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== अगस्त्य == (पर्यायवाची - अगस्त, अगस्ति, अगस्ती, अग्निमारूति और्वशेय, कलशिसुत, कुम्भज, कुंभजात, कुम्भयोनि, कुम्भसंभव, कूटज, घटज, घटयोनि, घटसंभव, घटोद्भव, पीताब्धि, मैत्रावरूण, याम्य, विंध्यकूट, समुद्रचुलुक, सिन्धुशासनि।) (क) ‘कुम्भज’ एक प्रसिद्ध ऋषि का नाम। (£) एक नक्षत्र का नाम (Canopus)। ‘मिथुन राशि’ के दक्षिण में 70 अंश की दूरी पर ‘‘नौका मण्डल’’ (Argo Navis) दिखाई देता है। इसका आकार बड़ा विस्तृत है। यह 40 अंश दक्षिण अक्षांश से 70 अंश दक्षिण अक्षांश तथा 85 अंश देशान्तर तक फैला है। इसे ‘‘नौका पुंज’’ (Argo या Argus) भी कहते हैं। इसका सबसे चमकीला सितारा ‘अगस्त्य’ (Canopus) है जो 75 अंश देशान्तर तथा 53 अंश दक्षिणी अक्षांश के पास स्थित है। यह प्रथम श्रेणी का सितारा है जो सूर्य से 1900 गुना तेजस्वी है तथा पृथ्वी से 100 प्रकाश वर्ष दूर है। भारतीय ज्योतिषियों को प्राचीन काल से इसका ज्ञान था। महाभारत में नहुष को नाग (1:35:9) कहा है, जो बादलों के अर्थ में आया है। वेद में बादल का नाम ‘अहि’ है। वन पर्व में ‘अगस्त्येन ततोभ्युक्तो ध्वंस सर्पेति वै रूषा’ अगस्त्य नक्षत्र (तारा) के उदय होते ही सर्परूपी जल का नाश हो जाता है। यह सितारा अक्टूबर मास में सूर्यास्त के समय पूर्व में उदय होता है। भारत में यह समय वर्षा ऋतु की समाप्ति का है अतः इसका उदय होना वर्षा के अन्त का सूचक है। तुलसी दास जी ने रामचरित मानस में भी लिखा है- ‘उदय अगस्त्य पंथ जल शोषा, जिमि लोभहिं शोषे संतोषा।’ ऋग्वेद में उसे सात किरणों को मारने वाला कहा है। इसका भारतीय वैज्ञानिक नाम ‘क-नौत्तल’ तथा पाश्चात्य वैज्ञानिक नाम Alpha Majoris है। पुराण की एक कथा के अनुसार अगस्त्य कुम्भ-योनिज कहलाते हैं। अगस्त्य ने विदर्भ की राजकन्या लोपामुद्रा से विवाह किया था। विन्ध्य पर्वत गर्व के कारण बढ़ने लगा। अगस्त्य विन्ध्य पर पैर रखकर दक्षिण की तरफ गये और कहा ‘जब तक मै नहीं आऊँ तब तक नहीं बढ़ना’। अगस्त्य ने कालकेय राक्षस को समुद्र का पानी पीकर सुखाकर मार दिया। वे दक्षिण में रहे। विन्ध्य का बढ़ना भी रूक गया।
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