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- | regions = [[राजस्थान]], [[भारत]]{{·}}[[सिंध]], [[पाकिस्तान]] ...ition.html|archive-date=31 जनवरी 2018|url-status=live}}</ref> पाकिस्तान के सिंध प्रांत में थारपारकर और संघार जिलों में उनकी गणना ज्यादा है। वे अपने लोक संग ...५ KB (१८० शब्द) - ०९:०९, १० अगस्त २०२०
- ...िया। उनके शिष्यों ने जो जिन मंदिर बनवाए वे विधि चैत्य कहलाए। यही विधि पक्ष कालांतर में खरतरगच्छ कहा जाने लगा और यही नाम आज भी प्रचलित है। इस गच्छ में अनेक गंभीर एवं प्रभावशाली आचार्य हुए हैं। उन्होंने भाषा, साहित्य, इतिहास, दर्शन, ज्योतिष, वैद्यक आदि विषयों पर संस्कृत, प्राकृत अपभ्रंश एवं देश भाषा ...३ KB (३ शब्द) - १३:२८, १५ मार्च २०२०
- ...िया। उनके शिष्यों ने जो जिन मंदिर बनवाए वे विधि चैत्य कहलाए। यही विधि पक्ष कालांतर में खरतरगच्छ कहा जाने लगा और यही नाम आज भी प्रचलित है। ...नेक गंभीर एवं प्रभावशाली आचार्य हुए हैं। उन्होंने [[भाषा]], [[साहित्य]], [[इतिहास]], [[दर्शनशास्त्र|दर्शन]], [[ज्योतिष]], [[आयुर्वेद|वैद्यक]] आदि विषयों पर [ ...४ KB (२ शब्द) - १५:०६, २३ अगस्त २०२०
- '''मोहन जोदड़ो''' पाकिस्तान के सिन्ध प्रांत का एक पुरातात्विक स्थल है। [[सिंधु घाटी सभ्यता|सिन्धु घाटी सभ्यता]] के अनेकों अवशेष यहाँ से प्राप्त हुए हैं।< ...। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक जान मार्शल के निर्देश पर खुदाई का कार्य शुरु हुआ। यहाँ पर खुदाई के समय बड़ी मात्रा में इमारतें, धातुओं की मूर्ति ...२३ KB (१८९ शब्द) - ०१:०६, ५ अगस्त २०२१
- ...] और [[राजस्थान]] की सीमा पर किसी स्थान पर हुआ था। अरब सेना ने सिन्ध पर अधिकार कर लिया किन्तु उनको सिन्ध नदी के पश्चिमी क्षेत्र तक रुकने के लिये मजबूर हो ...हुआ । इस युद्ध में, राजपूत गठबंधन गठबंधन ने अरब आक्रमणकारियों को हराया और सिंधु नदी के पूर्वी क्षेत्र से अरब आक्रमणकारियों और लूटेरों को पीछे धकेल दिया और ...७ KB (१७ शब्द) - १८:४०, ९ फ़रवरी २०२१
- [[चित्र:Grand Anicut kallanai.JPG|right|thumb|300px|कावेरी नदी पर निर्मित '''कल्लानै बाँध''' पहली-दूसरी शताब्दी में बना था था। यह ...या और कृषि के लिए औजार तथा तकनीकें विकसित कर लीं। दोहरा [[मानसून]] होने के कारण एक ...१४ KB (२३० शब्द) - १३:२४, ४ मई २०२१
- ...ms-pm-modi-reached-indore-1916415|title=जानिए कौन हैं बोहरा मुसलमान, जिनके कार्यक्रम में पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी|access-date=14 सितंबर 2018|archive-url= ==इतिहास== ...१५ KB (१७० शब्द) - ०९:०५, २९ अगस्त २०२०
- ...या गया था। यह [[भारतीय स्वतंत्रता संग्राम]] के दौरान विश्वविख्यात [[काकोरी काण्ड]] के ठीक सत्रह साल बाद ९ अगस्त सन १९४२ को गांधीजी के आह्वान पर समूचे देश ...त्र सरकार, प्रतिसरकार की स्थापना कर दी गई थी। अंग्रेजों ने आंदोलन के प्रति काफ़ी सख्त रवैया अपनाया फ़िर भी इस विद्रोह को दबाने में सरकार को साल भर से ज्य ...१९ KB (६७ शब्द) - ११:४१, १५ अगस्त २०२१
- ...[बलूचिस्तान (पाकिस्तान)|बलोचिस्तान]] प्रान्त में बोला जाता है, लेकिन कुछ [[सिंध]] और [[पंजाब (पाकिस्तान)|पंजाब]] में बसे हुए बलोच लोग भी इसे उन प्रान्तों म ...ानाज़ तथा आख्यान, शाहदाद तथा माहनाज़ की विरहकथा, [[हुमायूँ]] की मित्रता के कारण [[पानीपत का प्रथम युद्ध|पानीपत के युद्ध]] में शाहदाद तथा उसके अनुयायियों ...१६ KB (२०४ शब्द) - १२:०५, १५ जून २०२०
- ...[न्यूमोनिया]] का रूप धारण करता है। भारी पैमाने पर तबाही मचाने के कारण पूरे इतिहास में प्लेग कुख्यात रही है आज भी विश्व के कुछ भागों में प्लेग महामारी बना हुआ प्राचीन काल में किसी भी महामारी को प्लेग कहते थे। यह रोग कितना पुराना है इसका अंदाज इस ...१८ KB (३४ शब्द) - ०९:१९, २८ अप्रैल २०२१
- |regions = मुख्य रूप से सिंध बलूचिस्तान, पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा में अल्पसंख्यकों के साथ |langs = मुख्य रूप से छोटे अल्पसंख्यकों के साथ [[सिंधी भाषा|सिंधी]] {{•}} [[पंजाबी भाषा|पंजाबी]] और [[अंग्रेजी भाषा|अंग्रेजी]] ...६८ KB (२,१९६ शब्द) - १२:०३, २४ जून २०२१
- ...के अन्य गुणों की उपेक्षा भी कर दी जाए, तो भी इसके सरलतम होने को कदापि अस्वीकार नहीं किया जा सकता। ...हले का दस गुना हो जाता है। वस्तुतः शून्य के बिना कोई भी स्थानीय मान पद्धति काम नहीं कर सकती। ...२४ KB (१९६ शब्द) - ०४:०१, ६ जुलाई २०२१
- ...5]] में [[गवर्नमेंट कॉलेज विश्वविद्यालय लाहौर | गवर्नमेंट कॉलेज लाहौर]] से इतिहास में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। ज़फ़रुल्लाह जमाली प्रांत [[बलूचिस्तान ...ह जमाली [[अंग्रेज़ी भाषा| अंग्रेजी]], [[उर्दू भाषा|उर्दू]], [[सिन्धी भाषा| सिंधी]], [[बलोच भाषा और साहित्य|बलोची]], [[पंजाबी | पंजाबी]] और [[पश्तो भाषा|पश् ...२९ KB (२८४ शब्द) - २२:३६, ६ जून २०२१
- ...ो को बहुत सारी उपजातीयो बांट रखा है जिसमे गुलशन,बेरवाल, मेहरा, सोडा, जनागल कालवा,तंवर, सिगला, मंडाङ सिंहमार, पिंडार,भगत, बारुपाल, मिड़ल (मिरल),केम्मपाल, ...आर्य|आर्यों]] के आगमन से पूर्व मेघ [[असीरिया]] से [[पंजाब]] में आए और सप्त सिंधु (सात नदियों की भूमि) पर बस गए। आर्यों के दबाव के तहत, वे संभवतः [[पाषाण यु ...५४ KB (१,४१२ शब्द) - १६:१२, २५ अगस्त २०२१
- '''पंडित लेखराम''' (१८५८-१८९७), [[आर्य समाज]] के प्रमुख कार्यकर्ता एवं प्रचारक थे। उन्होने अपना सारा जीवन आर्य समाज के प्रचार-प्रसार म ...करने के सिलसिले में उन्हें भारत के अनेकानेक स्थानों का दौरा करना पड़ा। इस कारण उनका नाम 'आर्य मुसाफिर' पड़ गया। पं॰ लेखराम हिंदुओं को मुसलमान होने से ब ...३१ KB (१३९ शब्द) - २३:१८, १७ अप्रैल २०२१
- |आधिकारिक_नाम = ...}</ref> बैसाखी के दिन सूर्य [[मेष राशि|मेष]] राशि में संक्रमण करता है । इस कारण इस दिन को [[मेष संक्रांति|मेष संक्रान्ति]] भी कहते है।<ref>{{Cite book|ur ...३७ KB (८९० शब्द) - १६:२४, २८ जुलाई २०२१
- ...्दू]]|[[बेंगली भाषा|बेंगली]]|[[पंजाबी भाषा|पंजाबी]]|[[पश्तो]]|[[सिंधी भाषा|सिंधी]]|[[मराठी भाषा|मराठी]]|[[असोमी भाषा|असामी]]|[[मलयालम]]|[[कश्मीरी भाषा|कश्म ...मानों की भूराजनीतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान की चिंता करता है। इस्लाम इतिहास की शुरुआत के बाद से दक्षिण एशिया में इस्लाम का अस्तित्व है। <ref name=":0" ...१२५ KB (३,६०३ शब्द) - ००:४९, ६ मई २०२१
- ...के सांस्कृतिक इतिहास में '''भक्ति आन्दोलन''' एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। इस काल में सामाजिक-धार्मिक सुधारकों द्वारा समाज में विभिन्न तरह से [[भगवान]] की [ ...्षिण भारत से उत्तर भारत कैसे आई, उसके आन्दोलनात्मक रूप धारण करने के कौन से कारण रहे, इस पर विद्वानों में पर्याप्त मतभेद है। ...४३ KB (१६० शब्द) - १०:०३, १४ जुलाई २०२१
- ...ef>{{cite web|url= http://tdil.mit.gov.in/coilnet/ignca/kbhu_v06.htm|title=काशी की विभूतियाँ|archive-date=4 अक्टूबर 2009|format= एचटीएम|publisher=टीडिल|l ...ख़ज़ाना ज़ब्त कर लिया और उनके पति के कर्ज़ को रानी के सालाना ख़र्च में से काटने का फ़रमान जारी कर दिया। इसके परिणाम स्वरूप रानी को झाँसी का क़िला छोड़कर ...३२ KB (६०८ शब्द) - ०८:३६, २५ जून २०२१
- ...मिला। इसी वर्ष से उनके जीवन में परिवर्तन प्रारंभ हुआ और वे नबी के नाम से पुकारे जाने लगे। इसी वर्ष से अरबों के जीवन के प्रत्येक भाग में प्रभावशाली क्रांत प्राचीन काल में ईसा से तीन शताब्दी पूर्व तीन प्रकार की सभ्यताओं के नाम इतिहास में मिलते हैं : ...४४ KB (४१ शब्द) - २१:४७, ११ जून २०१८