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इस विकि पर "जैन धर्म के लोग" नाम का पृष्ठ बनाएँ! खोज परिणाम भी देखें।
- {{जैन धर्म}} ...ww.hindu.com/2006/05/14/stories/2006051404820300.htm |date=7 नवंबर 2012 }} जैन मुनि आरंभ में अपने पिता dharmic आदेश</ref> एक क्षुल्लक दो वस्त्रों को पहनता ...१ KB (३३ शब्द) - १२:२९, १६ जून २०२०
- ...्या]] लगभग १५ लाख है। सराक संस्कृत के शब्द श्रावक का अपभ्रंश रूप है। [[जैन धर्म|जैनधर्म]] में आस्था रखने वाले श्रद्धालु को [[श्रावक]] कहते है। सराक जैनधर्म ...ंसा]] की भावना को नहीं छोड़ा। निर्ग्रन्थ साधुयों का साथ न मिलने के कारण वे जैन समाज की मूलधारा से कटकर आदिवासी और जनजाति की श्रेणी में आ गए l ...३ KB (९ शब्द) - १०:१३, २ मार्च २०२०
- भारतीय धर्मों ([[हिन्दू धर्म|हिन्दू]], [[जैन धर्म|जैन]], [[बौद्ध धर्म|बौद्ध]] आदि) में पवित्र स्थलों के चारो ओर श्रद्धाभाव से चलना [https://www.t ...क्रमा की यात्रा पैदल, बस या दूसरे साधनों से तय की जा सकती है लेकिन अधिकांश लोग परिक्रमा पैदल चलकर पूर्ण करते हैं। परिक्रमा दक्षिणावर्त (क्लॉक-वाइज) होती ह ...३ KB (५३ शब्द) - २०:४२, २ जनवरी २०२१
- ...करते हैं। इन यात्राओं को '''तीर्थयात्रा''' (pilgrimage) कहते हैं। [[हिन्दू धर्म]] के तीर्थ प्रायः देवताओं के निवास-स्थान महत्त्वपूर्ण तीर्थ हैं और इसके अति == हिन्दू धर्म के महत्त्वपूर्ण तीर्थ == ...४ KB (१९ शब्द) - १०:३१, २५ दिसम्बर २०२०
- ...कमी आई और सब इस नयी सरल परम्परा में दीक्षित होने लगे और यति परम्परा जो जैन धर्म की रक्षा करने वाली और आज के इस शुद्ध और सात्विक परम्परा की जनक परम्परा है ध [[श्रेणी:जैन धर्म]] ...५ KB (१२ शब्द) - १८:१६, १२ मार्च २०२०
- ...[प्रमाण]] मानते हैं। इस परिभाषा के अनुसार [[बौद्ध धर्म|बौद्ध]], [[जैन धर्म|जैन]] और [[चार्वाक दर्शन|लोकायत]] मतों के अनुयायी नास्तिक कहलाते हैं और ये तीनो ...[परलोक]] और मृत्युपश्चात् जीवन में विश्वास नहीं करते। इस परिभाषा के अनुसार केवल [[चार्वाक दर्शन]] जिसे लोकायत दर्शन भी कहते हैं, भारत में नास्तिक दर्शन क ...२ KB (२० शब्द) - ०३:४६, ६ जुलाई २०२१
- [[चित्र:In-jain.png|पाठ=Jain Flag Photo|अंगूठाकार|जैन ध्वज]] ...धशिला का उपयोग अरिहंत और आचार्य दोनों के प्रतिक रंगो पर किया जाता है ! कुछ लोग इसे पीले रंग पर रेखांकित करते हैं तथा कुछ सफ़ेद रंग पर ... दोनों ही सही ...६ KB (३८ शब्द) - २१:४६, १ मार्च २०२१
- {{जैन धर्म}} ...ाषा में अनुवाद आदिकवि पम्प ने [[चंपू|चम्पू शैली]] में किया था। इसमें [[जैन धर्म]] के प्रथम [[तीर्थंकर]] [[ऋषभदेव|आदिनाथ]] के दस जन्मों का वर्णन है। [1] ...६ KB (१०० शब्द) - ०७:०९, १६ जून २०२०
- ...ंप्रदाय में ''[[पर्यूषण पर्व|पर्यूषण]]'' का अंतिम दिन है। यह प्रत्येक वर्ष जैन पंचांग में भाद्रपद के महिने के [[पक्ष (बहुविकल्पी)|शुक्ल]] [[पंचमी]] पर आता ...संवत्सरी प्रतिक्रमण'' " नाम की ''तपस्या की'' जाती है। - प्रतिक्रमण के बाद, जैन विश्व के सभी प्राणी, दोस्तों और रिश्तेदारों को "''मिच्छामि दुक्कङम''", "खमा ...७ KB (१६४ शब्द) - २१:३७, १७ अगस्त २०२१
- {{जैन धर्म}} ...जाता है। इस बारे में बहुत ही कम लोगों को विदित है। मान्यतानुसार [[दीपावली (जैन)|दीपावली]] को [[महावीर स्वामी]] का निर्वाण हुआ था। ...५ KB (२४७ शब्द) - ०३:३८, १५ जून २०२०
- ...रोतहीन}}{{निबंध}}{{बन्द सिरा}}[[चित्र:Om jaïn orange.svg|right|thumb|200px|जैन औम चिन्ह]] जैनागम में [[अरिहंत]], [[सिद्ध (जैन धर्म)|सिद्ध]], आचार्य, उपाध्याय एवं साधु यानी मुनि रूप पाँच परमेष्ठी ही आराध्य म ...७ KB (२५ शब्द) - १३:००, २९ मई २०२०
- नोट:- [[दो जैन तीर्थंकरों ऋषभदेव एवं अरिष्टनेमि या नेमिनाथ के नामों का उल्लेख 'ऋग्वेद' में {{जैन तीर्थंकर ...१० KB (६३ शब्द) - १२:१३, १५ अगस्त २०२१
- {{जैन धर्म}} ...सत्य पर आधारित है। समय के साथ ये सत्य अदृश्य हो जाते है और फिर सर्वग्य या केवलग्यानी द्वारा प्रकट होते है। परम्परा से इस अवसर्पिणी काल मे भगवान ऋषभदेव ...१२ KB (१२ शब्द) - १४:०२, ३० मार्च २०२०
- {{जैन धर्म}} ...रतधारी श्रावक मरण के समय होने वाली सल्लेखना को प्रतिपूर्वक सेवन करे"।{{Sfn|जैन|२०११|p=१०२}} ...१२ KB (३०१ शब्द) - ००:१३, १६ जून २०२०
- ...g: 2px; text-align: center; font-size:190%; line-height:170%;">प्रवेशद्वार:धर्म और आस्था</div> {{Shortcut-l|प्र:धर्म}}[[File:16 religionist symbols.png| right| 150px]] ...११ KB (४२४ शब्द) - १४:४६, १८ मार्च २०२१
- ...आम्बेडकर ने 14 अक्तुबर 1956 के धर्म परिवर्तन समारोह दी थी। आम्बेडकर के इन धर्म परिवर्तीत बौद्ध अनुयायिओं को [[भारत सरकार]] तथा अन्य राज्य राज्य सरकारों ने ...ंत ही होंगे, कोई भी कुरीतियों या अंधविश्वास नहीं होंगा। यह एक ‘शुद्ध बौद्ध धर्म’ होंगा।’’ पत्रकार ने फिर पूछां, “क्या हम इसे 'भीमयान' कह सकते हैं?” आम्बेडक ...१३ KB (१२५ शब्द) - १६:२०, १५ अप्रैल २०२१
- [[File:जैन कालचक्र.jpeg|thumb|जैन कालचक्र- तीसरे भाग, सुखमा-दुखमा में १४ कुलकर हुए थे।]] ...{{Sfn|Jain|2008|p=36-37}} जैन ग्रन्थों में इन्हें '''मनु''' भी कहा गया है। जैन काल चक्र के अनुसार जब [[अवसर्पिणी]] काल के तीसरे भाग का अंत होने वाला था तब ...१० KB (७४ शब्द) - ००:२१, १३ अगस्त २०२१
- ...्मवाद का दर्शन मुख्यतया आदिवासी समाजों में पाया जाता है परन्तु यह [[शिन्तो धर्म|शिन्तो]] एवं [[हिन्दू|हिन्दुओं]] के कुछ सम्प्रदायों में भी पाया जाता है। ...नामवाले एक अभौतिक तत्व या शक्ति का अस्तित्व स्वीकार किया जाता है और उसे न केवल बुद्धिजीवी प्राणियों के बौद्धिक जीवन का अपितु शारीरिक अथवा भौतिक क्रियाओं ...१० KB (१०१ शब्द) - ०३:१९, १५ जून २०२०
- ...ष सम्मानित व्यक्ति होना चाहिए। हिंदू शास्त्रों के अलावा इस प्रथा का उल्लेख जैन और बौद्ध साहित्य मेंं इस सत्य को स्वीकार कर लेना चाहिए बौद्ध एवं जैन मत में नियोग: ...१० KB (७२ शब्द) - १९:२०, २७ अगस्त २०२१
- ...ार्दव, आर्जव, सत्य, शौच, संयम, तप, त्याग, अकिंचन और ब्रह्मचर्य आदि दशलक्षण धर्मों का पालन हर मनुष्य को करना चाहिए जैन ग्रन्थ, [[तत्त्वार्थ सूत्र]] में १० धर्मों का वर्णन है। यह १० धर्म है: ...२१ KB (१५३ शब्द) - १५:५५, २ अक्टूबर २०२०