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इस विकि पर "दलित साहित्यकार" नाम का पृष्ठ बनाएँ! खोज परिणाम भी देखें।
- ...er=Pearson Education India|isbn=978-81-317-0520-9|page=322</ref> हिंदी में दलित साहित्य के विकास में ओमप्रकाश वाल्मीकि की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। ...ुखर अभिव्यक्ति हुई है। वाल्मीकि कुछ समय तक [[महाराष्ट्र]] में रहे। वहाँ वे दलित लेखकों के संपर्क में आए और उनकी प्रेरणा से डॉ॰ भीमराव अंबेडकर की रचनाओं का ...१० KB (२५६ शब्द) - १९:५७, २३ जून २०२१
- ...{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>। हिंदी की पहली [[दलित]] कहानी लिखने का श्रेय भी एलिस एक्का को है<ref name="ReferenceA">वंदना टेटे ...ं 1947 में रांची से प्रकाशित ‘आदिवासी’ पत्रिका में छपी। सुप्रसिद्ध आदिवासी साहित्यकार [[वंदना टेटे]] ने आपकी कहानियों को ढूंढ निकाला जिसे 2015 में ‘एलिस एक्का की ...१९ KB (२८७ शब्द) - ११:४८, २० अगस्त २०२१
- ...। मीडिया और थियेटर के लगभग 60 से अधिक कार्यशालाओं का निर्देशन। देश के पहले दलित-आदिवासी नाट्य समारोह 2012 के परिकल्पक एवं निर्देशक। [[श्रेणी: साहित्यकार]] ...१० KB (४२३ शब्द) - ०६:४३, १६ जून २०२०
- श्री हरि राम मीणा सेवा निवृत आईजीपी पुलिस एवं साहित्यकार का योगदान भुलाया नहीं जा सकता हरी राम जी छायावादी कवि है 1990 से काव्य सृजन विविध दलित चेतना पर डा० अम्बेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार(2000)।[[राजस्थान]] साहित्य अकादमी ...७ KB (१९ शब्द) - १५:२८, ३० नवम्बर २०२०
- | subject = भारत की अधिसूचित जनजातियाँ,आदिवासी,दलित,वंचित समुदाय ...बलबूते अपने व्यक्तित्व को निखारा। उन्होंने अपने को एक पत्रकारीका, लेखिका, साहित्यकारीका और आंदोलनधर्मी के रूप में विकसित किया। ...१४ KB (१९६ शब्द) - १६:१२, १५ जून २०२०
- ...2015|pages=21–27|publisher= दलित साहित्य तथा संस्कृति प्रतिष्ठान, रत्नमाया दलित साहित्य संरक्षण समिति|chapter=आत्मवृत्तान्त|trans-chapter=आत्मवृत्तांत|isbn ...=2015|pages=21–27|publisher=दलित साहित्य तथा संस्कृति प्रतिष्ठान, रत्नमाया दलित साहित्य संरक्षण समिति|chapter=बुबालाई सम्झदा|trans-chapter=बाबा की याद में| ...४२ KB (६२९ शब्द) - २१:००, २७ जून २०२१
- रमाकांत शर्मा 'उद्भ्रांत' हिंदी साहित्य के मूर्धन्य कवि और साहित्यकार है, जिन्होंने साहित्य की गद्य-पद्य की सभी विधाओं पर प्रचुर मात्रा में कार्य ...में इन्हें शिवमंगल सिंह सुमन पुरस्कार प्रदान किया गया। सन् 1988 में ही बाल साहित्यकार परिषद लखनऊ ने इन्हें ‘बाल साहित्य श्री’ की उपाधि से विभूषित किया। प्रसिद्ध ...२५ KB (१८८ शब्द) - २३:५६, ८ नवम्बर २०२२
- ग्रामीण, पिछड़ी, दलित, आदिवासी, बिरहोड़ एवं शबर आदिम जनजाति महिलाओं के बीच शिक्षा एवं जागरूकता के [[श्रेणी: आदिवासी साहित्यकार]] ...२० KB (३८१ शब्द) - १०:४१, ३० अक्टूबर २०२०
- ...9), ‘झारखंड एक अंतहीन समरगाथा’ (2010) ‘असुर सिरिंग’ (2010), ‘पुरखा झारखंडी साहित्यकार और नये साक्षात्कार’ ( 2012), ‘आदिम राग’ (2013), ‘आदिवासी साहित्यः परंपरा और ...ी, रांची में प्रबंधक पद पर कार्यरत है। [[झारखंड आंदोलन]] के संस्कृतिकर्मी, साहित्यकार, पत्रकार, नाट्यकर्मी और फिल्मकार अश्विनी कुमार पंकज से 1992 में उन्होंने प् ...३८ KB (४९३ शब्द) - ११:०१, ६ मई २०२१
- ...mu पियो जिरिमू] ने प्रस्तुत की थी जिसे दुनिया के अधिकांश आदिवासी लेखकों और साहित्यकारों ने स्वीकार किया। इनमें अफ्रीका के [https://web.archive.org/web/2015010303 दूसरी अवधारणा उन आदिवासी लेखकों और साहित्यकारों की है जो जन्मना और स्वानुभूति के आधार पर आदिवासियों द्वारा लिखे गए साहित् ...२४ KB (३४० शब्द) - १६:३३, २८ जून २०२१
- ...आदिवासी लोक कला, विशेषकर ‘पाइका नाच’ को वैश्विक पहचान दिलाई है। वे भारत के दलित-आदिवासी और दबे-कुचले समाज के स्वाभिमान थे और विश्व आदिवासी दिवस मनाने की पर [[श्रेणी: आदिवासी साहित्यकार]] ...२१ KB (२८४ शब्द) - १७:००, ५ अगस्त २०२१
- ...गांधीजी से बड़े प्रभावित थे। उन्ही के प्रभाव से खादी के वस्त्र धारण करना, दलित उद्धार कार्य करना तथा राष्ट्रभक्ति से ओत प्रोत रचनाएं लिखा करते थे। इनकी रच ...ढ्यक्रमों में इनके लिखे गीत पढ़ाये जाने लगे, जिसने पढ़ा वह दंग रह गया, कुछ साहित्यकार की सोच को तार-तार कर के रख दिया, जो यह मानते थे कि श्री कन्हैयालाल सेठिया स ...२४ KB (३९७ शब्द) - १२:११, ६ मई २०२१
- ...की सूची से संस्कृत को निकाल देना चाहिये।<ref>India Express 5/9/1977</ref> दलित और अनुसूचित संज्ञा भिन्नता के प्रदर्शक हैं। ...तीय इतिहासकार इसे केवल फूट डालो राज़ करो की नीति का अंग मानते आए हैं। वहीं साहित्यकार इसमें अंग्रेज अनुवादकों के संस्कृत के अल्प ज्ञान को दोषी ठहराते हैं। क्योंक ...४४ KB (७३३ शब्द) - ००:२९, ७ जुलाई २०२१
- ...यह देश जब तब अपने को भूल जाता है। कोढ में खाज की तरह वामपंथी इतिहासकार और साहित्यकार स्वातन्त्रय संघर्ष के इतिहास के पृष्ठों को हटा देता है। परन्तु प्रगतिशील रा ...या है। उच्चकुल के नायकत्व के निकष को गोकुल ने बदल दिया था। अतः किसान-मजदूर-दलित के उत्थान के युग में गोकुल की उपेक्षा कब तक होती! उसने तो किसान जीवन के अस् ...५९ KB (४४० शब्द) - २३:३९, ३ अगस्त २०२१