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इस विकि पर "मिथ्या तर्क" नाम का पृष्ठ बनाएँ! खोज परिणाम भी देखें।
- (1) संशय, (2) विपर्यय तथा (3) तर्क। संदिग्ध ज्ञान को संशय, मिथ्या ज्ञान को विपर्यय एवं ऊह (संभावना) को तर्क कहते है। ...३ KB (६४ शब्द) - ०३:४१, २६ अप्रैल २०२१
- == अहिंसा का तर्क == ...५ KB (५१ शब्द) - १३:३५, २४ अगस्त २०२०
- गौड़पाद के तर्क में दो भाग हैं-- ...१४ KB (२२ शब्द) - २१:५४, १५ फ़रवरी २०२१
- [[श्रेणी:मिथ्या तर्क]] ...७ KB (१४९ शब्द) - ११:२९, २६ जून २०२०
- मध्वाचार्य ने [[श्रुति]] तथा तर्क के आधार पर सिद्ध किया कि संसार मिथ्या नहीं है, जीव ब्रह्म का आभास नहीं है, ...१० KB (७३ शब्द) - १५:५५, २३ मई २०२१
- ...ऐसे हैं जिन्हें हकीम को बिना तर्क के मान लेना चाहिए और कुछ ऐसे हैं जिन्हें तर्क और युक्ति से सिद्व करना होता हैं। ...में से जिनका अस्तिव स्पष्ट एवं निश्चित न हो, उनको समय और प्रमाण- वर्णानासह तर्क एवं युक्ति - से विस्तारपूर्वक सिद्ध करना आवश्यक हैं। ...३१ KB (९६ शब्द) - १०:५७, १५ जून २०२०
- ...देखा, कर्मयोग का अर्थ क्या है। उसका अर्थ है मौत के मुंह में भी बिना तर्क-वितर्क के सब की सहायता करना। भले ही तुम लाखों बार ठगे जाओ, पर मुँह से एक बात तक न ...१९ KB (२०२ शब्द) - १३:३९, ७ जनवरी २०२१
- ...िया। स्व-समाज, स्व-धर्म, स्व-भाषा तथा स्व-राष्ट्र के प्रति भक्ति जगाने तथा तर्क प्रधान बातें करने के कारण उत्तर भारत के पढ़े लिखे हिन्दू धीरे-धीरे इधर खिंच ...४० KB (५२७ शब्द) - १५:२५, २७ फ़रवरी २०२१
- किंतु चिंदानंद लाभ वाक्यज्ञान या तर्क द्वारा नहीं हो सकता। यह शिव के अनुग्रह से ही सिद्ध हो सकता है। इसी अनुग्रह ...२८ KB (१३८ शब्द) - १४:३८, ३ जुलाई २०२०
- ...या विवेक ज्ञान के कारण सांख्य दर्शन का "सांख्य" नाम पड़ा, उसका विशेष संबंध तर्क और बुद्धिवादिता से है। इस बुद्धिवाद के कारण अवांतर काल में सांख्य दर्शन के प्रसिद्ध भाष्यकार [[विज्ञानभिक्षु]] ने भी सांख्य को आगम या श्रुति का सत् तर्कों द्वारा किया जाने वाला मनन ही माना है। उन्होंने अपने सांख्य प्रवचन-सूत्र-भ ...४२ KB (३६४ शब्द) - २३:३५, ४ मई २०२१
- ...ा वह मानवता की रक्षा क्या करेगा? इस बात पर उन्होंने अपने पिता से बहस की और तर्क दिया कि हमें ऐसे असहाय ईश्वर की उपासना नहीं करनी चाहिए। ...ार्यों में विभिन्न प्रकार के विघ्न डाले और उनका विरोध किया। धीरे-धीरे उनके तर्क लोगों की समझ में आने लगे और विरोध कम हुआ। उनकी लोकप्रियता निरन्तर बढ़ने लगी ...६८ KB (५५३ शब्द) - १२:४०, ११ जुलाई २०२१
- ...पहली प्रवृत्ति तत्त्वों के विवेचन में कृतकार्य होती है और दूसरी प्रवृत्ति तर्क के सहारे तत्त्वों के समीक्षण में समर्थ होती है। अंग्रेजी शब्दों में पहली की प्रज्ञामूलक और तर्क-मूलक प्रवृत्तियों के परस्पर सम्मिलन से आत्मा के औपनिषदिष्ठ तत्त्वज्ञान का स ...७६ KB (५०५ शब्द) - ०३:४८, १८ जुलाई २०२१
- ...्यवहार के अच्छे तथा बुरे होने की बात करके वह आदर्शवाद का विरोध करता है तथा तर्क एवं प्रज्ञा के विषय में मनुष्यों तथा पशुओं में साम्य बताकर वह प्रकृतिवादी व ...४९ KB (४४८ शब्द) - २२:२५, १५ जून २०२०
- ...न है। नास्तिकता के लिए ईश्वर की सत्ता को स्वीकार करने के लिए अभी तक के सभी तर्क और प्रमाण अपर्याप्त है. ...चना करके उनको काट देते हैं और संसारगत दोषों को बतलाकर निम्नलिखित प्रकार के तर्कों द्वारा यह सिद्ध करने का प्रयत्न करते हैं कि ऐसे संसार का रचनेवाला ईश्वर न ...४० KB (१८९ शब्द) - ००:३२, ८ जुलाई २०२१
- ...कीर्ण, अति दूर में स्थित तथा भयानक, बीभत्स, एवं विकृतरूप वस्तुओं को देखना (मिथ्यारोग)। ये चक्षुरिंद्रिय और उसके आश्रय नेत्रों के साथ मन और शरीर में भी विकार युक्तिपूर्वक तर्क (ऊहापाह) के द्वारा प्राप्त ज्ञान अनुमान (इनफ़रेंस) है। जिन विषयों का प्रत्य ...१६१ KB (१,४६२ शब्द) - १५:४९, १० जुलाई २०२१