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{{जैन तीर्थंकर | subheader = प्रथम [[तीर्थंकर]] | image = Photo of lord adinath bhagwan at kundalpur.JPG | alt = | caption = ऋषभनाथ की प्रतिमा, इक्ष्वाकुसिदालय मे विराजित ऋषभदेव भगवान की अवगहना[[कुण्डलपुर, मध्य प्रदेश]] | अन्य नाम = आदिनाथ, ऋषभनाथ, वृषभनाथ | अगले_तीर्थंकर = [[अजितनाथ]] | शिक्षाएं = अहिंसा, अपरिग्रह | वंश = इक्ष्वाकु | पिता = [[नाभिराज]] | माता = महारानी [[मरुदेवी|मरूदेवी]] | पुत्र = [[भरत चक्रवर्ती]], [[बाहुबली]] और वृषभसेन,अनन्तविजय,अनन्तवीर्य आदि 98 पुत्र | पुत्री = ब्राह्मी और सुंदरी | च्यवन = | च्यवन_स्थान = | जन्म = चैत्र कृष्ण ९ | जन्म_स्थान = [[अयोध्या]] | दीक्षा = | दीक्षा_स्थान = | केवल_ज्ञान = | केवलज्ञान_स्थान = | मोक्ष = माघ कृष्ण १४ | मोक्ष_स्थान = [[कैलास पर्वत|कैलाश पर्वत]] | रंग = [[सोना|स्वर्ण]] | चिन्ह = वृषभ ([[बैल]]) | ऊंचाई = ५०० धनुष (१५०० मीटर) | आयु = ८,४००,००० पूर्व (५९२.७०४ × १०<sup>१८</sup> वर्ष) | वृक्ष = | यक्ष =गोमुख देव | यक्षिणी = चक्रेश्वरी | प्रथम_गणधर = | गणधरों_की_संख्य = }} भगवान '''ऋषभदेव''' [[जैन धर्म]] के प्रथम [[तीर्थंकर]] हैं।<ref>{{citation|title=" ऋषभदेव जी " |url=https://www.jainismknowledge.com/2020/05/rishabh-dev-ji.html|website=Jainism Knowledge}}</ref> तीर्थंकर का अर्थ होता है जो तीर्थ की रचना करें। जो संसार सागर (जन्म मरण के चक्र) से मोक्ष तक के तीर्थ की रचना करें, वह तीर्थंकर कहलाते हैं। ऋषभदेव जी को '''आदिनाथ''' भी कहा जाता है। भगवान ऋषभदेव वर्तमान अवसर्पिणी काल के प्रथम तीर्थंकर हैं।<ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/RisabhaDeva-TheFounderOfJainism|title=Risabha Deva - The Founder of Jainism|last=Champat Rai Jain|date=1929|others=Sabyasachi Mishra|language=English|access-date=11 मई 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20160413013803/https://archive.org/details/RisabhaDeva-TheFounderOfJainism|archive-date=13 अप्रैल 2016|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/JainaArchaeology|title=ABC of Jainism|last=S. L. Jain|others=Maitree Samooh}}</ref><ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/Digambar|title=दिगम्बरत्व और दिगम्बर मुनि|last=Jain|first=Babu Kamtaprasad|date=1975}}</ref><ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/SvayambhuWebCover|title=Acarya Samantabhadra’s Svayambhustotra – Adoration of The Twenty-four Tirthankara|last=Vijay K. Jain|date=2015|access-date=11 मई 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20161014065046/https://archive.org/details/SvayambhuWebCover|archive-date=14 अक्तूबर 2016|url-status=live}}</ref> == जीवन चरित्र == <gallery> Lord's mother with new born baby.jpg|ऋषभदेव का जन्म दर्शाती प्रदर्शनी Baby Tirthankara on Airawat Elephant.jpg|ऐरावत हाथी पर इंद्र द्वारा सुमेरु पर्वत पर अभिषेक के लिए बाल ऋषभदेव को ले जाया जाना Dance of Apsara Nilanjana.jpg|नीलांजना का नृत्य दिखलाती प्रदर्शनी Lord Risbabhdev in Samosharan on Mount Kailash.jpg|भगवान ऋषभदेव का [[समवशरण]] </gallery> जैन पुराणों के अनुसार अन्तिम कुलकर राजा [[नाभिराज]] के पुत्र ऋषभदेव हुये। भगवान ऋषभदेव का विवाह नन्दा और सुनन्दा से हुआ। ऋषभदेव के १०० पुत्र और दो पुत्रियाँ थी।<ref>https://www.jainismknowledge.com/2020/05/rishabh-dev-ji.html</ref>{{sfn|Sangave|2001|p=105}} उनमें [[भरत चक्रवर्ती]] सबसे बड़े एवं प्रथम चक्रवर्ती सम्राट हुए जिनके नाम पर इस देश का नाम '''[[भारत|भारतवर्ष]]''' पड़ा। दूसरे पुत्र [[बाहुबली]] भी एक महान राजा एवं कामदेव पद से बिभूषित थे। इनके आलावा ऋषभदेव के वृषभसेन, अनन्तविजय, अनन्तवीर्य, अच्युत, वीर, वरवीर आदि 98 पुत्र तथा ब्राम्ही और सुन्दरी नामक दो पुत्रियां भी हुई, जिनको ऋषभदेव ने सर्वप्रथम युग के आरम्भ में क्रमश: लिपिविद्या (अक्षरविद्या) और अंकविद्या का ज्ञान दिया।{{sfn|जैन|1998|p=47-48}}<ref>आदिनाथपुराण और चौबीस तीर्थंकर-पुराण</ref> [[बाहुबली]] और सुंदरी की माता का नाम सुनंदा था। भरत चक्रवर्ती, ब्रह्मी और अन्य ९८ पुत्रों की माता का नाम यशावती था। ऋषभदेव भगवान की आयु ८४ लाख पूर्व की थी जिसमें से २० लाख पूर्व कुमार अवस्था में व्यतीत हुआ और ६३ लाख पूर्व राजा की तरह|{{sfn|जैन|२०१५|p=181}} == केवल ज्ञान == [[File:Lord Risbabhdev moving over golden lotus after attaining Omniscience.jpg|thumb|ऋषभदेव भगवान [[केवल ज्ञान|केवलज्ञान]] प्राप्ति के बाद]] [[जैन ग्रंथ]]ो के अनुसार लगभग १००० वर्षो तक तप करने के पश्चात ऋषभदेव को केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। ऋषभदेव भगवान के समवशरण में निम्नलिखित व्रती थे :{{sfn|Champat Rai Jain|2008|p=126-127}} *८४ गणधर *२२ हजार [[केवली]] *१२,७०० मुनि मन: पर्ययज्ञान ज्ञान से विभूषित {{sfn|Champat Rai Jain|2008|p=126}} *९,००० मुनि अवधी ज्ञान से *४,७५० श्रुत केवली *२०,६०० ऋद्धि धारी मुनि *३,५०,००० आर्यिका माता जी {{sfn|Champat Rai Jain|2008|p=127}} *३,००,००० श्रावक == हिन्दु ग्रन्थों में वर्णन == [[साँचा:हिन्दू दर्शन|वैदिक दर्शन ]]में, [[अथर्ववेद संहिता|अथर्ववेद]] वा [[पुराण|पुराणों]] कुछ ग्रंन्थो मे ऋषभदेव का वर्णन आता है |<ref>{{Cite book|title=An Antiquty of Jainism|last=Bothra|first=Lata|publisher=Shri Jain Swetamber Khartargachha Sangha, Kolkata Chaturmass Prabandh Samiti|year=२००६|isbn=|location=Kolkata|pages=१३६}}</ref> [[साँचा:हिन्दू दर्शन|वैदिक दर्शन]] में ऋषभदेव को विष्णु के 24 अवतारों में से एक के रूप में संस्तवन किया गया है। [[भागवत पुराण|भागवत]] में ''अर्हन्'' राजा के रूप में इनका विस्तृत वर्णन है। [[भागवत पुराण|श्रीमद्भागवत्]] के पाँचवें स्कन्ध के अनुसार मनु के पुत्र प्रियव्रत के पुत्र आग्नीध्र हुये जिनके पुत्र राजा नाभि (जैन धर्म में नाभिराय नाम से उल्लिखित) थे। राजा नाभि के पुत्र ऋषभदेव हुये जो कि महान प्रतापी सम्राट हुये। भागवत् पुराण अनुसार भगवान ऋषभदेव का विवाह [[इन्द्र]] की पुत्री [[जयन्ती]] से हुआ। इससे इनके सौ पुत्र उत्पन्न हुये। उनमें [[भरत चक्रवर्ती]] सबसे बड़े एवं गुणवान थे ये भरत ही भारतवर्ष के प्रथम चक्रवर्ती सम्राट हुए;जिनके नाम से भारत का नाम भारत पड़ा |<ref>श्रीमद्धभागवत पंचम स्कन्ध, चतुर्थ अध्याय, श्लोक ९</ref> उनसे छोटे कुशावर्त, इलावर्त, ब्रह्मावर्त, मलय, केतु, भद्रसेन, इन्द्रस्पृक, विदर्भ और कीकट ये नौ राजकुमार शेष नब्बे भाइयों से बड़े एवं श्रेष्ठ थे। उनसे छोटे कवि, हरि, अन्तरिक्ष, प्रबुद्ध, पिप्पलायन, आविर्होत्र, द्रुमिल, चमस और करभाजन थे। == प्रतिमा == भगवान ऋषभदेव जी की एक ८४ फुट की विशाल प्रतिमा [[भारत]] में [[मध्य प्रदेश]] राज्य के [[बड़वानी ज़िला|बड़वानी]] जिले में [[बावनगजा]] नामक स्थान पर है और मांगीतुंगी ([[महाराष्ट्र]] ) में भी भगवान ऋषभदेव की 108 फुट की विशाल प्रतिमा है। उदयपुर जिले का एक प्रसिद्ध शहर भी ऋषभदेव नाम से विख्यात है जहां भगवान ऋषभदेव का एक विशाल मंदिर तीर्थ क्षेत्र विद्यमान हैं जिसमें ऋषभदेव भगवान की एक बहुत ही मनोहारी सुंदर मनोज्ञ और चमत्कारी प्रतिमा विराजमान है जिसे जैन के साथ भील आदिवासी लोग भी पूजते हैं। ==इन्हें भी देखें== * [[भगवान महावीर का साधना काल]] * [[नाभिराज]] * [[भरत चक्रवर्ती]] * [[शलाकापुरुष]] ==बाहरी कड़ियाँ== *[http://hi.encyclopediaofjainism.com/index.php/09._तीर्थंकर_ऋषभदेव_के_दश_ पूर्व भव तीर्थंकर ऋषभदेव के दश पूर्वभव (पूर्वजन्म)]{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }} *[https://sa.wikipedia.org/s/jt7 पुराणों में ऋषभ पर टिप्पणी](संस्कृत) == सन्दर्भ == {{reflist|30em}} <br />{{तीर्थंकर}} [[श्रेणी:दर्शन]] [[श्रेणी:जैन धर्म]] [[श्रेणी:हिन्दू धर्म]] [[श्रेणी:तीर्थंकर]]
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