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- ...तकों में कहीं भी कालसर्प योग का उल्लेख नहीं मिलता है। कुछ पुस्तकें सर्प योग के बारे में बताती हैं, लेकिन वह भी जातक कुण्डली के बजाय मण्डेन से संबंधित ...40/http://www.theastrologyonline.com/kaal-sarp-yog-ek-safal-jhuth/ कालसर्प योग : एक सफल झूठ] ...१ KB (१३ शब्द) - २१:३८, ३१ जुलाई २०२१
- {{आधार}} [[ज्योतिष]] के सन्दर्भ में '''राजयोग''' का अर्थ 'शुभ योग' से है। ...७८९ बाइट (३१ शब्द) - १८:४५, १५ जून २०२०
- {{आधार}} ...ोरी न करना। [[हिन्दू धर्म]] तथा [[जैन धर्म]] में यह एक गुण माना जाता है। [[योग]] के सन्दर्भ में अस्तेय, पाँच [[यम|यमों]] में से एक है। ...८१२ बाइट (४ शब्द) - १६:२४, ६ अगस्त २०१८
- {{आधार}} ...व्याकरण]] के सन्दर्भ में '''[[प्रत्याहार]]''' का अलग अर्थ है। यहाँ पातंजल योग से सम्बन्धित '''प्रत्याहार''' की चर्चा की गयी है। ...३ KB (११२ शब्द) - १६:४१, १४ अक्टूबर २०२०
- ...जाती है। सुरत का सहज और स्वाभाविक तरीके से इसी मार्ग से लौट जाना सुरत शब्द योग का विषय और प्रयोजन है।<ref>{{cite book ...्द ([[ध्वनि]]) की ओर आकर्षित होने का स्वाभाविक गुण है। यह सुरत शब्द योग का आधार सिद्धांत है।<ref>{{cite book ...३ KB (८४ शब्द) - २१:५३, १९ सितम्बर २०२०
- ...िक योग शुभ और अशुभ दोनों प्रकार से बनते हैं। योग तो बहुत से हैं लेकिन सोलह योगों का महत्व अधिक है। जो निम्न लिखित हैं - * इक्कबाल योग ...७ KB (१६ शब्द) - २१:०६, १५ जून २०२०
- ...ं मानते थे वे '''नास्तिक''' कहलाये तथा दूसरे जो वेद को प्रमाण मानकर उसी के आधार पर अपने विचार आगे बढ़ाते थे वे '''आस्तिक''' कहे गये। * [[योग दर्शन]] ...२ KB (९ शब्द) - १८:०२, ९ फ़रवरी २०१३
- '''ब्रह्मचर्य''' योग के आधारभूत स्तंभों में से एक है। ब्रह्मचर्य का अर्थ है सात्विक जीवन बिताना, == योग == ...९ KB (८७ शब्द) - १४:१२, ७ अगस्त २०२१
- उपासना के लिए व्यक्त तथा अव्यक्त दोनों आधार मान्य हैं, परंतु अव्यक्त की उपासना में अधिकतर क्लेश होता है और इसीलिए गीता ...्थ सामग्री), इज्या (पूजा), स्वाध्याय (आगम ग्रंथों का मनन) तथा योग (अष्टांग योग का अनुष्ठान)। ...६ KB (१९ शब्द) - १७:००, ८ मार्च २०२०
- ...त्मादि विभाग, आत्मादि का प्रयोजन, द्रेष्काणवश कालावयवों की उतपत्ति, लगन के आधार पर वाम, दक्षिण अंग तथा निर्बल सबल संज्ञा, लग्न द्रेष्काणवश कालावयव का ज्ञान ...फल, उच्चादि बल में प्रेष्ठादि कथन, पूर्ण चन्द्र में राजा, आयु मध्य मे सुख योग, राशि भेद फल कथन, फल भेद का निर्णय, मूल त्रिकोण व स्वगॄह के अंश, उच्च नीचाद ...३६ KB (५८ शब्द) - ००:३१, १६ जून २०२०
- योगी डॉ० '''मोतीलाल अग्रहरि गुप्तेश''' एक जाने माने [[कवि]] एवं [[आयुर्वेद|आयुर |title=पानी में योग कर मतदाताओं को किया जागरुक ...३ KB (६५ शब्द) - १६:११, १५ सितम्बर २०२०
- ...किसी दूसरी संख्या से [[विभाजन (गणित)|विभाजित]] हो सकती है या नहीं। किसी भी आधार वाले [[संख्या-पद्धति]] (जैसे, [[द्वयाधारी संख्या पद्धति|द्वयाधारी]] या [[अष ...ी संख्याओं (जिनके अंकों का योग भी बड़ी संख्या हो) के लिये यह नियम अंकों के योग पर भी लागू किया जाता है। ...१२ KB (५२१ शब्द) - १३:०२, ४ अप्रैल २०२१
- {{आधार}} ...कह सकते हैं कि किसी तन्त्र पर लगे सभी बलों द्वारा किए गये आभासी कार्यों का योग शून्य होता है। आभासी कार्य = बल x आभासी विस्थापन। किसी यांत्रिक तन्त्र पर आ ...३ KB (२८ शब्द) - २३:३१, ३ मार्च २०२०
- ...चौड़ाई में मोड़ते है तो चौड़ाई ही बेलन की ऊंचाई हो जाएगी और लंबाई बेलन के आधार की वृत्तीय परिधि होगी है। *बेलन का दो आधार का क्षेत्रफल=2πr² ...६ KB (२०८ शब्द) - १०:०२, २५ अप्रैल २०२१
- {{आधार}} कुल प्रतिबल को निम्नलिखित दो प्रतिबलों के सदिश योग के रूप में भी लिखा जा सकता है: ...३ KB (८२ शब्द) - २२:२९, ६ मार्च २०२०
- * ११ से १५ - राम का हनुमान को [[सांख्य दर्शन|सांख्य]] योग, [[भक्ति योग|भक्ति]] और [[उपनिषद्|उपनिषद]] का ज्ञान देना। ...और 1834 ई. में बलदेवदास ने जानकीविजय नाम से इस कथानक को अपनी-अपनी रचना का आधार बनाया। ...६ KB (२४ शब्द) - १६:४४, ४ मई २०२१
- | subject = [[ज्ञान योग]], [[द्वैत]] [[अद्वैत]] सिद्धान्त ...ईसा पूर्व माना गया है। उपनिषदों के काल-निर्णय के लिए निम्न मुख्य तथ्यों को आधार माना गया है— ...८ KB (२८८ शब्द) - १३:२६, १८ सितम्बर २०२०
- | subject = [[ज्ञान योग]], [[द्वैत]] [[अद्वैत]] सिद्धान्त ...ईसा पूर्व माना गया है। उपनिषदों के काल-निर्णय के लिए निम्न मुख्य तथ्यों को आधार माना गया है— ...८ KB (२८८ शब्द) - ०८:०४, १५ जून २०२०
- | subject = [[ज्ञान योग]], [[द्वैत]] [[अद्वैत वेदान्त|अद्वैत]] सिद्धान्त ...ईसा पूर्व माना गया है। उपनिषदों के काल-निर्णय के लिए निम्न मुख्य तथ्यों को आधार माना गया है— ...८ KB (२८८ शब्द) - १०:१७, १९ अक्टूबर २०२०
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