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  • '''दशगीतिका''' प्रसिद्ध भारतीय खगोलज्ञ [[आर्यभट]]्ट रचित एक ग्रंथ है। {{भारतीय गणित}} ...
    ४१४ बाइट (२ शब्द) - ०२:०३, ६ मार्च २०२०
  • ...्कृत भाषा|संस्कृत]] मिश्रित [[शौरसेनी]] प्राकृत भाषाबद्ध है। इसमें प्राचीन भारतीय गणित के दर्शन होते हैं। {{भारतीय गणित}} ...
    ८३४ बाइट (२ शब्द) - २२:३२, ३ मार्च २०२०
  • हिन्दूओं के धर्मग्रंथ मुख्यतः संस्कृत में हैं। बाद के काल में आधुनिक भारतीय भाषाओं में भी अनेक धर्मग्रन्थों की रचना हुई। ==अन्य प्राचीन संस्कृत ग्रंथ== ...
    ३ KB (२ शब्द) - २३:०१, १४ अगस्त २०२१
  • {{भारतीय गणित}} [[श्रेणी:भारतीय गणित]] ...
    १ KB (२ शब्द) - १६:२७, ३ मार्च २०२०
  • ...ै। इसमें धम्मपद, उदान, इतिवुत्तक, सुत्तनिपात, थेर-थेरी गाथा, जातक आदि सोलह ग्रंथ संग्रहीत है। इनमें से कुछ में बुद्ध के प्रामाणिक वचनों का संग्रह हैं। यह छो ...9 |title=प्राचीन भारत की श्रेष्ठ कहानियाँ, लेखकः जगदीश चन्द्र जैन, प्रकाशक:भारतीय ज्ञानपीठ, प्रकाशित : मई ०९, २००३ |access-date=7 सितंबर 2008 |archive-url=ht ...
    ३ KB (८३ शब्द) - २३:४६, १४ जून २०२०
  • ...कहते हैं। आमतौर पर सिखों के दस सतगुर माने जाते हैं, लेकिन सिखों के धार्मिक ग्रंथ में छः गुरुओं सहित तीस भगतों की बानी है, जिन की सामान सिख्याओं को सिख मार्ग ...ामी रामानन्दाचार्य|रामानंद]], परमानंद, [[नामदेव]] इतियादी, जिन की बानी आदि ग्रंथ में दर्ज है, उन भगतों को भी सिख सत्गुरुओं के सामान मानते हैं और उन कि सिख्य ...
    ४ KB (१४ शब्द) - १४:५२, ३१ जनवरी २०२१
  • ...रंथ माना जाता है। बारहवीं सदी के पूर्वार्द्ध में लिखे सात अध्यायों वाले इस ग्रंथ में [[संगीत]] व [[नृत्य]] का विस्तार से वर्णन है। ...बारी थे। सिंहण की राजधानी [[दौलताबाद]] के निकट [[दौलताबाद|देवगिरि]] थी। इस ग्रंथ के कई भाष्य हुए हैं जिनमें [[सिंहभूपाल]] (1330 ई) द्वारा रचित '[[संगीतसुधाक ...
    ७ KB (१४० शब्द) - १५:१२, ५ अप्रैल २०२१
  • ...वपूर्ण है। मतंग मुनि ने इस ग्रंथ में देशी रागों का विवरण दिया है, इसलिए इस ग्रंथ का नाम 'बृहदेशी' है। इसमें [[नादयोग|नाद]] के पाँच भेद माने हैं। मतंग ने ग्र वैदिक, ऋषिप्रोक्त तथा आगम पुराण से प्रवाहित, [[भारतीय संगीत]] की त्रिवेणी में सामवेदीय परम्परा से जुड़े आचार्य [[भरत मुनि|भरत]] क ...
    ६ KB (८५ शब्द) - १३:०८, १५ जून २०२०
  • ...। उनके ये ग्रंथ केवल जैन धर्म की दृष्टि से ही महत्व के नहीं हैं, वरन समस्त भारतीय संस्कृति के गौरव माने जाते हैं। ...
    ३ KB (३ शब्द) - १३:२८, १५ मार्च २०२०
  • ...करने से या द्योतित करने से''। [[शतपथ ब्राह्मण]], जो [[यजुर्वेद]] का विवेचन ग्रंथ है, उसमें लिखा है - '''विद्वांसों हि देवा''' यानि ''विद्वान ही देवता होते ह ...को सन्मार्ग दिखाया है। आधुनिक हिन्दू धर्म में [[पुराण]] और अन्य [[स्मृति]] ग्रंथों के देवताओं का अधिक प्रयोग है। ...
    ५ KB (३६ शब्द) - १५:१८, ३ मार्च २०२०
  • | nationality = भारतीय == प्रकाशित ग्रंथ == ...
    ५ KB (२१७ शब्द) - २१:०७, २० सितम्बर २०२०
  • ...। उनके ये ग्रंथ केवल जैन धर्म की दृष्टि से ही महत्व के नहीं हैं, वरन समस्त भारतीय संस्कृति के गौरव माने जाते हें। ...
    ४ KB (२ शब्द) - १५:०६, २३ अगस्त २०२०
  • ...ाल आदि के सम्बन्ध में कुछ त्रुटियों के होते हुए भी, जिनका अपने ढंग के पहले ग्रंथ में होना बहुत स्वाभाविक है, इस कृति के लिए हिन्दी जगत् सर्वदा उनका आभारी रह ...जा सकता है। सन् १९२६ में इसका सातवाँ संस्करण प्रकाशित हुआ। १९७० में [[अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मेलन|हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग]] से इसका नवीनतम संस्क ...
    ७ KB (२५ शब्द) - २२:५६, १५ जून २०२०
  • | nationality = भारतीय '''डॉ० अंजू शर्मा''' (जन्म : ५ अगस्त, १९६०) एक जानीमानी भारतीय [[लेखक|लेखिका]], [[शिक्षक|शिक्षिका]] एवं [[चिकित्सक|चिकित्सिका]] हैं। [[आयु ...
    ८ KB (३३३ शब्द) - ०९:४८, १ अगस्त २०२१
  • {{भारतीय संगीत}} '''भारतीय शास्त्रीय संगीत''' या '''मार्ग''', [[भारतीय संगीत]] का अभिन्न अंग है। शास्त्रीय संगीत को ही ‘क्लासिकल म्यूजिक भी कहते ह ...
    १३ KB (१२२ शब्द) - २३:४६, ४ जुलाई २०२१
  • ...सुग्रथित है। इसपर विरचित [[मिताक्षरा]] टीका हिंदू धर्मशास्त्र के विषय में भारतीय न्यायालयों में प्रमाण मानी जाती रही है। ...य दो प्रमुख ग्रंथ हैं। चारों आश्रम, दंड, राजा-प्रजा, विवाह जैसे कई विषय इन ग्रंथों में साझा हैं। जहाँ मनुस्मृति ब्राह्मणों को शूद्रों से विवाह करने की आज्ञा ...
    ७ KB (६३ शब्द) - २१:३२, १ मार्च २०२०
  • ...ार पर लाट ने मूल [[सूर्यसिद्धान्त|सूर्यसिद्धांत]] के आधार पर इसी नाम के एक ग्रंथ की रचना की है। श्रीषेण के मूल वसिष्ठ सिद्धांत के आधार पर वसिष्ठ-सिद्धांत लि रचनाकाल : शक संवत् 800 के लगभग, ग्रंथ : बृहन्मानसकरण। ...
    ३४ KB (१० शब्द) - २१:३१, ११ मार्च २०२०
  • ...वीं शती के पूर्व लिखे गए थे वे आज अपने मूल रूप में उपलब्ध नहीं हैं। वैद्यक ग्रंथों में यत्रतत्र सुगंधित तेलों का उल्लेख मिलता है। ...्रकरणों के आधार पर [[नित्यनाथ]] ने तेरहवीं शती में अपने [[रसरत्नाकर]] नामक ग्रंथ में '''गंधवाद''' नामक प्रकरण लिखा है जिसमें सुगंधि तैयार करने की विस्तृत चर ...
    ९ KB (१५ शब्द) - ०८:४८, ६ मई २०२१
  • '''भारतीय संगीत''' प्राचीन काल से [[भारत]] मे सुना और विकसित होता [[संगीत]] है। इस सं ...ाजिक परंपराओं में संगीत का प्रचलन प्राचीन काल से रहा है। इस रूप में, संगीत भारतीय संस्कृति की आत्मा मानी जाती है। वैदिक काल में अध्यात्मिक संगीत को मार्गी तथ ...
    १४ KB (३६४ शब्द) - ०८:४६, ११ सितम्बर २०२०
  • {{हिंदू शास्त्र और ग्रंथ}} ...[स्मृति]] माना गया है - जिनका अर्थ है ''मनुष्यों के स्मरण और बुद्धि से बने ग्रंथ'' जो वस्तुतः श्रुति के ही मानवीय विवरण और व्याख्या माने जाते हैं। श्रुति और ...
    ७ KB (१२ शब्द) - ११:५१, २१ मई २०२१
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