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इस विकि पर "बौद्ध दार्शनिक" नाम का पृष्ठ बनाएँ! खोज परिणाम भी देखें।
- ...ान]] सम्प्रदाय का उपसम्प्रदाय है। महान बौद्ध दार्शनिक [[नागार्जुन (प्राचीन दार्शनिक)|नागार्जुन]] ने इसे आगे बढ़ाया। [[श्रेणी:बौद्ध धर्म]] ...२ KB (११८ शब्द) - १६:२७, १५ जून २०२०
- | religion = [[बौद्ध धर्म]] | school = [[तिब्बती बौद्ध धर्म]] ...२ KB (१४७ शब्द) - ०६:३१, १६ जून २०२०
- {{about|एक बौद्ध दार्शनिक शब्द|जैन दर्शन के संबंध|आश्रव}} आसव एक [[पालि भाषा|पालि]] शब्द हैं ([[संस्कृत भाषा|संस्कृत]]:आश्रव) जो बौद्ध शास्त्र, दर्शन, और मनोविज्ञान में प्रयोग किया जाता है, जिसका अर्थ हैं "अन्त ...३ KB (१०३ शब्द) - ०७:३१, १६ जून २०२०
- ...अनुसार न तो कोई कर्म है, न कोई क्रिया और न कोई प्रयत्न। इसका खंडन जैन तथा बौद्ध धर्म ने किया, क्योंकि ये दोनों प्रयत्न, कार्य, बल तथा वीर्य की सत्ता में वि ...१ KB (२ शब्द) - ००:५४, १ मार्च २०२०
- ...न का प्राधान्य होने पर इस विचारधारा की मान्यता नहीं रही। उत्तरकालीन यूनानी दार्शनिकों ने भी "विधि" और "कारण" को प्रधानता देकर आकस्मिकवाद के सिद्धांत को अस्वीका [[बौद्ध धर्म]] के व्यापक प्रसार के पूर्व भारत में आकस्मिकवाद की दार्शनिक मान्यता "[[यदृच्छावाद]]" के रूप में थी। [[ब्रह्मांड]] की संरचना और संचालन " ...४ KB (३ शब्द) - १७:०५, १ मार्च २०१७
- [[ चित्र: Mt Kalaish.jpg|350px|thumb| कैलाश पर्वत बौद्ध,जैन और हिन्दु धर्मावलंबियों के तीर्थ स्थानों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। ] ...सरोवर की यात्रा करने, शिव-शंभु की आराधना करने, हजारों साधु-संत, श्रद्धालु, दार्शनिक यहाँ एकत्रित होते हैं, जिससे इस स्थान की पवित्रता और महत्ता काफी बढ़ जाती ह ...५ KB (१३ शब्द) - २२:०६, १५ अगस्त २०२१
- {{About|हिन्दू धर्म के धर्मगुरु पद शंकराचार्य|दार्शनिक शंकराचार्य|आदि शंकराचार्य}} ...ुरु शंकराचार्य]] ने आरम्भ की। यह उपाधि [[आदि शंकराचार्य]], जो कि एक हिन्दू दार्शनिक एवं धर्मगुरु थे एवं जिन्हें [[हिन्दुत्व]] के सबसे महान प्रतिनिधियों में से ...५ KB (१३ शब्द) - १३:३५, १४ जुलाई २०२१
- {{about|एक जैन दार्शनिक शब्द|बौद्ध दर्शन के संबंध|आसव}} ...rl=https://www.rep.routledge.com/articles/jaina-philosophy|website=रॉउटलेज दार्शनिक विश्वकोश|publisher=रॉउटलेज|accessdate=7 सितम्बर 2016|language=अंग्रेज़ी|arc ...५ KB (८२ शब्द) - १७:३०, २५ अगस्त २०२०
- | caption = नागार्जुन और चौरासी भारतीय बौद्ध तान्त्रिक महासिद्ध | religion = महायान [[बौद्ध धर्म|बौद्ध]] ...२३ KB (२६८ शब्द) - ०२:०४, ५ फ़रवरी २०२१
- ...िकसित किया गया और बाद में पूरे एशिया में उसका प्रसार हुआ। 'दुःख से मुक्ति' बौद्ध धर्म का सदा से मुख्य ध्येय रहा है। कर्म, ध्यान एवं प्रज्ञा इसके साधन रहे है ...पिटक]] कहलाते हैं। ये पिटक बौद्ध धर्म के आगम हैं। क्रियाशील सत्य की धारणा बौद्ध मत की मौलिक विशेषता है। [[उपनिषद|उपनिषदों]] का [[ब्रह्म]] अचल और अपरिवर्तनश ...२१ KB (१५६ शब्द) - १२:२०, २७ जुलाई २०२१
- ...लोकोत्तरवादी शाखा का ग्रंथ है जिसका सर्वप्रथम उल्लेख [[नागार्जुन (प्राचीन दार्शनिक)|आचार्य नागार्जुन]] ने अपनी "[[अष्टसाहस्रिका प्रज्ञापारमिता|प्रज्ञापारमिता [[श्रेणी:बौद्ध धर्म]] ...६ KB (६ शब्द) - ०३:२०, ४ मार्च २०२०
- | subject = [[थेरवाद|थेरवाद बौद्ध धर्म]] '''बुद्धघोष''', [[पालि भाषा का साहित्य|पालि साहित्य]] के एक महान भारतीय बौद्धाचार्य और विद्वान थे। ...१३ KB (६३ शब्द) - १३:०२, १५ जून २०२०
- ...संप्रदाय में [[गौतम बुद्ध]] को [[दशावतार|दसवाँ अवतार]] माना गया है हालाँकि बौद्ध धर्म इस मत को स्वीकार नहीं करता। ...मार्ग एक ही था। यही वह समय था जब कश्मीर भारतीय तंत्र का केंद्र रहा है, अतः बौद्ध मतावलम्बियों द्वारा भारतीय तंत्र को अपनाया जाना कोई आश्चर्यजनक बात नहीं। ...१३ KB (३२३ शब्द) - २३:३५, २० जुलाई २०२१
- {{बौद्ध धर्म}} ...'विषमकोण शैली''' या '''वज्र रास्ता''' भी कहा जाता है। वज्रयान [[बौद्ध धर्म|बौद्ध]] दर्शन और अभ्यास की एक जटिल और बहुमुखी प्रणाली है जिसका विकास कई सदियों मे ...१३ KB (६४५ शब्द) - ०२:२४, २१ सितम्बर २०२०
- प्रथम धारा का प्रधान प्रतिपादक ग्रीक दार्शनिक [[एपिक्यूरस]] (341-270 ई.पू.) था। उसके अनुसार इस जीवन में आनंद की प्राप्ति ...्राप्त हो जाता है। उपनिषदों के दर्शन को आधार मानकर चलनेवाले सभी धार्मिक और दार्शनिक संप्रदायों में आनंद को आत्मा की चरम अभिव्यक्ति माना गया है। शंकर, रामानुज, ...१५ KB (१२९ शब्द) - ०७:११, १६ जून २०२०
- ...ै कि जैन, बौद्ध और [[चार्वाक दर्शन|चार्वाक]]-लोकायत की भौतिकवादी व नास्तिक दार्शनिक परंपराएं मक्खलि गोसाल के आजीवक दर्शन की ही छायाएं अथवा उसका विस्तार हैं।<re ...प्रदाय की जानकारी के लिए इतिहासकार पूरी तरह से जैन आगम के ‘भगवती सूत्र’ और बौद्ध ग्रंथ [[दीघनिकाय|दीघ निकाय]] के ‘'''समन्नफल सुत्त'''’ तथा मौर्ययुगीन [[बराब ...१९ KB (४७० शब्द) - २२:०२, ४ अगस्त २०२१
- ...ा गया है। कहना न होगा कि इस ज्ञान और प्रामाणिकता के अनुरूप ही इस ग्रन्थ को दार्शनिक क्षेत्र में परम सम्मान प्राप्त हुआ है। ...ट्ट|कुमारिल]] या प्रभाकर का निर्देश नहीं है, अतः प्रतीत होता है कि यह उक्त बौद्ध आचार्यों से बाद की और कुमारिल से पूर्व की रचना है। कुमारिल का समय ईसा की सप ...१७ KB (२१८ शब्द) - १२:३०, १२ जुलाई २०२१
- ...विवेचना करता है। [[दर्शन]] [[यथार्थ]] की परख के लिये एक [[दृष्टिकोण]] है। दार्शनिक चिन्तन मूलतः जीवन की अर्थवत्ता की खोज का पर्याय है। वस्तुतः दर्शनशास्त्र स् ...भी आदर्श पाया जाता है। परंतु यह आदर्श प्राच्य है न कि पाश्चात्य। पाश्चात्य दार्शनिक अपने ज्ञान पर जोर देता है और अपने ज्ञान के अनुरूप अपने चरित्र का संचालन करन ...२३ KB (१०८ शब्द) - ००:३०, १२ अगस्त २०२१
- '''दीघनिकाय''' ([[संस्कृत भाषा|संस्कृत]]:''दीर्घनिकाय'') [[बौद्ध]] ग्रंथ [[त्रिपिटक]] के [[सुत्तपिटक]] का प्रथम निकाय है। दीघनिकाय में कुल ३ ब्रह्मजाल सुत्त में उस समय प्रचलित 62 दृष्टियों अर्थात् दार्शनिक मतवादों का विस्तृत वर्णन है। अन्य कई एक सुत्तों में भी उनका वर्णन संक्षेप म ...१९ KB (२२६ शब्द) - ०६:२२, १५ जून २०२०
- :२. बौद्ध दर्शन ...से [[चार्वाक दर्शन|लोकायत]] के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। अपने दार्शनिक सिद्धान्त के प्रवर्तन के लिये वे अन्य सिद्धान्तों को एक-एक करके खण्डन करते ...८ KB (१३८ शब्द) - १३:३८, १० मार्च २०२१