँ ना, जो ख़ान द्वारा सह-निर्मित भी थी। यह फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर एक बड़ी हिट सिद्ध हुई। उनकी अगली फ़िल्म थी यश चोपड़ा कृत वीर-ज़ारा, जो उस साल की सबसे कामयाब फ़िल्म थी और जिसमे ख़ान को अपने अभिनय के लिये कई अवार्ड और बहुत प्रशंसा मिली।साँचा:Cn उनकी तीसरी फ़िल्म थी आशुतोष गोवारिकर निर्देशित स्वदेश, जो दर्शकों को सिनेमा-घरों में लाने में तोह सफल ना हो सकी लेकिन उसमें ख़ान के भारत लौटे एक अप्रवासी भारतीय की भूमिका को सराहा गया और ख़ान ने अपना छठवाँ फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार जीता।[२७]
सन २००५ में उनकी एकमात्र फ़िल्म पहेली (जो की अमोल पालेकर द्वारा निर्देशित थी) बॉक्स ऑफ़िस पर असफल रही हालांकि उसमें ख़ान के अभिनय को सराहा गया|[२८] २००६ में ख़ान एक बार फिर करण जोहर की फ़िल्म कभी अलविदा ना कहना में देखे गये जो एक अतिनाटकीय फ़िल्म थी। इस फ़िल्म ने भारत में तो सफलता प्राप्त की ही, साथ ही साथ यह विदेश में सबसे सफल हिन्दी फ़िल्म भी बन गई।[२९] उसी वर्ष ख़ान ने १९७८ की हिट फ़िल्म डॉन की रीमेक डॉन में भी अभिनय किया जो एक बड़ी हिट सिद्ध हुई।[३०]
२००७ में ख़ान की दो फिल्में आई है - चक दे! इंडिया और '['[ओम शांति ओम]]। चक दे! इंडिया में ख़ान भारतीय महिला हॉकी टीम के कोच के किरदार में नज़र आते हैं जिनका लक्ष्य है भारत को विश्व कप दिलवाना। इस किरदार की लिये ख़ान को समीक्षकों से तो ख़ासी प्रशंसा मिली ही है साथ ही साथ यह फ़िल्म एक विशाल हिट भी सिद्ध हुई है।[३१] २००७ की दूसरी फ़िल्म ओम शांति ओम में भी नज़र आए ये फराह ख़ान की शाहरुख़ ख़ान के साथ दूसरी फ़िल्म है। इसमें ख़ान ने दोहरी भूमिका निभाई। पहला किरदार ओम एक जूनियर कलाकार है और एक हादसे में मारा जाता है और दूसरा एक नामी अभिनेता ओम कपूर है। ये फ़िल्म भी २००७ की एक सफल फ़िल्म थी।
फ़िल्मी जीवन[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
साँचा:मुख्य शाहरूख़ ख़ान ने अपने फ़िल्मी जीवन की शुरूआत १९८८ में लेख टंडन के टेलीविज़न धारावाहिक दिल दरिया से आरम्भ किया था लेकिन निर्माण में देरी के कारण १९८९ का टीवी धारावाहिक फौजी उनका पहला धारावाहिक रहा।साँचा:Sfn
नामांकन और पुरस्कार[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
- 2011 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - माई नेम इज़ ख़ान
- 2007 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - चक दे! इंडिया
- 2005 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - स्वदेश
- 2003 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - देवदास
- 1999 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - कुछ कुछ होता है
- 1998 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - दिल तो पागल है
- 1996 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे
- 1994 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - बाज़ीगर
सन्दर्भ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
- ↑ (7 नवम्बर 2012)."Acting, not romance, is my forte: Shah Rukh Khan".[१]
- ↑ (20 दिसम्बर 2008)."The Global Elite – 41: Shahrukh Khan".[२]
- ↑ (5 फ़रवरी 2008). "The King of Bollywood". '. profile_1_bollywood-indian-cinema-shah-rukh-khan?_s=PM: SHOWBIZसाँचा:Dead link
- ↑ (4 अगस्त 2006). "King of Bollywood". '. London:world
- ↑ (४ सितंम्बर 2014)."भारतीय अमीरों में शुमार हुए शाहरूख़, जानें कितनी है प्रॉपर्टी".[३]
- ↑ Nachgaana: Three hours with Shah Rukh Khan Archived 28 सितंबर 2007 at Web Archive
- ↑ "ABPL Group: Shah Rukh, Dilip Kumar invited to Pakistan".[४]Retrieved 22 सितंबर 2007.
- ↑ "Afghanland: Afghans of Guyana".[५]Retrieved 22 सितंबर 2007.
- ↑ "Badshah at durbar and dinner".[६]
- ↑ "रीडिफ News Gallery: The Shahrukh Connection".[७]Retrieved 22 सितंबर 2007.
- ↑ A Hundred Horizons by Sugata Bose, 2006 USA, p136
- ↑ "Tehelka".[८]Retrieved 22 सितंबर 2007.
- ↑ "Bollywoodgate".[९]Retrieved 22 सितंबर 2007.
- ↑ "Bollywood Blitz".[१०]Retrieved 22 सितंबर 2007.
- ↑ "SRK - 'Badshah' of Bollywood".[११]Retrieved 22 सितंबर 2007.
- ↑ "Shahrukh's teacher gives him the credit".[१२]Retrieved 23 सितंबर 2007.
- ↑ "The camera chose Shah Rukh Khan".[१३]Retrieved 23 सितंबर 2007.
- ↑ "bbc.co.uk".[१४]
- ↑ "BoxOfficeIndia.Com".[१५]Retrieved 23 सितंबर 2007.
- ↑ "संग्रहीत प्रति".[१६]Retrieved 22 दिसंबर 2005.
- ↑ "´DDLJ´ Enters The Twelfth Year At The Theaters!".[१७]
- ↑ २२.० २२.१ "संग्रहीत प्रति".[१८]Retrieved 15 अक्तूबर 2006.
- ↑ "संग्रहीत प्रति".[१९]Retrieved 8 अप्रैल 2006.
- ↑ "boxofficeindia.com".[२०]
- ↑ "संग्रहीत प्रति".[२१]Retrieved 2 अप्रैल 2004.
- ↑ २६.० २६.१ "संग्रहीत प्रति".[२२]Retrieved 12 फ़रवरी 2006.
- ↑ "संग्रहीत प्रति".[२३]Retrieved 27 अक्तूबर 2004.
- ↑ "boxofficeindia.com".[२४]Retrieved 29 सितंबर 2007.
- ↑ "boxofficeindia.com".[२५]Retrieved 29 सितंबर 2007.
- ↑ "BoxOfficeIndia.com".[२६]Retrieved 29 सितंबर 2007.
- ↑ "Boxofficeindia.com".Boxofficeindia.com.[२७]
ग्रंथसूची[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
- (27 April 2012). Filming the Line of Control: The Indo-Pak Relationship Through the Cinematic Lens. Routledge.ISBN 978-1-136-51605-4.
- Bose, Derek(1 January 2006). Everybody Wants a Hit: 10 Mantras of Success in Bollywood Cinema. Jaico Publishing House.ISBN 978-81-7992-558-4.
- Chandra, Anjana Motihar(15 July 2008). India Condensed: 5,000 Years of History & Culture. Marshall Cavendish International Asia Pte Ltd.ISBN 978-981-261-975-4.
- चोपड़ा, अनुपमा(2007). King of Bollywood: Shah Rukh Khan and the Seductive World of Indian Cinema. ग्रांड सेंट्रल पब्लिशिंग.ISBN 978-0-446-50898-8.
- Ciecko, Anne Tereska Contemporary Asian Cinema: Popular Culture in a Global Frame. Berg Publishers.ISBN 978-1-84520-237-8.
- (5 April 2012). The Cambridge Companion to Modern Indian Culture. Cambridge University Press.ISBN 978-1-139-82546-7.
- Encyclopaedia of Hindi Cinema. Popular Prakashan.ISBN 978-81-7991-066-5.
- Hirji, Faiza(27 October 2010). Dreaming in Canadian: South Asian Youth, Bollywood, and Belonging. UBC Press.ISBN 978-0-7748-5971-4.
- (1 June 2011). Bollywood and Globalization: Indian Popular Cinema, Nation, and Diaspora. Anthem Press.ISBN 978-0-85728-897-4.
- O'Brien, Derek Derek Introduces: 100 Iconic Indians. Rupa Publications.ISBN 978-81-291-3413-4.
- Patel, Bhaichand Bollywood's Top 20: Superstars of Indian Cinema. Penguin Books India.ISBN 978-0-670-08572-9.
- Raj, Ashok(1 November 2009). Hero Vol.2, Volume 2. Hay House, Inc.ISBN 978-93-81398-03-6.
- Roll, Martin(17 October 2005). Asian Brand Strategy: How Asia Builds Strong Brands. Palgrave Macmillan.ISBN 978-0-230-51306-8.
- Teo, Stephen(26 April 2013). The Asian Cinematic Experience. Routledge.ISBN 978-1-136-29609-3.
बाहरी कड़ियाँ[सम्पादित करें | स्रोत सम्पादित करें]
साँचा:फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार साँचा:आई आई एफ ए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार साँचा:फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ खलनायक पुरस्कार साँचा:Authority control साँचा:श्रेणी कम