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इस विकि पर "स्वप्न" नाम का पृष्ठ बनाएँ! खोज परिणाम भी देखें।
- ...ंदर ही स्थित होता है, वहाँ उसके लिये पर्याप्त स्थान नहीं। स्वप्न देखनेवाला स्वप्न में दूर के स्थानों में जाकर दृश्य देखता है, परंतु जो काल इसमें लगता है वह उ ...नहीं; जो आदि और अंत में नहीं है, वह वर्तमान में भी वैसा ही है "जिस प्रकार स्वप्न और माया देखे जाते हैं, जैसे गंधर्वनगर दिखता है, उसी तरह पंडितों ने वेदांत म ...१४ KB (२२ शब्द) - २१:५४, १५ फ़रवरी २०२१
- ...्षया अधिक होता है। पर किशोरावस्था में कम हो जाता है। शारीरिक गति का व्यक्त स्वप्न से संबंधित होना आवश्यक नहीं है। जागने पर व्यक्ति नींद में चला, या अन्य क्रि * [[स्वप्न]] ...४ KB (१७१ शब्द) - ०८:०१, १५ जून २०२०
- ...ना में गठित होती हैं। मिथक और इतिहास के बीच महाकाव्य एक सेतु है, जो पुरातन स्वप्नों को काव्यात्मक ढाँचे में अवतरित करता है। ...७ KB (१२३ शब्द) - ०९:४६, ६ मई २०२१
- [[Category:स्वप्न]] ...३ KB (१०१ शब्द) - ०३:३८, १५ जून २०२०
- * ये प्रवासी स्वप्न मेरे’ (गीत संग्रह), 2013.<ref> ‘ये प्रवासी स्वप्न मेरे’ (गीत संग्रह), जया गोस्वामी, प्रकाशक - साहित्यागार, जयपुर, 2013.</ref> ...१२ KB (२२२ शब्द) - २३:१९, ६ अक्टूबर २०२०
- ...eb |http://www.abhyuday.org/xprajna/html/bhanu_shankar.php|title=महामना का स्वप्न|access-date=[[28 जुलाई]] [[2007]]|format=|publisher= अभ्युदय.कॉम|language=} ...५ KB (३३ शब्द) - १६:०५, ९ फ़रवरी २०२१
- ...का नाम मरुदेवी था। तीर्थंकर [[ऋषभदेव]] के जन्म से पूर्व माता मरुदेवी ने १६ स्वप्न देखे थे जिनका अर्थ राजा नाभिराज ने समझाया था।{{साँचा:Sfn|Jain|1929|p = 51}} ...४ KB (२०३ शब्द) - २१:३३, १६ अगस्त २०२१
- ...n|1935|p=51}} [[भरत चक्रवर्ती]] ने इस काल से संबंधित १६ स्वप्न देखे थे। इन स्वप्नों का फल तीर्थंकर [[ऋषभनाथ]] द्वारा समझाया गया था।{{Sfn|Champat Rai Jain|193 ...५ KB (११८ शब्द) - ०६:३९, १६ जून २०२०
- ...गई है। पूर्वानुराग कारण की दृष्टि से गुणश्रवण, प्रत्यक्षदर्शन, चित्रदर्शन, स्वप्न तथा इंद्रजाल-दर्शन-जन्य एवं राग स्थिरता और चमक के आधार पर नीली, कुसुंभ तथा ...८ KB (२१ शब्द) - १४:३०, २५ जनवरी २०२१
- ...है। इसमें आत्मा या चेतना के चार अवस्थाओं का वर्णन मिलता है - ''जाग्रत'', ''स्वप्न'', ''सुषुप्ति'' और ''तुरीय''। प्रथम दस उपनिषदों में समाविष्ट केवल बारह मंत् आत्मा चतुष्पाद है अर्थात् उसकी अभिव्यक्ति की चार अवस्थाएँ हैं जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति और तुरीय। ...१५ KB (३२३ शब्द) - २३:३२, ६ जून २०२१
- कहते हैं कि हितहरिवंश पहले माध्वानुयायी गोपाल भट्ट के शिष्य थे। पीछे इन्हें स्वप्न में राधिकाजी ने मंत्र दिया और इन्होंने अपना एक अलग संप्रदाय चलाया। गोस्वामी ...याओं का विवाह हरिवंश जी से करने का आग्रह किया। इस आग्रह का प्रेरक एक दिव्य स्वप्न था जो हरिवंश जी तथा आत्मदेव को उसी रात में हुआ था। फलत: दिव्य प्रेरणा मानकर ...१४ KB (८६ शब्द) - २३:०१, ७ मई २०२१
- ...का विवाह करना चाहता था। [[आल्हा]]-[[ऊदल]] उस समय [[कन्नौज]] में थे। ऊदल को स्वप्न में चन्द्रावली की कठिनाई का पता चलता है। वह योगी के वेश में आकर उसे झूला झु ...७ KB (६१ शब्द) - १५:१०, १५ जून २०२०
- ...उत्तम स्वप्न दिखते हैं। [[तीर्थंकर]] महावीर की माता [[त्रिशला]] ने १६ शुभ स्वप्न देखे थे जिनका फल [[राजा सिद्धार्थ]] ने इस प्रकार बताया था:-{{sfn|जैन|२०१५|प ...mbolic Dreams.jpg|thumb|250px|right|तीर्थंकर माता द्वारा देखे जाने वाले १६ स्वप्न]] ...३६ KB (९५ शब्द) - १४:५३, १४ अप्रैल २०२१
- ...वर्षों के दुःख, अभाव और अत्याचार का सनातन यथार्थ है तो दूसरी तरफ दलितों के स्वप्न, संघर्ष और मुक्ति चेतना की नई वास्तविकता। तर्पण में न तो दलित जीवन के चित्र ...८ KB (५२ शब्द) - २०:०९, २१ जुलाई २०२१
- ...जपान ([[:en:Rangjung Rigpe Dorje, 16th Karmapa|रंगजंग रिग्पे दोर्जे]] का "स्वप्न ध्वज") ...९ KB (२९२ शब्द) - १७:१८, ८ जनवरी २०२१
- ...] की मुख्य पृष्ठपोषिका भी हुआ करती थी। प्रचलित लोककथन के अनुसार, उन्हें एक स्वप्न में हिन्दू [[देवी]] [[काली]] ने [[दक्षिणेश्वर काली मन्दिर|भवतारिणी]] रूप मे प्रचलित लोककथन के अनुसार, उन्हें एक स्वप्न में हिन्दू [[देवी]] [[काली]] ने भवतारिणी रूप में दर्शन दिया था, जिसके बाद, ...२१ KB (२३३ शब्द) - १८:०८, १८ जुलाई २०२१
- ...ं व्यक्तियों के हृदय में स्वर्णयुग के सुंदर स्वप्न का सृजन किया, यद्यपि यह स्वप्न मृगमरीचिका के समान ही क्षणिक सिद्ध हुआ, क्योंकि इसी के गर्भ से [[नेपोलियन ब ...१९ KB (३१ शब्द) - ०५:११, ६ मार्च २०२०
- 1. बार-बार बुरे स्वप्न आने की स्थिति में जनेऊ धारण करने से ऐसे स्वप्न नहीं आते।<br /> ...१९ KB (१४७ शब्द) - १५:४५, १२ जून २०२१
- ...को जन्म दिया, जिसके शरीर पर सर्पचिह्म था। वामा देवी ने गर्भकाल में एक बार स्वप्न में एक सर्प देखा था, इसलिए पुत्र का नाम 'पार्श्व' रखा गया। उनका प्रारंभिक ज ...१० KB (६३ शब्द) - १२:१३, १५ अगस्त २०२१
- ...मनुष्यों के साथ संसर्ग भी होता प्रतीत होता है। क्या जागरण और स्वप्न का भी स्वप्न की प्रतीति तो नहीं? अहंवाद के अनुसार सारी सत्ता भारी कल्पना ही है। हमारा सा ...३५ KB (६५६ शब्द) - १८:३२, २८ मार्च २०२१